दिनकर मोदीजी से गिड़गिड़ाए – मेहरबानी करके मजदूरों पर जुल्म बंद करवाइये, आतंक के कारण मर रहे हैं मजदूर

Modi in Gamchha

The dreaded face of this system has come to light in Modi’s rule

लखनऊ 10 मई 2020, मोदी जी आपकी बिना तैयारी और योजना के कोरोना महामारी रोकने के लिए किए लॉकडाउन के कारण तबाह हुए, पैदल चल रहे, रोटी मांग रहे मजदूरों को अगर आपकी सरकार घर नहीं पहुंचा सकती, खाना नहीं दे सकती तो बलाएं मेहरबानी उन पर लाठी चलवाना तो बंद करवाइये। पूरे देश में मजदूरों पर हो रहे दमन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने अपने बयान में यह बातें कहीं।

उन्होंने सरकार से कहा कि यदि घर जाने की जायज मांग पर मजदूर विरोध कर रहे है तो उन्हें समझाने की कोशिश करनी चाहिए। ज्यादा से ज्यादा सरकार को उन्हें कोरंटाइन कर देना चाहिए। लेकिन यह न कर सरकार ने आतंक का वातावरण बना दिया है। परिणामस्वरूप मजदूर रेलवे की पटरियों पर चल रहे है और जान गंवा रहे है। कल ही सोनभद्र में झारखंड निवासी मजदूर सरजू मल्लाह का हाथ ट्रेन से कट गया। इसलिए सरकार को मानवता के लिए मजदूरों पर लाठी चलवाना बंद करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज गोवा में सोनभद्र के जुगैल गांव के मजदूर तेज प्रताप खरवार ने घर न जा पाने के तनाव में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद, कुण्डाकुलम तमिलनाडु के न्यूक्लियर पावर प्लांट में कार्यरत मजदूरों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया। इससे पहले गुजरात में काम कर रहे यूपी के मजदूरों को एमपी में पुलिस ने मार पीट कर वापस भेज दिया। इन मजदूरों का लाखों रूपया बर्बाद हो गया। हालत इतनी बुरी है कि कोरंटाइन सेंटरों में रखे मजदूरों को खराब खाना दिया जा रहा है। यूपी के बरेली जनपद थाना आंवला में लाल मंदिर में तकरीबन 100 प्रवासी मजदूरों को आज सुबह खराब खाने पर विरोध करने पर बुरी तरह मारा गया।

दिनकर कपूर Dinkar Kapoor अध्यक्ष, वर्कर्स फ्रंट
दिनकर कपूर Dinkar Kapoor
अध्यक्ष, वर्कर्स फ्रंट

वर्कर्स फ्रंट के नेता ने कहा कि मोदी राज में इस व्यवस्था का खूंखार चेहरा सामने आ गया है।मजदूरों से लाख विरोध के बाबजूद अभी भी किराया वसूला ही जा रहा है। मजदूरों को बंधुआ बना दिया गया है और ऎसा लग रहा कि भारत फिर सामंती युग में वापस पहुंच गया है।

सरकार को हम लगातार पत्र लिखकर इस स्थिति को बदलने की मांग कर रहे है। लेकिन आरएसएस-भाजपा की सरकारें दमन पर रोक लगाने की जगह मजदूरों के अधिकारों मे कटौती करने में लगी हुई है। मजदूरों के लिए लागू कानून खत्म किए जा रहे है और काम के घंटे 12 करके सरकारों ने 33 प्रतिशत मजदूरों की छटंनी का रास्ता खोल दिया। सरकार विस्फोटक होते जा रहे हालात पर ध्यान देने की जगह डंडे से देश चलाने पर आमादा है। पीएम से एक बार फिर अनुरोध है कि ‘राष्ट्र निर्माता’ मजदूरों पर जुल्म बंद किया जाए।

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें