विकास के नकाब को नोंचती साम्प्रदायिक छवि !

विकास के नकाब को नोंचती साम्प्रदायिक छवि !

The communal image noting the mask of development!

भाजपा-मोदी-आरएसएस की तथाकथित देशभक्ति का जो रूप इस समय सामने आया है उसने मोदी ने विकास पुरूष के दावे की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। जो लोग सड़क-पानी-कारखाने-नौकरी के लिए मोदी की ओर आस लगाए बैठे थे, वे सब ठगे महसूस कर रहे हैं। इसके बावजूद आम जनता के एक बड़े वर्ग को मुसलिम विरोधी घृणा के जहर में मीडिया-साइबर सैल ने डुबो दिया है।

Never before has such a deep hatred against Muslims been seen in the history of India.

मुसलमानों के खिलाफ इतनी गहरी नफरत भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गयी। यहां तक कि शिवाजी और महाराणा प्रताफ के शासन में भी मुसलमानों के खिलाफ इस तरह की नफरत नहीं थी। विकास के नाम पर नफरत के जहर को आम जनता के जीवन में उतारकर भाजपा ने भारत की जनता को एक तरह से दण्डित किया है।

The people of India were known all over the world for secularism and Muslim love.

भारत की जनता धर्मनिरपेक्षता और मुसलिम प्रेम के लिए सारी दुनिया में विख्यात थी लेकिन सन् 2014 से लेकर आजतक मोदी सरकार और मीडिया की युगलबंदी ने मुसलमानों के खिलाफ नफरत और सामाजिक विभाजन को हवा देकर देश की अपूरणीय क्षति की है।

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) को लेकर चल रहे आंदोलन के केन्द्र में जहां एक ओर इस नफरत को खत्म करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर नागरिकता कानून के नाम पर मोदी सरकार की संविधान विरोधीमुहिम को रोकने की बड़ी जिम्मेदारी है। मोदी सरकार और उनके पिछलग्गू गू मीडिया वाले आंदोलनकारियों को हिंसक कहकर कलंकित कर रहे हैं। वे हिंसा के नाम पर आम जनता के लोकतांत्रिक हकों को छीनना चाहते हैं। हिसा के नाम आंदोलनकारियों की संपत्ति कुर्क की जा रही है, उनको तरह तरह से उत्पीड़ित किया जा रहा है।

असम से लेकर यूपी तक भाजपा सरकारें झूठे मुकदमे लगाने, हर्जाना वसूलने में लगी हैं। आंदोलनकारियों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे आंदोलन करते समय हिंसा पर नजर रखें। शांतिपूर्ण आंदोलन तेज करें।

हिन्दुस्तान के सभी बड़े-छोटे शहरों में विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्ण प्रतिवाद निरंतर चलना चाहिए। इस प्रतिवाद का सिलसिला किसी भी कींमत पर रूकना नहीं चाहिए। साथ ही विपक्षी दलों की सरकारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे हर स्तर पर केन्द्र सरकार की मुहिम का विरोध करें।

जगदीश्वर चतुर्वेदी

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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