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आरएसएस-भाजपा की सरकार में लोकतंत्र को कमजोर करने, काले कानूनों का दुरूपयोग का काम तेजी से बढ़ा

आरएसएस-भाजपा की सरकार में लोकतंत्र को कमजोर करने, काले कानूनों का दुरूपयोग का काम तेजी से बढ़ा

लखनऊ, 01 जुलाई 2020. आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (रेडिकल) के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एस. आर. दारापुरी ने कहा है कि जब से आरएसएस-भाजपा की हिन्दुत्ववादी सरकार आई है तबसे लोकतंत्र को कमजोर करने, अल्पसंख्यक, दलित एवं आदिवासियों समेत नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमले तथा उनका दमन, राजनीति एवं प्रशासन का साम्प्रदायीकरण एवं संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने, काले कानूनों का दुरूपयोग का काम तेजी से बढ़ा है।

श्री दारापुरी ने एक अपील जारी करते हुए लोगों से आईपीएफ से जुड़ने की अपील की है।

अपील का मजमून निम्न है –

जैसा कि आप अवगत हैं कि हमारी पार्टी आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट पिछले कई वर्षों से एक वैकल्पिक जन राजनीति की स्थापना के लिए कार्यरत है. इसके अंतर्गत हम लोगों ने रोजगार, भूमि, शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन के अधिकार, रोजगार के लिए मनरेगा के अनुपालन व इसका शहरी क्षेत्र में विस्तार, ठेका मजदूरों के नियमितीकरण, सहकारी खेती, किसानों को उनकी उपज का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य, अवैध खनन पर रोक तथा पर्यावरण सुरक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, आदिवासियों व कमजोर तबकों के सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, गैरकानूनी भूमि अधिग्रहण, राजनीति का साम्प्रदायीकरण, कार्पोरेटस का राजनीति पर कब्जा तथा राज्य की तानाशही पर रोक, काले कानूनों का विरोध तथा राज्य की गलत नीतियों के विरोध में आवाज उठाने वाले बुद्धिजीवियों का दमन, राष्ट्रीय संपदा को निजी क्षेत्र को बेचा/सौंपा जाना आदि मुद्दों पर प्रभावी ढंग से आवाज उठाई है.

इन सवालों पर 2013 में लखनऊ और फरवरी 2014 में दिल्ली के जंतर मंतर पर हमारे संगठन द्वारा दस दिनों का उपवास किया गया. कुल मिलाकर जनता के सवालों को राजनीतिक प्रश्न बनाने में हम काफी हद तक सफल भी रहे है. हाल में आपने समाचार पत्रों में पढ़ा होगा कि पिछले महीने जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कई अन्य राज्यों की तरह श्रम कानूनों को खत्म करते हुए काम के घंटों को 8 से बढ़ा कर 12 घंटे कर दिया था तो हमसे जुड़े संगठन वर्कर्स फ्रंट ने इसके विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करके उसे रद्द करवाया.

इसी प्रकार जब उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के दौर में सरकारी तथा निजी अस्पतालों में कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारियों के इलाज हेतु ओपीडी, आईपीडी व पैथोलोजी तक पर रोक लगा दी तो हमने इसके विरुद्ध इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करके इन आदेशों को रद्द करवाया. इसके अलावा हम लोग 2008 से उत्तर प्रदेश में वनाधिकार कानून को सरकार द्वारा उचित ढंग से लागू न करने तथा आदिवासी/दलित और वनवासियों को भूमि आवंटित न करने के मामले में दो बार इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा एक बार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके इन वर्गों को वन भूमि आवंटन की लडाई लड़ते आ रहे हैं. जिसके बाद वनाधिकार की प्रक्रिया सरकार को प्रदेश में शुरू करने और बेदखली रोकने पर मजबूर होना पड़ा. साथ हमारे आंदोलन ने उत्तर प्रदेश में आदिवासियों को विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिलाने का काम किया और धांगर व चेरो के एससी के दर्जे को बहाल कराया. अभी भी आदिवासी-दलित बाहुल्य सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली में आदिवासियों-वनवासियों के अस्तित्व व अस्मिता का संघर्ष जारी है. इसी क्षेत्र से हमने लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में भी प्रभावी ढंग से भागीदारी की और मजदूरों, किसानों, दलितों, आदिवासियों और जनवादी ताकतों को गोलबंद किया.

