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लुका छुपी का खेल खत्म, मायावती अब खुलकर भाजपा के साथ, भाजपा को मजबूत करने का श्रेय सपा-बसपा को – एआईपीएफ

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hastakshep
29 Oct 2020
दलितों को दूसरों के हेलीकॉप्टर से चलने वाले नेताओं से सावधान रहना चाहिए

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The hideout game is over, Mayawati now openly with BJP – AIPF

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लखनऊ, 29 अक्तूबर 2020. आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट (एआईपीएफ) ने कहा है कि बसपा और भाजपा के बीच लुकाछिपी का खेल अब खत्म हो गया है और यह स्पष्ट हो गया है कि अब मायावती खुलकर भाजपा के साथ हैं।

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SR Darapuri released a statement

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एआईपीएफ प्रवक्ता और अवकाशप्राप्त आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि

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“मायावती ने आज उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बसपा के सात विधायकों द्वारा विद्रोह (Rebellion by seven BSP MLAs over Rajya Sabha election in Uttar Pradesh) करके सपा में चले जाने पर कहा कि वह सपा को हराने के लिए भाजपा समेत किसी भी विरोधी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन दे देंगी। मायावती के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि अब वह खुलकर भाजपा के साथ आ गई हैं और उनका भाजपा के साथ अब तक चल रहा लुका छुपी का खेल खत्म हो गया है। मायावती ने इसी प्रकार का बयान मेरठ में एक चुनावी सभा में मुसलमानों को लेकर भी दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि चूंकि मुसलमानों का कोई भरोसा नहीं है, अतः उन्होंने अपने वोटरों को कह दिया है कि वे अपना वोट मुसलमान प्रत्याशी को न देकर भाजपा प्रत्याशी को दे दें। यह उल्लेखनीय है कि मायावती इससे पहले भी तीन बार भाजपा के साथ गठजोड़ करके मुख्यमंत्री बन चुकी हैं और अब भी उससे हाथ मिलाने में उन्हें कोई परहेज नहीं है।“

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SP has a poor track record of breaking other parties

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श्री दारापुरी ने कहा कि

“जहां तक सपा का सवाल है उसका तो पहले से ही दूसरी पार्टियों को तोड़ने का ट्रैक रिकार्ड रहा है। सबसे पहले मुलायम सिंह ने सीपीआई के विधायकों को तोड़ा था। इसके बाद 2003 में बसपा के विधायकों को तोड़कर सरकार बनाई थी और अब फिर बसपा के 7 विधायकों को तोड़ा है। सपा एक बार भाजपा की मदद से सरकार भी बना चुकी है। यहाँ तक कि 1992 में संघ गिरोह द्वारा बाबरी मस्जिद तोड़ने की घटना में सपा 5 दिसम्बर से लेकर 11 दिसम्बर तक मौन धारण किये रही, जिसके गवाह खुद सपा में मौजूद रेवती रमण सिंह है. स्पष्ट है कि सपा शुरू से ही जोड़तोड़ की राजनीति करती है और वह भी आरएसएस-भाजपा के साथ गठजोड़ करती रही है.”

उन्होंने कहा कि

“इसलिए तथाकथित सामाजिक न्याय का दंभ भरने वाली सपा तथा बहुजन के नाम पर राजनीति करने वाली बसपा की अब तक की गठजोड़ व तोड़फोड़ करके सत्ता की राजनीति से आरएसएस-भाजपा को परास्त नहीं किया जा सकता उलटा उत्तर प्रदेश में तो भाजपा को मजबूत करने का श्रेय भी इन्हीं दोनों पार्टियों को जाता है।“

ऐसे में आल इंडिया पीपुल्स फ्रन्ट का निश्चित मत है कि गठजोड़ तथा तोड़फोड़ की राजनीति करने वाली इन पार्टियों द्वारा उत्तर प्रदेश का कोई भला नहीं हो सकता।  इसलिए वक्त की जरूरत है कि प्रदेश की सभी वाम जनवादी ताकतें एक बहुवर्गीय जन पार्टी के गठन हेतु संगठित हों ताकि आरएसएस/भाजपा की अधिनायकवादी एवं कार्पोरेटपरस्त राजनीति का प्रतिवाद किया जा सके।

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