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IFFI के ज्यूरी ने क्यों कहा – “कश्मीर फाइल्स” एक प्रोपेगेंडा और वल्गर (अश्लील) फिल्म है !

IFFI के ज्यूरी ने क्यों कहा – “कश्मीर फाइल्स” एक प्रोपेगेंडा और वल्गर (अश्लील) फिल्म है !

बीते सोमवार को पणजी में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष, नादव लापिड ने कहा कि, विवेक अग्निहोत्री की फिल्म, “द कश्मीर फाइल्स” एक ‘प्रोपेगेंडा और वल्गर फिल्म’ है और IFFI में भारत के अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड में, शामिल होने के योग्य नहीं है।

ज्यूरी प्रमुख ने यह बात दर्शकों को संबोधित करते हुए कही। उस समय, केंद्रीय आईबी मंत्री अनुराग ठाकुर, गोवा के सीएम प्रमोद सावंत बैठे थे।

इजरायली निदेशक ने कहा कि अग्निहोत्री के बयान से “सभी ज्यूरी सदस्य” “परेशान और हैरान” थे। फिल्म, 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के, घाटी से हुए दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद पलायन पर आधारित है।

ज्यूरी की एक गंभीर टिप्पणी है नादव लापिड का वक्तव्य

यह एक गंभीर टिप्पणी है और भारतीय फिल्म निर्माताओं को आईएफएफआई में की गई ज्यूरी की इस टिप्पणी को गंभीरता से लेना चाहिए।

हम दुनिया में सबसे अधिक फिल्में बनाने वाले देश के रूप में जाने जाते हैं। ज्यूरी प्रमुख, लैपिड ने कहा, “यह हमें पूरी तरह से एक प्रचार, अश्लील फिल्म की तरह लगी, जो इस तरह के एक प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के कलात्मक प्रतिस्पर्धी खंड के लिए अनुपयुक्त है। मैं यहां मंच पर आपके साथ इन भावनाओं को खुले तौर पर साझा करने में पूरी तरह से सहज महसूस करता हूं।”

वे आगे कहते हैं, “क्योंकि उत्सव में हमने जो भावना महसूस की वह निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण चर्चा को भी स्वीकार कर सकती है, जो कला और जीवन के लिए आवश्यक है।”

इजरायली फिल्म निर्देशक, लापिड के अलावा, इस निर्णायक मंडल में, अमेरिकी निर्माता जिंको गोटोह, फ्रांसीसी फिल्म संपादक पास्कल चावांस, फ्रांसीसी वृत्तचित्र फिल्म निर्माता जेवियर अंगुलो बार्टुरेन और एक भारतीय निर्देशक, सुदीप्तो सेन  थे।

कौन हैं नादव लापिड? (Who is Nadav Lapid?)

नादव लापिड एक इज़राइली पटकथा लेखक और फिल्म निर्देशक हैं, जिन्होंने 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के जूरी प्रमुख के रूप में कार्य किया। लापिड इज़राइल के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निर्देशक हैं और उनकी फिल्में कई अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में पुरस्कृत और सराही जा चुकी हैं।

फिल्म द कश्मीर फाइल्स” ने धन तो बहुत कमाया पर…

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आईएफएफआई के ज्यूरी प्रमुख की यह टिप्पणी, फिल्म, रंगमंच और अन्य ललित कलाओं को, किसी खास उद्देश्य के लिए, घृणित और वैमनस्यता फैलाने वाली मानसिकता से दूर रखने का एक संदेश और आग्रह भी है। फिल्म, कश्मीर फाइल्स जब पर्दे पर आई थी, तभी उस पर कश्मीर से जुड़ी कुछ मिथ्या घटनाओं के चित्रण के आरोप भी लगे थे। पर जब उन घटनाओं पर बात शुरू हुई तो, आलोचकों को ही फिल्म के समर्थकों ने ट्रोल करना शुरू कर दिया था। फिल्म के, प्रदर्शन के लिए जिस तरह से, बीजेपी शासित सरकारों ने, दीवानगी दिखाई, उससे तभी लग रहा था, यह फिल्म, एक विशेष मानसिकता के प्रोपेगेंडा के उद्देश्य से ही बनाई गई है।

आशा के विपरीत फिल्म ने धन बहुत कमाया, पर उसका कारण फिल्म का कथ्य, शिल्प, अभिनय आदि में श्रेष्ठ होना नहीं था, बल्कि फिल्म देखने के लिए एक मिशन की तरह से, सांप्रदायिक आधार पर लोगों को प्रेरित या ध्रुवीकृत किया जाना था। लगभग सभी भाजपा शासित राज्यों में फिल्म को कर मुक्त किया गया था। फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग की गई। और तो और, फिल्म की आलोचना, भले ही वह फिल्म के तकनीकी पक्ष की, की गई हो, या अभिनय की, या निर्देशन की, उसे देश की अस्मिता से जोड़ कर देखा जाने लगा था। फिल्म के पक्ष और विरोध में जैसा वातावरण बनाया गया था, वैसा, अब तक, शायद ही किसी फिल्म को लेकर, बनाया गया होगा।

बता दें कि 11 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’ आईएफएफआई में इंडियन पैनोरमा सेक्शन का हिस्सा थी और 22 नवंबर को प्रदर्शित की गई थी। हालांकि, फिल्म समीक्षक, तब भी इस फिल्म को एक प्रोपेगेंडा फिल्म के ही रूप में देखते थे, और इसे एक औसत फिल्म ही मानते थे।

फिल्म के, सांप्रदायिक आधार पर विभाजनकारी, होने की बात भी कही गई है। आईएफएफआइ की जूरी में, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के काबिल और प्रोफेशनल फिल्म निर्देशक होते हैं, जो कला, अभिव्यक्ति, संवेदनशीलता की आड़ में, फैलाए जाने वाले प्रोपेगेंडा को आसानी से भांप जाते हैं।

जूरी ने फिल्म के उद्देश्य, प्रोपेगेंडा, और कथ्य तथा शिल्प को, वल्गर कह कर, इसे एक शॉक देने वाली फिल्म बताया है।

ज्यूरी का यह बयान, किसी समय, ‘कश्मीर का सच दिखाने वाली फिल्म’ के रूप में प्रचारित इस फिल्म पर एक गंभीर और प्रोफेशनल टिप्पणी है।

लेकिन, ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म पर IFFI जूरी हेड और इजराइल के फिल्म मेकर नदव लैपिड के बयान पर विवाद मच गया है। इस मामले में भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जूरी हेड नदव लैपिड के बयान को निजी बताया। उन्होंने कहा कि नदव लैपिड के बयान पर हमें शर्म आती है।

उन्होंने ट्वीट कर जूरी के प्रमुख इजरायली फिल्म मेकर लैपिड पर निशाना साधा। वहीं, फिल्म मेकर अशोक पंडित ने कश्मीरियों का अपमान बताया।

इज़राइल के अर्थव्यवस्था और उद्योग मंत्रालय के महानिदेशक रॉन मलका ने भी ट्वीट कर नादव लापिड की टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने ट्वीट किया-

“मैं नादव लापिड की टिप्पणियों की कड़ी निंदा और अस्वीकृति करता हूं। यह इजरायल की स्थिति नहीं है। मैं आज और हर दिन अपने भारतीय दोस्तों के साथ खड़ा हूं। 🇮🇳🇮🇱”

विजय शंकर सिंह

(लेखक अवकाशप्राप्त वरिष्ठ आईपीएस अफसर हैं।)

retired senior ips officer vijay shankar singh
retired senior ips officer vijay shankar singh

The Kashmir Files is a propaganda and vulgar film ~ Jury, IFFI / Vijay Shankar Singh

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