आप सहमत होंगे कि देश में जब से आरएसएस-भाजपा की हिन्दुत्ववादी सरकार आई है तबसे लोकतंत्र को कमजोर करने, अल्पसंख्यक, दलित एवं आदिवासियों समेत नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमले तथा उनका दमन, राजनीति एवं प्रशासन का साम्प्रदायिकरण एवं संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने, काले कानूनों का दुरूपयोग, सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों पर फर्जी आपराधिक मामले दर्ज करके जेलों में डालना, राष्ट्रीय संपत्तियों व सरकारी उपक्रमों को निजी क्षेत्र को सौंपना, सरकारी नीतियों को जनहित की बजाए कार्पोरेटहित में बनाना तथा वर्तमान नीतियों में भी तदनुसार संशोधन करना जारी है. यहां तक कि कोरोना संकट की आपदा को भी अवसर बनाकर इन्हीं नीतियों को आगे बढाया, दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में रोज पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ा कर महामारी में तबाह जनता के संकटों को और भी बढा दिया.

हालत यह है कि किसानी, छोटे-मझोले उद्योग व ट्रांसपोर्ट को सीधे प्रभावित करने वाले डीजल के दाम देश के आजादी के बाद के इतिहास में पहली बार पेट्रोल से आगे निकल गए.

यही नहीं सरकार ने महामारी एक्ट आदि कानूनों को अधिक सख्त बनाकर उसका दुरूपयोग किया. राज्य अधिक से अधिक अधिनायकवादी बनता जा रहा है और नागरिकों के संवैधानिक एवं लोकतान्त्रिक अधिकारों जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन व्यापक स्तर पर हो रहा है.

सभी भलीभांति अवगत हैं कि सरकार की कार्पोरेटपरस्त एवं जनविरोधी नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था कोरोना संकट से पहले ही निरंतर गिरती जा रही थी.

देश में क्रोनी पूंजीवाद के माध्यम से फाइनेंस कैपिटल पूरी तरह से स्थापित हो रही है. कोरोना को रोकने के नाम पर गलत एवं असामयिक किए लाकडाउन के फलस्वरूप कोरोना को रोकने में तो कोई सफलता नहीं मिली बल्कि देश की अर्थव्यस्था पूरी तरह तबाह हो गयी. तालाबंदी में फसे लाखों मजदूर न केवल बेरोजगारी और भुखमरी का शिकार हुए बल्कि उनमें संक्रमण भी फैल गया और सरकार की उपेक्षा के कारण उन्हें घर वापसी के दौरान भारी कष्ट भी झेलना पड़ा.

इन स्थितियों में आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट वर्तमान राजनीति को जाति, धर्म और पूंजी की राजनीति के दायरे से निकाल कर इसे जनमुद्दों पर लाने का प्रयास कर रहा हैं हमें इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है. इस प्रयास में हम लोगों ने समान विचार वाली पार्टियों एवं संगठनों के साथ तालमेल भी बैठाया है.

वर्तमान में हम लोग स्वराज अभियान के साथ साझा मुद्दों पर काम भी कर रहे हैं. हमारा प्रयास है कि वैकल्पिक जन राजनीति की स्थापना के लिए अधिक से अधिक जनवादी शक्तियों एवं संगठनों को एक मंच पर लाया जाये और लोकतंत्र एवं आजीविका को बचाने के लिए संयुक्त प्रयास किए जाये. इसमें संगठन का नाम अथवा पद आदि की कोई अड़चन नहीं है. सभी लोग अपनी पहचान रखते हुए भी साझा एजेडे पर काम कर सकते हैं. अतः आपसे अनुरोध है कि आप लोग हमारे इस आमंत्रण पर विचार करें और एक मंच अथवा साझा मंच पर लामबंद होने की पहल करें.

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