Home » हस्तक्षेप » आपकी नज़र » एक क्रांतिकारी आंदोलन है नागरिकता क़ानून विरोधी आंदोलन
Anti-CAA movement KHUREJI

एक क्रांतिकारी आंदोलन है नागरिकता क़ानून विरोधी आंदोलन

The anti-citizenship act movement is a revolutionary movement

नागरिकता क़ानून विरोधी महा आलोड़न के स्वत:स्फूर्त प्रवाह में राजनीतिक दलों की भूमिका इसके मार्ग की बाधाओं की सफ़ाई तक ही सीमित रहनी चाहिए।

इस आंदोलन का विस्तार जिस तेज़ी से सचमुच के एक नए, जाति, धर्म और लिंग भेद से मुक्त भारत की रचना कर रहा है, वह देश की किसी भी एक राजनीतिक दल की शक्ति के बाहर की बात है।

हमारे राष्ट्रीय जीवन का कोई भी हिस्सा इससे अछूता नहीं रहेगा। मज़दूर, किसान, दलित, आदिवासी, स्त्रियाँ, पुरुष, नौजवान और बच्चे भी, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, डाक्टर, इंजीनियर, कलाकार, लेखक, पत्रकार, बल्कि सेना और पुलिस, जज और वकील — तमाम तबकों के लोग इसमें उतरे हुए नजर आयेंगे।

It is a rare event in world history. Similar to the movement of the National Congress at the time of the freedom struggle.

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।
Arun Maheshwari – अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

यह विश्व इतिहास में एक विरल घटना है। आज़ादी की लड़ाई के वक्त की राष्ट्रीय कांग्रेस के आंदोलन की तरह ही विरल। देश की सभी मुक्तिकामी देशभक्त ताक़तों का एक वास्तविक संयुक्त मोर्चा।

आरएसएस और तमाम सांप्रदायिक ताक़तें हमेशा इस देश के हितों के विरुद्ध रही हैं और आज भी वे अपने इतिहास की उसी पंचम स्तंभ वाली जगह पर खड़ी हैं।

इस आंदोलन में शामिल सभी राजनीतिक दलों को अपनी भूमिका की सीमाओं और संभावनाओं का सम्यक ज्ञान होना ज़रूरी है ताकि वे अपनी भूमिका का सही ढंग से पालन करते हुए नये भारत के निर्माण यज्ञ में अपनी पूरी ताक़त का सदुपयोग कर सकें।

यह आंदोलन ही भारत में असंभव को साधने की राजनीति की प्रकृत भूमिका को चरितार्थ कर रहा है। यह क्रांतिकारी आंदोलन है।

-अरुण माहेश्वरी

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

killing of kashmiri pandits, bjp's failed kashmir policy,

कश्मीरी पंडितों की हत्या : भाजपा की नाकाम कश्मीर नीति

Killing of Kashmiri Pandits: BJP’s failed Kashmir policy कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की हत्या पर …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.