Home » Latest » शेष जी अद्वितीय थे, उन जैसा न कोई हुआ न होगा
शेष नारायण सिंह शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह हस्तक्षेप के संरक्षक हैं। वह इतिहास के वैज्ञानिक विश्लेषण के एक्सपर्ट हैं। नये पत्रकार उन्हें पढ़ते हुये बहुत कुछ सीख सकते हैं।

शेष जी अद्वितीय थे, उन जैसा न कोई हुआ न होगा

कल रात इत्मीनान से सोया। noida पुलिस कमिश्नर आलोक जी ने जानकारी दी कि Shesh भैया के लिए प्लाज़्मा की अतिरिक्त व्यवस्था भी लोकल स्तर पर कर ली गई है, ज़रूरत पड़ने पर इस्तेमाल होगा।

मन को संतोष हुआ। अब ठीक होकर लौटेंगे शेष भैया।

सुबह आँख खुली तो आलोक जी के मैसेज से ही पता चला शेष सर नहीं रहे।

उन्होंने जानकारी दी कि बिटिया टिनी भी पॉज़िटिव हैं। उन्हें उचित इलाज दिलाया जा रहा है। शेष जी का अंतिम संस्कार यहीं noida में किया जाएगा।

भड़ास जब शुरू किया था तो जिन कुछ वरिष्ठ पत्रकारों ने इस प्रयोग को जमकर सराहा और इस मंच के ज़रिए अपनी बात रखी, उनमें शेष जी भी थे। वे भड़ास पर रेगुलर लिखते थे। प्रोत्साहित करने और गाइड करने का काम भी लगातार करते रहते।

उन अकेलेपन और घनघोर संघर्ष के दिनों में शेष जी बड़े भाई और संरक्षक की तरह मुट्ठी बांध कर मेरे साथ खड़े रहते। पत्नी और बच्चों की भी चिंता करते क्योंकि उन्हें मेरी फ़ितरत पता थी। किसी की परवाह न करना। खुद में मगन रहना। वे मुझे घर परिवार का ध्यान रखने, परिजनों के प्रति संवेदनशील रहने के लिए प्रेरित करते। उन्हें दिल से बड़ा भाई मान लिया था।

उनका video इंटर्व्यू बाक़ी था। सब तय था। मैं ग्रेटर noida के उनके घर एक दिन जाऊँगा। भोजन साथ करेंगे। video इंटर्व्यू किया जाएगा।

फ़ेसबुक पर वो दुखी थे। परिचितों पत्रकारों की लगातार मौतों को देख कर। सेहत के प्रति बेहद संजीदा थे। शराब को छुआ तक न था। जिम में अच्छा ख़ासा वक्त देने लगे थे। आख़िर तक उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही दिल्ली से ग्रेटर noida अपने घर जाते देखा।

शेष जी अद्वितीय थे।

उन जैसा न कोई हुआ न होगा।

जीवन से उन्हें बेहद प्यार अनुराग था। मनुष्यता के वे प्रहरी थे।

मेरे जीवन के निर्माताओं में से एक हैं।

अपने संघर्षों और मुश्किल दिनों की कहानियों को सुना सुना कर वो मुझे अनजाने में संबल देते थे, हार न मानने की प्रेरणा देते थे।

ऐसे सच्चे बड़े भाई, मेंटॉर और दोस्त को अलविदा कहूँ तो कैसे कहूँ!

वे बस शरीर से गए होंगे। उनके व्यक्तित्व का एक एक हिस्सा हम सब में समाया हुआ है!

यशवंत सिंह

लेखक भड़ास4मीडिया के संपादक हैं।

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