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Shailendra Dubey, Chairman - All India Power Engineers Federation

बजट 2020 : मोदी सरकार ने बेरहमी से यूपी की गर्दन पर छुरी फेर दी, अंधेरे में डूब जाएगा प्रदेश

UP Thermal Power Stations to be closed down as per Budget

बजट में वित्त मन्त्री की घोषणा (Announcement of Finance Minister in the budget) के अनुसार उत्तर प्रदेश के 2000 मेगावॉट के बिजलीघर बन्द होंगे

लखनऊ, 01 फरवरी 2020. ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन (All India Power Engineers Federation) ने आज यहाँ जारी बयान में कहा है कि यदि बजट में वित्त मन्त्री द्वारा की गई घोषणा को लागू किया गया तो उत्तर प्रदेश के लगभग 2000 मेगावॉट क्षमता के बिजलीघर बन्द हो जाएंगे। यदि यह हुआ तो उत्तर प्रदेश बहुत गंभीर बिजली संकट में फंस जायेगा।

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की है जिससे प्रदेश को अभूतपूर्व बिजली संकट से बचाया जा सके।

आल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि वित्त मंत्री ने बजट में घोषणा की है कि जो ताप बिजलीघर पर्यावरण मानकों से अधिक फ्लू गैस का उत्सर्जन कर रहे हैं (Thermal power plants emitting flue gas exceeding environmental standards) उन्हें बंद कर दिया जाए और इन ताप बिजली घरों की जमीन अन्य उपयोग के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि यदि इस घोषणा पर अमल हुआ तो उत्तर प्रदेश के अनपारा ए बिजली घर की 210-210-210  मेगावाट की तीनों इकाइयां और अनपारा बी की 500-500 मेगावाट की दोनों इकाइयां बंद हो जाएंगी, जो प्रदेश में सबसे सस्ती बिजली दे रही हैं। इसके अतिरिक्त ओबरा की 200-200 मेगावाट की पांच इकाइयां, पारीछा की 110 -110 मेगावाट की दो इकाइयां और हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक इकाई पूरी तरह बंद करनी होगी।

उन्होंने बताया कि पिछले बजट में कहा गया था कि इन बिजली घरों में प्रदूषण रोकने हेतु फ्यूल गैस डिसलफराइजड सिस्टमFuel Gas Disulfurized System (एफ जी डी एस ) और सेलेक्टिव कैटालिटिक रिड्यूसर- Selective catalytic reducer (एस सी आर ) लगाए जाएँ जिसकी योजना भी बन रही थी, किन्तु अब इन्हें बंद करने को कहा गया है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति की है कि इन बिजली घरों की जमीन के अन्य इस्तेमाल की बात कही गई है, जो नियम विरुद्ध है क्योंकि जब जमीन का अधिग्रहण किया गया था तब यह अधिग्रहण बिजली उत्पादन के लिए किया गया था, अब इसे बदलना नियम विरुद्ध है।

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