विटामिन डी की कमी का कोविड-19 से मौत का क्या है सम्बंध ?

विटामिन डी की कमी से बढ़ती है कोविड-19 से मौत !

Vitamin D deficiency and increasing death from Covid 19 !

अमेरिका के नॉर्थ वेस्ट यूनिवर्सिटी (North West University of America) के वैज्ञानिक वादिम बैकमैन की अगुवाई में किये गए एक विस्तृत अध्ययन से कोविड-19 की जटिलता और विटामिन डी की शरीर में कमी का सम्बन्ध (Covid-19 complication and the relationship of vitamin D in the body) उजागर हुआ है. इस अध्ययन के बाद संभव है कोविड-19 से ग्रस्त व्यक्तियों के मौत का आंकड़ा कुछ कम किया जा सके. बैकमैन के अनुसार शुरू से ही उन्हें विभिन्न देशों में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर के आंकड़ों में अंतर (Difference in mortality rate due to Covid-19) चौंकाते थे. पहले अनुमान था कि इसका कारण देशों की स्वास्थ्य सेवाओं में अंतर या फिर जनसँख्या की विविधता और आयु वर्ग हो सकता है, पर किसी भी विश्लेषण से इस अंतर को समझा नहीं जा सकता.

विभिन्न देशों के एक ही आयु वर्ग में भी मृत्यु दर में बहुत अंतर था, इसी तरह एक जैसे स्वास्थ्य सेवाओं वाले देशों में भी बहुत अंतर देखा गया.

वादिम बैकमैन के दल ने फिर अन्य कारणों को खोजना शुरू किया. इस दल को यह पता था कि बहुत अधिक सक्रिय प्रतिरोधक क्षमता से कोविड-19 के मरीजों की जटिलता बढ़ जाती है, और ऐसे मरीजों के मौत की संभावना भी अधिक रहती है.

अधिकतर मौत के मामलों में वादिम बैकमैन के अनुसार वायरस से अधिक और दूसरे कारक अधिक महत्वपूर्ण हैं जो अति-सक्रिय रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण पनपते हैं. इसलिए उनका ध्यान विटामिन डी की तरफ गया क्योंकि दुनिया में बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां के निवासियों में विटामिन डी की कमी रहती है.

Vitamin D increases immunity

विटामिन डी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता तो है, पर साथ ही उन्हें अति-सक्रिय होने से रोकता भी है. इस दल ने फिर चीन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, ईरान, साउथ कोरिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के कोविड-19 के मरीजों का विस्तृत विश्लेषण किया और इनकी मेडिकल हिस्ट्री से इनमें विटामिन डी की कमी का आकलन किया.

  इस अध्ययन से इतना स्पष्ट है कि जिन मरीजों में विटामिन डी की कमी थी, उनमें संक्रमण के बाद जटिलता अधिक थी, और ऐसे मरीजों की मृत्यु दर भी जिनमें विटामिन डी की कमी नहीं थी, उनकी तुलना में दुगुनी से अधिक थी.

इस दल के अनुसार बच्चों में कोविड-19 के कम प्रकोप होने और इनकी मृत्यु दर कम होने का कारण भी प्रतिरोधक क्षमता है. बच्चों में यह पूरी तरह से नहीं पनपता है, इसलिए अत्यधिक सक्रिय नहीं होता.

वादिम बैकमैन के अनुसार अभी इस दिशा में और अध्ययन की आवश्यकता है, पर यदि विटामिन डी का सिद्धांत सही है तो फिर इससे अफ्रीकन अमेरिकन आबादी, इटली, स्पेन और इंग्लैंड के नागरिकों और बुजुर्गों की जान बचाने में मदद मिलेगी. इन सभी आबादी में सामान्यतया विटामिन डी की कमी रहती है और कोविड-19 से मृत्यु दर अधिक है. मरीजों में विटामिन डी के सप्लीमेंट देना आसान है, पर वादिम बैकमैन सावधान करते हैं कि यह अध्ययन अभी चल रहा है, इसलिए लोग विटामिन डी का अंधाधुंध सेवन नहीं करें और हरेक कदम पर अपने डॉक्टर की सलाह जरूर मानें.

दूसरी तरफ कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल के नवीनतम अंक में प्रकाशित एक शोधपत्र के अनुसार कोरोनावायरस के विस्तार पर तापक्रम, नमी और भौगोलिक परिस्थितियों का कोई असर नहीं होता है.
महेंद्र पाण्डेय Mahendra pandey
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो के वैज्ञानिक डॉ पीटर जुनी की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक दल ने यह अध्ययन किया है. इसमें दुनिया के 144 भौगोलिक क्षेत्रों में कोविड-19 के 375600 मरीजों की विस्तृत जानकारी का विश्लेषण किया गया. विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में तापमान, नमी और भौगोलिक संरचना का भी अध्ययन किया गया. इसके अनुसार इन सबका कोविड-19 पर कोई भी असर नहीं पड़ता, पर स्चूलों को बंद करने, शारीरिक दूरी का पालन और बड़ी सभाओं पर प्रतिबन्ध इसपर जरूर असर डालते हैं.

इतना तो तय है कि कोविड-19 एक नया रोग है, जिसके बारे में विज्ञान को अधिक पता नहीं है, इसलिए इसपर लगातार नई जानकारियाँ आती रहेंगीं. जितनी वैज्ञानिक जानकारियाँ सामने आयेंगी, उतनी ही भ्रांतियां ख़त्म होंगी. हमारे देश में अक्सर लोग यह मानते हैं कि हमारे देश की गर्म जलवायु में यस वायरस सक्रिय नहीं होगा, पर इस भ्रान्ति का अंत अब वैज्ञानिकों ने कर दिया है.

महेंद्र पाण्डेय

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