प्रॉप्रटी खरीदने जा रहे हैं, रखें इन बातों का ख्याल

Things you should know

प्रॉपर्टी खरीदते वक्त स्टांप ड्यूटी के बारे में ये 10 बातें जानना आपके लिए बेहद जरूरी हैं

These 10 things are very important for you to know about stamp duty while buying property.

जब आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उसमें काफी पेपर वर्क (Paper work while purchasing property) शामिल होता है। इस दौरान ग्राहकों को प्रॉपर्टी की खरीद पर स्टांप ड्यूटी (Stamp duty on the purchase of property) का भुगतान करना पड़ता है। इस प्रक्रिया में पैसा भी खर्च होता है। आखिरकार ये कागजात ही सबूत होते हैं कि आप ही प्रॉपर्टी के असली मालिक हैं।

बैनामा प्रक्रिया शुरू होने के बाद इंडियन स्टांप ड्यूटी एक्ट 1899 के सेक्शन 3 (Section 3 of the Indian Stamp Duty Act 1899 in Hindi) के तहत ग्राहकों को एक बार रजिस्ट्रेशन चार्ज और स्टांप ड्यूटी चुकानी होती है। इस प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने के लिए प्रोपगाइड आपको स्टांप ड्यूटी चार्जेज (Stamp duty charges) के 10 पहलुओं के बारे में बता रहा है, जिसे हर ग्राहक के लिए जानना जरूरी है।

स्टांप ड्यूटी रेट : Stamp duty rate

देश के विभिन्न राज्यों में स्टांप ड्यूटी का रेट अलग है, जो करीब 4 से 10 प्रतिशत के बीच है। दूसरी ओर सभी राज्यों में रजिस्ट्रेशन फीस 1 प्रतिशत है। स्टांप ड्यूटी न चुकाने पर पेनाल्टी : इंडियन स्टांप ड्यूटी एक्ट 1899 के सेक्शन 3 के मुताबिक स्टांप ड्यूटी एक बार चुकानी होती है। अगर ग्राहक इस फीस को नहीं चुकाते तो प्रति माह की बकाया राशि के दो प्रतिशत के जुर्माने के साथ उन्हें बकाया राशि का भुगतान करना होगा। यह जुर्माना मूल राशि के 200 प्रतिशत तक जा सकता है।

महिलाओं को स्टांप ड्यूटी में छूट : Stamp duty exemption for women

इस प्रक्रिया में अगर प्रॉपर्टी का मालिक महिलाओं को बनाया जाता है तो स्टांप ड्यूटी के चार्ज कम हो जाते हैं। कई राज्यों में ऐसा होता है कि अगर प्रॉपर्टी के कागजात महिला के नाम पर हैं तो फीस दो प्रतिशत तक कम हो जाती है। अगर बात राजधानी दिल्ली की करें तो यहां महिला ग्राहकों के लिए स्टांप ड्यूटी चार्ज चार प्रतिशत है। लेकिन अगर प्रॉपर्टी पुरुष के नाम पर लेनी है तो 6 प्रतिशत चार्ज चुकाना होगा।

अपार्टमेंट खरीदने की स्टांप ड्यूटी : Stamp Duty to Buy Apartment

अगर आपने कोई अपार्टमेंट खरीदा है तो स्टांप ड्यूटी चार्ज इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका प्रॉपर्टी में निजी शेयर कितना है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई प्रोजेक्ट 50 हजार स्क्वेयर फुट जमीन पर बना है और उसी साइज के अपार्टमेंट 10 लोगों को बेचे गए हैं तो हर एक को 5000 स्क्वेयर फुट के लिए स्टांप ड्यूटी देनी होगी।

