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arvind kejriwal on kanhaiya kumar

देश के लिए एक वरदान हैं डॉ. कन्हैया कुमार, झूठ के सौदागर उनके ऊपर फर्जी मुकदमे लगवा रहे

Take back the fake case against Kanhaiya Kumar

कन्हैया कुमार पर लगे फर्जी मुकदमें वापस लो

बाराबंकी, 05 मार्च 2020. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar, member of National Council of Communist Party of India and former president of Jawaharlal Nehru University Students Union)  के ऊपर लगे फर्जी मुकदमे की वापसी हेतु राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम दिया गया है।

ज्ञापन में लिखा गया है कि श्रीमद् भागवत गीता में लिखा है कि ‘यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिनिर्भवति भारत। अभ्युत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे।’

जब देश में महंगाई, बेरोजगारी शोषण, अत्याचार अपनी चरम् सीमा पर है। श्रम कानूनों की समाप्ति, शिक्षा का बजट कम करना, अवैधानिक अंधविश्वासों को बढ़ावा देना, अपने नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए बाध्य करना, हिटलर के प्रचारमंत्री गोविल्स को भी परास्त करते हुए उससे आगे जाकर झूठ के सौदागरों का बोलबाला हो जाना, ऐसे संकट के समय में छात्रों व नौजवानों के बीच में एक उभरता चेहरा डॉ. कन्हैया कुमार का है, और छात्र-युवा, नौजवानों के इस परिवर्तन की धारा के अग्रगामी पुरूष डॉ. कन्हैया कुमार को परास्त करने के लिए तरह-तरह के षड़यंत्र रचे जा रहे हैं।

आपको विदित होगा कि हर महापुरूष के उद्भव के समय से कुछ नासमझ शरारती तत्वों द्वारा कीचड़ फेंकना, पथराव करना, अशोभनीय बातें करना, तथा मानवता विरोधी मुहिम चलाई जाती थीं, लेकिन महापुरूष इन चुनौतियों को पार करते हुए मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए देश और विदेश में चर्चित हुए हैं, डॉ. कन्हैया कुमार देश के लिए एक वरदान हैं, लेकिन कुछ कुचक्री दम्भी लोग उनके ऊपर फर्जी मुकदमें कायम करवा रहे हैं।

अखिल भारतीय नौजवान सभा, ने मांगकि अविलम्ब देश विरोधी व राष्ट्रविरोधी, मानवता विरोधी शक्तियों द्वारा डॉ. कन्हैया कुमार के खिलाफ जारी षड़यंत्र की जांच कराते हुए देश भर में उनके ऊपर कायम कराये गये फर्जी मुकदमें वापस लेने का निर्देश सरकार को दें।

ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता वीरेन्द्र कुमार पटेल, बृजमोहन वर्मा, गिरीषचन्द्र, आशीष शुक्ला, संदीप तिवारी, प्रवीन वर्मा, दीपक शर्मा, महेन्द्र, सूबेदार सिंह, अकील, शकील अहमद, आदित्य सिंह, अंकुर वर्मा, श्याम सिंह, राम सिंह, दलसिंगार मौजूद रहे।

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पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

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