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Shivkumar Sharma Kakkaji

कक्का जी का होशंगाबाद जिले में स्वागत है

समाजवादी जनपरिषद के गोपाल राठी, श्री गोपाल गांगूडा, हरगोविंद राय, लक्ष्मी सोनी, किशन बलदुआ व रोहित सोडानी की ओर से जारी विज्ञप्ति

Hoshangabad News in Hindi

केंद्र सरकार द्वारा पारित तीनों किसान कानूनों को लेकर पिछले छह महीनों से देश के विभिन्न प्रांतों के किसान आंदोलित है। नवम्बर में दिल्ली चलो का नारा देकर दिल्ली की ओर बड़े तो उन्हें दिल्ली की सीमा पर ही रोक लिया गया। फिर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच वार्ता का दौर शुरू हुआ। ग्यारह दौर चली यह वार्ता बेनतीजा रही।

श्री शिवकुमार कक्का जी सरकार से वार्ता कर रहे किसानों के दल के प्रमुख सदस्य रहे और हर वार्ता में मौजूद रहे।

कक्का जी होशंगाबाद जिले के बनखेड़ी विकास खण्ड के मछेरा गांव के मूल निवासी हैं। उनका किसानों के राष्ट्रीय नेतृत्व में महत्वपूर्ण स्थान है। सरकार से चर्चा कर रहे प्रतिनिधिमंडल में मध्य प्रदेश से वे अकेले प्रतिनिधि थे। हम होषंगाबाद जिले के निवासियों को इस बात का गर्व है।

गणतंत्र दिवस को हुए उपद्रव को लेकर सारी डिटेल सामने आ चुकी है। किसानों के एक वर्ग को उकसा कर लाल किले की ओर ले जाने और वहां तिरंगा के पास निशान साहेब का झंडा फहराने वाला दीप सिद्धू भाजपा से जुड़ा हुआ था। उसका किसी किसान संगठन से कोई वास्ता नहीं था।

प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, भाजपा सांसद हेमा मालिनी, सनी देओल पूर्व सांसद धर्मेंद्र के साथ दीप सिद्दू की फ़ोटो वायरल होने के बाद पूरा देश जान गया है कि किसानों के शन्तिपूर्ण आंदोलन को बदनाम करने की साज़िश उच्च स्तर पर रची गई थी।

गणतंत्र दिवस पर हुई अराजकता के लिए कुछ किसान नेताओं पर FIR दर्ज हुई है और कुछ को पूछ्ताछ के लिए बुलाया गया है। जिनमे शिवकुमार शर्मा कक्का जी का नाम नहीं है।

किसान आंदोलन में कक्काजी के राष्ट्रीय कद से आक्रांत कतिपय स्वयम्भू किसान नेता और सत्ता के दलाल विचलित हो गए हैं। उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। ये लोग किसान कानूनों के बारे में कुछ नहीं कहते उसकी अच्छाई भी नहीं समझाते। इन नकली नेताओं की कुटिलता और दोगलेपन को अब आम किसान भी समझ गया है।

अगर इन सत्ता के दलालों हिम्मत हो तो किसान कानून के समर्थन में ऐसा आंदोलन करके दिखाएं, जैसा किसान कानून के विरोध में चल रहा है।

पिपरिया के मंगलवारा चौराहे पर कक्का जी के खिलाफ बोर्ड लगाने वाले कायरों को अपना और अपने संगठन का नाम लिखने में भी डर लगता है। बिना नाम के लगा यह पोस्टर अत्यंत आपत्तिजनक है। प्रशासन ऐसे फर्जी पोस्टर को तुरंत उतरवाए और पोस्टर टांगने वालों पर सख्त कार्यवाही करे।

बिना प्रकाशक और प्रिंटर के नाम से लगाये गए इस तरह के पोस्टर का कोई जिम्मेदार नहीं। यह तो सरासर गलत है।

जिसे जो कुछ कहना है वह अपना और अपने संगठन का नाम ज़रूर जाहिर करे।

समाजवादी जन परिषद किसान कानूनों पर खुली बहस की चुनौती देता है। किसी मुद्दे पर खुला विचार विमर्श ही एक मात्र लोकतांत्रिक तरीका है। इस तरह के पोस्टर लगाना दूषित और कुंठित मानसिकता का परिचायक है।

समाजवादी जन परिषद द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कक्का जी जैसे किसानों के राष्ट्रीय नेता पर जिले के किसानों को गर्व है। दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन से निवृत होकर जब वे जिले में पधारेंगे तो उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। उनके साथ अन्य प्रांतों के किसान नेताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा।

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