कानूनन सबूत : Stamp duty papers become legal evidence

अगर आप किसी विवाद में फंसते हैं तो स्टांप ड्यूटी के कागजात कानूनी सबूत बन जाते हैं कि आप ही प्रॉपर्टी के मालिक हैं। आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के कागजात कानूनी सबूत नहीं माने जाते। यह भी एक कारण है कि कई ग्राहक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का काम ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। अगर आपने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और आप भविष्य में प्रॉपर्टी बेचने पर विचार करते हैं, तो इसमें मुश्किलें आ सकती हैं।

राज्य का विषय :

यूं तो इंडियन स्टांप ड्यूटी एक्ट 1899 एक केंद्रीय कानून है, लेकिन स्टांप ड्यूटी की फीस राज्यों के खातों में जाती है, जोकि उनके राजस्व के लिए बेहद अहम है। इतना ही नहीं, राज्यों के पास यह संविधानिक अधिकार है कि वह इस कानून में कोई भी बदलाव कर अपने नियम इसमें जोड़ सकते हैं। स्टांप ड्यूटी फीस हर राज्य में अलग-अलग है। इतना ही नहीं, यह हर इलाके में भी अलग हो सकती है। महाराष्ट्र में बॉम्बे स्टांप एक्ट 1958 है, जिसके तहत स्टांप ड्यूटी और राज्य में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन होती है। वहीं गुजरात, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और तमिलनाडु में भी अपने स्टांप ड्यूटी कानून हैं।

बहुत ज्यादा रेट्स? :

भारत में ग्राहक प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का काम इसलिए नहीं कराते, क्योंकि स्टांप ड्यूटी के रेट्स काफी ज्यादा हैं। यह सरकार के राजस्व को बुरी तरह नुकसान पहुंचाता है। साथ ही यह एक कारण भी है कि प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड बुरी स्थिति में क्यों हैं। अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत में स्टांप ड्यूटी फीस काफी ज्यादा है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिलीपींस और वियतनाम में स्टांप ड्यूटी चार्जेज एक से दो प्रतिशत के बीच हैं।

ऑनलाइन स्टांप ड्यूटी का भुगतान : Online stamp duty payment

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी के भुगतान को आसान करने के लिए महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इंटरनेट के जरिए भी इसके भुगतान की सुविधा की है। हालिया वर्षों में कई राज्यों ने अपनी दरें कम की हैं, ताकि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा मिल सके।

कम आय वालों के लिए होम लोन की योग्यता : पहले स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज में बैंकों का कोई किरदार नहीं था। इस वजह से घर खरीदने वालों को इसे चुकाने के लिए अपनी ही बचत का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन साल 2015 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों को निर्देश दिए कि वह 10 लाख रुपये तक की कीमत वाली प्रॉपर्टी में ग्राहक की लोन योग्यता की गणना करते हुए स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस को शामिल करे। इसका मकसद कम आय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को घर खरीदने के लिए बढ़ावा देना था। अब बैंक स्टांप ड्यूटी और डॉक्युमेंट्स से जुड़े अन्य चार्ज ग्राहक की लोन टू वैल्यू रेश्यो (एलटीवी) की गणना करते हुए घर की कुल कीमत में शामिल कर लेते हैं। एलटीवी प्रॉपर्टी की कीमत और लोन की राशि का अनुपात होती है।

होम लोन एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी :  Stamp duty on home loan agreement

अगर आपने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए होम लोन लिया है तो भी आपको स्टांप ड्यूटी चुकानी होगी। आपको बैंक के पास अपने प्रॉपर्टी के कागजात जमा कराने के अलावा एक अंडरटेकिंग भी देनी होगी, जिसमें लिखा होगा कि लोन लेने के लिए आप अपनी मर्जी से कागजात जमा करा रहे हैं। यह अंडरटेकिंग रजिस्टर्ड है और होम लोन की राशि का 0.1-0.2 प्रतिशत इस पर स्टांप ड्यूटी के रूप में लगाया जाता है।

स्रोत – देशबन्धु

पाठकों सेअपील - “हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें
 

Leave a Reply