राजनीति व मीडिया जैसे विषय पर पुस्तक लिखने वाली महिलाओं की संख्या नगण्य

बिहार में कभी भी पत्रकारिता का सुनहरा वक्त नहीं रहा। 1970 के दशक में ग्रास रूट की चर्चा पत्रकारिता में नहीं दिखती थी। खबरों के साथ भेदभाव किया जाता था।

The number of women writing books on topics like politics and media is negligible

मीडिया मोरचा की संपादक डॉ लीना की पुस्तक बिहार में 1970 का दशक “राजनीति और मीडिया” का लोकार्पण

1970 ka dashak “Rajniti aur Media”, Book by Dr. Leena, Editor of Media Morcha, inaugurated

पटना, 26 सितम्बर 2020. जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं शोध संस्थान, पटना के रिडिंग सेंटर में बीती 24 सितंबर को ‘मीडियामोरचा’ की संपादक डॉ  लीना की अतुल्य पब्लिकेशन, नई दिल्ली से सद्यः प्रकाशित पुस्तक “बिहार में 1970 का दशक राजनीति और मीडिया” का लोकार्पण संस्थान के निदेशक श्रीकांत, वरिष्ठ पत्रकार प्रणव चौधरी, अमरनाथ तिवारी, सीटू तिवारी, पूनम उपाध्याय ने संयुक्त रूप से किया।

लोकार्पण के दौरान वक्ताओं ने डॉ लीना के प्रयास को सराहनीय कहा। ऐसे विषय पर एक महिला पत्रकार द्वारा शोधपरक पुस्तक लिखा जाना ही अपने आप में सराहनीय है।

पत्रकार सीटू तिवारी ने राजनीति और मीडिया” पुस्तक की चर्चा करते हुये कहा कि राजनीति और मीडिया पर पुस्तक लिखने वाली महिलाओं की संख्या नहीं के बराबर है। 

वहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रणव चौधरी ने 1970 के दशक के दौर की पत्रकारिता की चर्चा करते हुये कहा कि बिहार में कभी भी पत्रकारिता का सुनहरा वक्त नहीं रहा। 1970 के दशक में ग्रास रूट की चर्चा पत्रकारिता में नहीं दिखती थी। खबरों के साथ भेदभाव किया जाता था।

लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ तिवारी ने कहा कि 1970 के दशक को लेकर इस पुस्तक में चर्चा है लेकिन हालिया राजनीति और मीडिया पर भी इसमें चर्चा होने से बेहतर होता।

इस अवसर पर जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं शोध संस्थान के निदेशक श्रीकांत ने कहा कि डॉ लीना का यह बहुत अच्छा प्रयास है लेकिन और गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों को लेकर ज्यादा से ज्यादा शोध की आवश्यकता है। शोध में स्थानीय अखबारों की और अधिक चर्चा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उस दशक में जे पी भी कहते थे कि अख़बार उनकी बातें नहीं छापते और अख़बार उलटा लिखते थे। 

मौके पर पुस्तक की चर्चा करते हुये लेखिका डॉ. लीना ने कहा कि 1970 के दशक में बिहार की राजनीति जेपी आंदोलन और आपातकाल सहित काफी उथल पुथल वाली रही थी। अपने झुकावों के बावजूद पत्र पत्रिकाओं ने सूचनाओं को छुपाया नहीं और लोगों तक खबरें पहुंचती रहीं। लेकिन सवाल भी उठते रहे।

पुस्तक लोकार्पण के मौके पर नीरज कुमार, प्रभात सरसिज, हेमंत, संजय कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
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उपाध्याय अमलेन्दु:
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