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डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

वो बकवास करते हैं काम नहीं करते… वो रोज कहते हैं देश बदल रहा है ..

वो बकवास करते हैं काम नहीं करते… वो रोज कहते हैं देश बदल रहा है ..

वो बकवास करते हैं काम नहीं करते…

और करने भी नहीं देते…

भाषण देते हैं चिल्ला-चिल्ला कर चीख़ते हैं…

व्यवस्था… व्यवस्था…

अब देश में है ही क्या मनोरंजन इससे सस्ता…

कहीं भी मजमा जोड़ लो ..

करो इतिहास पुराण की दो बातें

जनभावनाएं मोड़ लो…

इनके भाषणों में इक शोर होता है..

देवताओं में ख़ासकर राम पर ही ज़ोर होता है..

बेवकूफ जनता ताली बजाती है…

सुधी जनों की इक टोली कुड़कड़ाती है…

बात-बात का ढिंढोरा पीटना ..

अपनी ख़ामियों को इस तरह से लीपना…

इन्हें अच्छे से आता है…

पाकिस्तान इनकी सबसे बड़ी गाय है ..

जिसके नाम सब तियां पाँचा ..

सब आये बाँये है…

झूठ के आँकड़े दिखाकर ख़ुद अपने मुँह अपनी गाथा गाकर भरमा रहे हैं …

वो रोज कहते हैं देश बदल रहा है ..

गरीब हिन्दुस्तानी बेचारा इसी आश्वासन पर चल रहा है…

जो पोल खोले… सच बोले ..

वहीं सरकारी आँख में अखरा…

फिर बना उसी को बलि का बकरा ..

सब चोर मिलकर अपनी अपनी बलाएं टालते हैं

ये स्याले कुर्सी वाले इसी तरह से अपनी-अपनी कुर्सियाँ पालते हैं…

डॉ. कविता अरोरा

 

They do rubbish don’t work

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