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GyanRanjan

किसी विचारधारा की राह पर चलनेवाले सच्चे लोग, उसके नेताओं की ग़लतियों के कारण कुचले जाते हैं – ज्ञानरंजन

“किसी विचारधारा की राह पर चलनेवाले सच्चे लोग, उसके नेताओं की ग़लतियों के कारण कुचले जाते हैं।”

ज्ञानरंजन जी

{आज फ़ोन पर हुए संवाद में}

तीन बातें

————–

आज यशस्वी कथाकार और ‘पहल’ के सम्पादक ज्ञानरंजन का जन्मदिन है। हिन्दी की एक अनमोल पत्रिका निकालते उन्हें लगभग आधी सदी होने को आयी। इस बीच जाने कितने लेखकों-कवियों की निर्मिति में उन्होंने मदद की, सहारा दिया और रौशनी दिखाई।

इस अवसर पर याद आती हैं वे तीन बातें, जो बीते बीस बरसों में मुख़्तलिफ़ मौक़ों पर उन्होंने मुझसे कहीं और जिन्हें हमेशा अपने ज़ेहन में सँभालकर रखता हूँ :

1- “आलोचना में जब वास्तविक ऊँचाई होती है, कोई उसका बुरा नहीं मानता।”

* * *

2- “मतवाले लोगों से कभी मत उलझना ! वे तुम्हें काम नहीं करने देंगे।”

* * *

3- “विश्व क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाज़ सर डॉन ब्रैडमेन उस दौर में अपने हर टेस्ट मैच में शतक बना रहे थे। अचूक होने के आत्मविश्वास से लबरेज़। उसी रौ में एक दिन अपनी पत्नी को लेकर स्टेडियम में पहुँचे कि ‘देखो, मैं कैसे खेलता हूँ !’

उस दिन वह शून्य पर आउट हुए।

धूमिल के ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन लखनऊ के सबसे बड़े और सफलतम सर्जन ने किया था। उन्हें पहले यह बताया गया था कि जिसका ऑपरेशन आप करने जा रहे हैं, वह हिन्दी के बेहद अहम कवि हैं और समस्त साहित्यिक बिरादरी, यहाँ तक कि भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी चाहती हैं कि उनका ऑपरेशन कामयाब हो।

सैकड़ों सफल ऑपरेशन करने के लिए मशहूर सर्जन उस दिन नाकाम साबित हुए।

सफलता सिर्फ़ योग्यता पर नहीं, मानसिक स्थिति या ‘मूड’ पर भी निर्भर है, जिसका अनिवार्य रिश्ता समय और समाज के हालात से होता है।”

* * *

आदरणीय ज्ञानरंजन जी के लिए जन्मदिन की बहुत बधाई, अभिनंदन और स्वस्तिकामना !

(V.S.S.D. College, Kanpur में Associate Professor Pankaj Chaturvedi की एफबी टिप्पणियों का समुच्चय साभार)

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