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A report from the Kisan Andolan Tikari Border 2

जिस दिन अजित अंजुम के सवाल का कोई उत्तर मिल जाएगा, उसी दिन इस संघर्ष का अंत भी हो जाएगा !

किसानों का संघर्ष एक क्रांतिकारी संघर्ष है !

अजित अंजुम एक किसान से पूछ रहे थे कि इतने दिनों से चल रहे इस आंदोलन का क्या होगा, अर्थात् इसका अंत क्या है ?

दरअसल वे यह सवाल आंदोलन में शामिल किसान से नहीं, खुद से ही कर रहे थे।

इसके अंत का कोई अनुमान न मिलना ही इसके असंभव, अचिन्त्य क्षेत्रों में प्रवेश की संभावनाओं को बनाता है।

और कहना न होगा, इस आंदोलन का यही पहलू  मोदी-आरएसएस की तरह के पूँजीवादी तानाशाहों की नींद हराम कर रहा है, उन्हें, जिसे किंकर्तव्यविमूढ़ कहते हैं, वैसा पंगु बना दे रहा है।

यह एक प्रकार से मौजूदा पूरे राजनीतिक संस्थान के एक बड़ी चुनौती है।

और, इस आंदोलन के इसी पहलू से हम इसके क्रांतिकारी चरित्र का, यहाँ तक कि विश्व पूंजीवाद के सामने इससे एक बड़ी और प्रभावी चुनौती का संकेत पाते हैं।

जिस दिन अजित अंजुम के सवाल का कोई उत्तर मिल जाएगा, उसी दिन इस संघर्ष का अंत भी हो जाएगा।

अरुण माहेश्वरी

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।
Arun Maheshwari – अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।
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