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Justice Markandey Katju
The prostitute has more respect than a sold-out journalist, the former chairman of the Press Council again reminded
नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2020. पूरे देश के किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत हैं और 130 करोड़ भारतवासी इन किसानों के साथ खड़े हैं, लेकिन जनविरोधी गोदी मीडिया के नाम से मशहूर हो गया तथाकथित मुख्यधारा का मीडिया इन किसानों और 130 करोड़ भारतीयों के खिलाफ ज़हर उगल रहा है।
इस बिकाऊ मीडिया को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन और सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सआदत हसन मंटो की पत्रकारों पर उक्ति (Saadat Hasan Manto's statement on journalists) के साथ आगाह किया है।
जस्टिस काटजू ने मंटो के एक चित्र को ट्वीट किया, जिस पर मंटो का कथन –“ कोठे का तवायफ़ और एक बिका हुआ पत्रकार एक ही श्रेणी में आते हैं। लेकिन इनमें तवायफ़ की इज़्ज़त ज्यादा होती है...।
-सआदत हसन मंटो” लिखा हुआ है।
इसके साथ जस्टिस काटजू ने अपनी टिप्पणी जोड़ी – “To the entire shameless sold out sycophantic godi media”
जस्टिस काटजू के ट्वीट के उत्तर में एक ट्विटर उपभोक्ता अंकुर त्रिपाठी @AnkurTripathe ने भी मंटो का दूसरा कथन चस्पा कर दिया –
“लीडर जब आँसू बहा कर लोगों से कहते हैं कि मज़हब ख़तरे में है तो इस में कोई हक़ीक़त नहीं होती। मज़हब ऐसी चीज़ ही नहीं कि ख़तरे में पड़ सके, अगर किसी बात का ख़तरा है तो वो लीडरों का है जो अपना उल्लू सीधा करने के लिए मज़हब को ख़तरे में डालते हैं।
~मंटो”