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जानिए क्या होती हैं कॉस्मिक किरणें?

कॉस्मिक किरणें क्या होती है? | कॉस्मिक किरणें किसे कहते हैं? | What are cosmic rays?

कॉस्मिक रेज (cosmic rays in Hindi) या ब्रह्मांडीय किरणें सभी दिशाओं से लगभग प्रकाश के वेग से पृथ्वी पर आने वाले उच्च ऊर्जा आवेशित कणों के प्रवाह हैं, जिनमें अधिकांशत: (89 प्रतिशत) तो प्रोटॉन हैं, परंतु कुछ (10 प्रतिशत) अल्फा कण तथा आवर्त सारणी के भारी तत्वों के नाभिकीय कण (1 प्रतिशत) और इलेक्ट्रॉन, पॉजिस्ट्रॉन जैसे उप-परमाणुक कण भी शामिल होते हैं।

कॉस्मिक किरण की खोज किसने की? Cosmic Kiran kee khoj kisane kee?

कॉस्मिक किरणें जो आज अनुसंधान का एक लोकप्रिय विषय हैं, इनके विषय में लगभग 100 वर्ष पूर्व तक किसी को कुछ भी ज्ञान नहीं था और इनकी खोज की शुरुआत एक बहुत ही साधारण उपकरण (स्वर्ण पत्रा विद्युतदर्शी) द्वारा अनायास लिए गए एक साधारण प्रेक्षण से हुई, जब अंग्रेज वैज्ञानिक सी.टी.आर. विल्सन ने 1900 में यह देखा कि आवेशित इलेक्ट्रॉस्कोप कुछ देर रखा रहने पर निरावेशित हो जाता है।

यह मानते हुए कि ऐसा पृथ्वी में विद्यमान रेडियोएक्टिव तत्वों से उत्सर्जित कणों (particles emitted from radioactive elements present in the earth) द्वारा वायु के आयनीकरण के फलस्वरूप उत्पन्न विकिरणों के कारण होता होगा।

1912 में विक्टर हैस ने एक स्वतंत्र गुब्बारे में उड़ान भर कर एक अत्यंत यथार्थ इलेक्ट्रोमीटर द्वारा पता लगाया कि 5300 मीटर की ऊंचाई पर आयनीकरण दर पृथ्वी तल की अपेक्षा चार गुनी अधिक थी।

बार-बार प्रयोग कर हैस ने पाया कि आयनीकरणकारी विकिरणों का परिणाम ऊंचाई के साथ बढ़ता है और उन्होंने निष्कर्ष दिया कि,

”मेरे प्रेक्षणों की सर्वोत्तम व्याख्या यह मान लेने से होती है कि कुछ अत्यंत ऊर्जावान विकिरण हमारे वायुमंडल में पृथ्वी के बाहर किसी स्रोत से आ रहे हैं।”

कॉस्मिक किरणों का स्रोत क्या है?

बाद में लगभग पूर्ण सूर्यग्रहण के समय गुब्बारे में उड़कर उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि कॉस्मिक किरणों का स्रोत सूर्य नहीं है। धरा-बाह्य इन विकिरणों को कॉस्मिक किरण नाम 1920 में राबर्ट मिलियन ने दिया।

इन विकिरणों के महत्व के कारण इनकी खोज के लिए हैज को 1936 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।

बाह्य अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक किरणें मुख्यत: धनात्मक कणों से संचरित होती हैं और प्राथमिक कॉस्मिक किरणें कहलाती हैं। ये किरणें जब वायुमंडलीय अणुओं से टकराती हैं तो ये एक अन्य प्रकार की संरचना युक्त कॉस्मिक किरणों को जन्म देती हैं, जिन्हें द्वितीयक कॉस्मिक किरणें कहते हैं।

प्राथमिक कॉस्मिक किरण के एक प्रोटॉन का वायु के अणु से संघट्टों के परिणामस्वरूप द्वितीयक कॉस्मिक किरणों की संरचना में पाई-मीसोन, न्यू मारगेन, न्यूट्रॉन, पॉजीट्रॉन एवं इलेक्ट्रॉन जैसे कण शामिल हो जाते हैं। अब यह लगभग सुनिश्चित हो गया है कि अधिकांश कॉस्मिक किरणों के स्रोत सुपरनोवा यानि अधिनव तारे हैं और जो अधिनव तारा जितना अधिक नया है उससे आने वाले विकिरण भी उतने ही अधिक ऊर्जावान हैं। फिर भी कुछ कॉस्मिक किरणों के स्रोतों के विषय में अंतिम निर्णय के लिए शोध जारी है।

रामशरण दास

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