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ustice Katju on Kisan protest

किसान आंदोलन से पता चला है कि भारतीय किसानों में हनुमानजी की शक्ति है

The peasant movement has shown that Indian farmers have the power of Hanumanji

जस्टिस मार्कंडेय काटजू, पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया

तुलसी दास के रामचरित मानस के ‘किष्किन्धाकाण्ड’ में ये पंक्तियाँ हैं :

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना॥

पवन तनय बल पवन समाना। बुधि‍ बिबेक बिग्यान निधाना॥

कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥

राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्बताकारा॥

कनक बरन तन तेज बिराजा। मानहुं अपर गिरिन्ह कर राजा ॥

सिंहनाद करि बारहिं बारा। लीलहिं नाघउं जलनिधि खारा॥

सहित सहाय रावनहि मारी। आनउं इहां त्रिकूट उपारी॥

जामवंत मैं पूंछउं तोही। उचित सिखावनु दीजहु मोही॥

एतना करहु तात तुम्ह जाई। सीतहि देखि कहहु सुधि आई॥

तब निज भुज बल राजिवनैना। कौतुक लागि संग कपि सेना॥

ऊपर दी गयी पंक्तियाँ रामेश्वरम में भगवान राम की सेना के समुद्र तट पर पहुंचने के बाद की घटना से संबंधित हैं-

जाम्बवंतजी ने देखा कि हनुमानजी गहरे चिंतन में अकेले बैठे हैं। हनुमानजी के समीप जाकर जाम्बवंतजी, जो ज्ञान के अवतार हैं, ने कहा :

“आप चुप क्यों हैं ?

आप वायु के देवता पवन के पुत्र हैं

और पवन की ताकत रखते हैं

आप ज्ञान से भी भरे हुए हैं

दुनिया में ऐसा क्या है जो आप नहीं कर सकते हैं?

आप भगवान राम की सेवा करने के लिए बने थे ”

इन शब्दों को सुनकर, हनुमानजी की आकृति बढ़ने लगी, और वे पर्वत के समान विशाल हो गए। उनका शरीर सोने की तरह चमकने लगा और वह शेर की तरह दहाड़ने लगे, और भीषण हुंकार की कि वह समुद्र को निगल कर पार कर जाएंगे। फिर उन्होंने जाम्बवंत से उन्हें एक अच्छी सलाह देने का आग्रह किया, और इस पर जाम्बवंतजी ने उन्हें केवल लंका जाकर सीता माता की कुशलता का पता लगाने के लिए कहा।

मेरे विचार में, भारतीय किसान हनुमानजी की तरह हैं। हालाँकि संख्या में 70 करोड़ (700 मिलियन ) होने के बावजूद वे मौन थे। लेकिन अब उन्हें अपनी ताकत का एहसास हो गया है, वे जाग गए हैं और दहाड़ने लगे हैं। ज्ञान से भरपूर होने के बावजूद, उनके पास विनय और संयम भी है। इसलिए उन्होंने उकसावे के बावजूद हिंसा नहीं की।

जिस तरह हनुमानजी ने समुद्र पार किया, मुझे यकीन है कि भारतीय किसान सभी विरोधों पर विजय प्राप्त करेंगे और विजयी होंगे।

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