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मोदी नीतियों का मूल लक्ष्य : समाज का अपराधीकरण और धार्मिक तत्ववाद का विकास

सड़क और बाजार में ही पैदा होते हैं भाषा और विचार

हाय हिन्दू ! बाय हिन्दू!

पीएम नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा (Appreciation of PM Narendra Modi) न करने से भक्तगण नाराज हो जाते हैं, कहते हैं सड़क छाप लिखते हो! गोया ! सड़क सबसे फालतू चीज है! अब भक्तों को कौन समझाए भाषा और विचार सड़क और बाजार में ही पैदा होते हैं, भजनमंडली, शौचालय या ड्राईंग रूम में नहीं!

जिस विचार का जन्म सड़क या बाजार में नहीं होता, सड़क वालों की भाषा में नहीं होता, वह विचार नहीं, बोझा है।

स्वभावतः एंटी-एलीट है फेसबुक

फेसबुक इस मायने में सरल-सहज मीडियम है कि इसमें आम-फहम, सड़कछाप भाषा में चलताऊ ढंग से सब कुछ लिख-पढ़ सकते हैं! यह स्वभावतः एंटी-एलीट है!

सोशल मीडिया पंडितों-विद्वानों-प्रोफेसरों- मनीषियों-तपस्वियों के बनाए आभामंडल को नष्ट करने वाला विलक्षण मीडियम है, यह सीधे किताबी ज्ञान के बोझ से मुक्त है। दिलचस्प बात है कि मोदीजी और उनके भक्तों का लिखा, फेसबुक पर सक्रिय हिंदी के अनेक विद्वानों –शिक्षितों को पसंद है, उसमें वे देश के लिए नई ऊर्जा, नई रोशनी, कांग्रेस की मौत आदि न जाने-क्या क्या देखते हैं ! इसी को कहते दिव्य हिन्दू कुदृष्टि! 

मैंने जब सोशल मीडिया पर लिखना शुरू किया तो अपना समूचा रवैय्या बदला। वैसे भी यह मीडियम मुझे बेहद पसंद है। दिलचस्प बात है यह मीडियम मोदीजी को भी पसंद है, यहां हमारी उनकी रूचि मिलती हैं। अंतर यह है मोदीजी को यह मीडियम तब अपील किया जब उनको राष्ट्रीय नेता बनने की ललक पैदा हुई। हमें तो मित्रों के साथ संप्रेषण करने और नागरिक चेतना के प्रचार-प्रसार के लिए इसकी जरूरत महसूस हुई।

हमने इस पर कभी आंसू नहीं बहाए, लेकिन मोदीजी को आंसू टपकाते देखा !

हमने जनता के आंसुओं का अपमान नहीं किया, जनता के दुख का उपहास नहीं उड़ाया। लेकिन मोदीजी और उनके भक्तों ने आम जनता के दुखों को नहीं समझा!  वे तो मोदी की नीति से पीड़ितों के पक्ष में लिखने को हेयदृष्टि से देखते हैं। हम इस तरह के लोगों से यही कहना चाहेंगे कि आप जनता के दुखों और तबाही को देखकर जितना उपहास करेंगे, जनता के पक्ष में लिखने वालों पर जितने हमले करेंगे, जनता की नजर में उतने ही गिरेंगे।

लेकिन मैं एक बात जानता हूँ  जो व्यक्ति हिंदुत्वमन में लौट जाता है उसके लिए नागरिक चेतना का अपमान (humiliation of civic consciousness) करने की आदत पड़ जाती है,हिंदुत्व संस्कार और रूढ़ियां हर तरह के उत्पीड़न को पूर्वजन्म के पापों की आड़ में वैध बनाते हैं। असल में पुनर्जन्म की धारणा भजनमंडली की सबसे बड़ी वैचारिक फैक्ट्री है जहां से जनता की हिन्दू चेतना का निर्माण (Building the Hindu Consciousness of the People) हो रहा है।

आधुनिक नागरिक चेतना का निर्माण कैसे हो?

मोदी नीति के बारे में मोदीजी के हाहाकार और परपीड़क संप्रेषण के पीछे सक्रिय वैचारिक ईंधन को खोलने की जरूरत है। हिंदुत्व चेतना के वैचारिक ताने-बाने, संस्कारों और हिन्दू आदतों को निशाने पर लाए बगैर आधुनिक नागरिक चेतना का निर्माण (Creation of Modern Citizen Consciousness) करना संभव ही नहीं है।

समाज में व्याप्त कट्टरपंथी धार्मिक चेतना, धार्मिकता, कु-संस्कार और अधार्मिक आदतें हैं, इनसे बना हुआ व्यक्ति ही भाजपा आरएसएस को पालता रहा और उसने ही मोदी जैसे नेता को जन्म दिया है।

मोदी के खिलाफ लड़ना है तो क्या करें?

मोदी के खिलाफ लड़ना है तो उसके वैचारिक ताने बाने को चुनौती देनी होगी। मोदी नीतियों ने आम जनता की जीवनशैली को एक खास दिशा की ओर ठेल दिया है। इन नीतियों का मूल लक्ष्य है समाज का अपराधीकरण और धार्मिक तत्ववाद का विकास ! यह राजनीति के विकास का एकदम नया मॉडल है। इसके अनेक स्तर हैं, जिनको क्रमशः खुलना बाकी है।

प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी

jagdishwar chaturvedi
Jagadishwar Chaturvedi जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

Web Title : The basic goal of Modi policies: Criminalization of society and development of religious fundamentalism

(प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी की एफबी टिप्पणी का संपादित रूप साभार)

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