यह देशभक्त हिंदुत्ववादी सरकार की कैसी नीति और नीयत : किराना, सब्जी की बिक्री पर रोक, शराब की बिक्री चालू

Socialist Party of India

What kind of policy and intention of this patriotic Hindutva government: Prohibition on sale of grocery, vegetables, sale of liquor in lockdown

इंदौर, 06 मई 2020. लॉकडाउन में शराब की बिक्री (Liquor sales under lockdown) शुरू किये जाने के भाजपा सरकारों के फैसले का विरोध करते हुये सोशलिस्ट पार्टी इंडिया मध्य प्रदेश के अध्यक्ष रामस्वरूप मंत्री, महासचिव दिनेश कुशवाहा एवं लोहिया विचार मंच के अध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल ने कहा कि शराब की बिक्री से सरकार राहत पाने की उम्मीद कर रही है, भले ही उसके चाहे जितने दुष्प्रभाव हों।

श्री मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि एक के बाद एक लॉकडाउन का नतीजा सिफर लगता है। कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार लोगों की संख्या कम नहीं हो रही है, कई दर्जन मौतें हो चुकी हैं। संक्रमित लोगों की संख्या के सही आकड़ें भी नहीं मिल पा रहे हैं। राज्य में 20 से अधिक संक्रमित जिलों में वेंटीलेटर तक नहीं है।

Will India’s economy be five trillion dollars in the same way?

Modi in Gamchha

  उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में हर बात के लिए पंक्तिबद्ध रहना होगा। नोटबंदी से शराब की प्राप्ति तक लाइन में खड़े रहना भारतीयों की नीयत हो गई है। क्या इसी तरह भारत की अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर होगी।

नेताओं  ने कहा कि 25 मार्च से घरों में कैद अल्पवेतन भोगियों, रोज कमाने खाने वालों, नौजवानों और किसानों को भविष्य की दुश्वारियां सोचकर ही पसीना छूट रहा है। सरकारी खजाने की हालत बिगड़ी हुई बताई जाती है। शराब की बिक्री से सरकार राहत पाने की उम्मीद कर रही है। भले ही उसके चाहे जितने दुष्प्रभाव हों। सत्तारूढ़ दल को इस संकट में भी उपचुनावों की चिंता सता रही है, इसीलिए उसने विपक्ष का सहयोग लेने का कोई सही प्रयास नहीं किया है। भाजपा सरकार अपनी नकारात्मक सोच छोड़ नहीं पा रही है।

उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में अभी भी मध्य प्रदेश के हजारों लोग फंसे हैं। अन्य प्रांतों में फंसे प्रदेश के श्रमिकों का सही आंकड़ा भी नहीं है। अब दूसरे राज्यों की सरकारों द्वारा मध्य प्रदेश वालों की उपेक्षा किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। महाराष्ट्र से पैदल चलकर अपने घर तक का लम्बा सफर तय करने वाले युवकों के लिए  प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किया। न तो बाहर से आए श्रमिकों की सही ढंग से जांच हो रही है, न उनके रहने-खाने का कोई इंतजाम है।

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