सरकार वैक्सीन के साथ लोकतंत्र का टीका भी लाए, पुराना साल बीते, नया साल आए

दुआ है कि दर्द के लिए मरहम बनके ये साल आए सरकार वैक्सीन के साथ लोकतंत्र का टीका भी लाए अल्लाह करे यह नया साल हर किसी को रास आए।

The government should also bring vaccine for democracy with the vaccine, an old year passed, new year come

दुआ है कि दर्द के लिए मरहम बनके ये साल आए/ सरकार वैक्सीन के साथ लोकतंत्र का टीका भी लाए

पुराना साल बीते, नया साल आए

कोई लोहरी, कोई पोंगल कोई खिचड़ी मनाए

रस्में हैं जो अपने खि़त्तों की, रिवाज़ है जो अपनी बस्ती के

जलीकट्टू, बिहू, ओणम तिलवा सब मनाएं।

दुआ है ये, “दुख का कोई लम्हा ना किसी के पास आए

अल्लाह करे ये नया साल हर किसी को रास आए,

चकरी सी दुनिया, पतंग सी जिंदगी, में सर्द हवाएं

अब और ना उलझे, ना किसी मंझे से कट जाए

ख्वाबों से ऊंची, आसमानों में उड़ती चली जाए

अल्लाह करे ये नया साल हर किसी को रास आए।

बीते साल बहुत दुश्वारी थी, बेबस थे अच्छे-अच्छे,बहुत लाचारी थी

इंसान की दुनियांवी तरक्की, इक नन्हें वायरस से हारी थी

किसी तरह कट जाए बुरा वक्त, यह सोचकर पूरी दुनिया हारी थी

दुआ है यह कि मुफ़लिसी का कोई लम्हा न किसी के पास आए

अल्लाह करे यह नया साल हर किसी को रास आए

अब की तबीयत सभी की बहाल रहे

हर किसी को अपनों का ख्याल रहे

यही तरबियत हम सभी की हो, हर किसी को ये ख़्याल आए

दुआ है कि दर्द के लिए मरहम बनके ये साल आए

सरकार वैक्सीन के साथ लोकतंत्र का टीका भी लाए

अल्लाह करे यह नया साल हर किसी को रास आए।

सारा मलिक

Sara Malik, सारा मलिक, लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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