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आदिवासियों ने मोदी-शाह-नड्डा-भागवत और बाबूलाल मरांडी का पुतला फूंका

आदिवासियों ने नरेंद्र मोदी,अमित शाह, जेपी नड्डा, मोहन भागवत और बाबूलाल मरांडी का पुतला फूंका

Tribals burnt effigies of Narendra Modi, Amit Shah, JP Nadda, Mohan Bhagwat and Babulal Marandi

रांची से विशद कुमार

14 मार्च 2021. झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत जैनामोड़ के खुटरी पोलीटेक्निक चौक पर आदिवासी सेंगेल अभियान(ASA) के तत्वावधान में अभियान के जिला सुखदेव मुर्मू के नेतृत्व में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और बाबूलाल मरांडी का पुतला दहन किया गया।

बता दें कि पिछले दिनों आरएसएस का घटक संगठन सुरक्षा जनजाति मंच से बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि “जनजाति आदिवासी समाज जन्म से ही हिंदू है और जो नहीं मनाते हैं इसका जनजातीय लाभ न मिले।”

इसके बाद से ही झारखंड के आदिवासी समाज के बीच भाजपा व आरएसएस के प्रति लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। खासकर पूर्व मुख्यमन्त्री बाबूलाल मरांडी आदिवासी समाज के निशाने पर हैं।

आदिवासी समाज बाबूलाल के बयान को  अति निंदनीय बता रहा है, आदिवासी विरोधी, सरना धर्म विरोधी बता रहा है।

एक विज्ञप्ति के अनुसार पुतला दहन कार्यक्रम में कहा गया कि बाबूलाल के बयान अति निंदनीय बता है, आदिवासी विरोधी है, सरना धर्म विरोधी है।

इसका हम लोग विरोध करते हैं। BJP/RSS ने बाबूलाल मरांडी के कंधे में बंदूक रखकर भारत के आदिवासियों को गुलाम बनाने की षड्यंत्र को जाहिर कर दिया है। बाबूलाल मरांडी के पीछे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा का हाथ है।

भारत के आदिवासियों को जबरन हिंदू बनाने के षड़यंत्र के खिलाफ पुतला दहन किया गया।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि आदिवासियों को हिंदू कहना या हिंदूकरण करना हमारी मूल पहचान खत्म कर मानसिक रूप से हमें गुलाम बनाने के लिए भाजपा नेता, बीजेपी, आरएसएस वालों ने आदिवासियों की प्रकृति पूजक सरना धर्म और हजारों सालों से आदिवासी समाज जो अपनी स्वतंत्र सांस्कृतिक सामाजिक सभ्यता आदिवासी पहचान सजाए हुए हैं, उसको खत्म करने के लिए आदिवासियों को जबरन हिंदू कहा जा रहा है। हमलोग इसका विरोध करते हैं। जबरन हिंदू बनाना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हमारी धार्मिक आजादी पर हमला है।

कहा गया है कि भारत में 2021 का वर्ष जनगणना का है। हम भारत के अधिकांश आदिवासी अब तक प्रकृति पूजक हैं। अतः सरना धर्म या अन्य विभिन्न नामों से अपनी धार्मिक, अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी, और एकता को बचाए रखने के लिए कटिबद्ध हैं। अपनी धार्मिक पहचान के साथ जनगणना में होना हमारा अधिकार है। मगर बेजेपी/आरएसएस हमारे मौलिक अधिकार (फंडामेंटल राइट्स), मानवीय अधिकार (ह्वयूमन राइट्स) और आदिवासी अधिकार ( इंडिजेन्स पीपल रायट्स-यून) को दरकिनार कर जबरन हमें हिन्दू बनाने पर उतारू है। जबकि झारखंड सरकार और बंगाल सरकार ने आदिवासियों की धार्मिक मांग-सरना धर्म कोड का अनुशंसा कर दिया है। परन्तु भाजपा और आरएसएस ने अब तक इस मामले पर‌ चुप्पी साधकर आदिवासी विरोधी, सरना धर्म विरोधी होने का प्रमाण प्रस्तुत कर दिया है, जो भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। लगता है BJP/RSS बाकि बचे दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़ों को जबरन अपना गुलाम बनाकर छोड़ेगी।

इस मौके पर जिला संयोजक सुगदा किस्कू, भीम मुर्मू, कनारी पंचायत सेंगेल परगना राखो किस्कू, खुटरी पंचायत सेंगेल परगना लालचंद मुर्मू, फुलेश्वर मुर्मू, पीताम्बर सोरेन, सुखराम मुर्मू, दिनेश हेम्बरम, जितेंद्र मार्डी, धर्मेंद्र मार्डी,राजेश मार्डी,परवीन मुर्मू, विरेन्द्र मार्डी,पुष्पा सोरेन,साधेर मुर्मू, व्यासमुनी बास्के, हीरा मुनी हेम्बरम, मायनो सोरेन, अंजली, सीमोती, संगीता मुर्मू, सुकमती मुर्मू, गुड़िया हेम्बरम, विराज , सुनिता, सुष्मा, सरोधनी, पानमती आदि महिला व पुरुष मौजूद थे।

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

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