Advertisment

गांधी ने कांग्रेस कब छोड़ा था ? महावीर त्यागी, कमलापति त्रिपाठी की जगह आनंद शर्मा, गुलामनबी और राजीव शुक्ला पैदा होने लगे

author-image
hastakshep
07 Apr 2021
New Update
कांग्रेस ने लगातार चौथी बार जीती बरोदा सीट, नहीं चला भाजपा के विकास का लॉलीपॉप

Advertisment

महिलाओं से प्यार करने के पीछे कई वजूहात हैं, जिसमें से एक है उनकी कुदरती रचनाधर्मिता।

Advertisment

दो दिन पहले हमारी एक महिला मित्र से सियासत पर बात हुई। इनसे रु-ब-रु कभी नहीं मिल पाया हूँ लेकिन फेसबुक पर बड़ी बेबाकी से बात होती है - (इन बॉक्स एक खत मिला )

Advertisment

'जनतंत्र के समर्थक हो, समाजवाद, समता, सौहार्द्र, वगैरह सब जनतंत्र के ही हिस्से हैं, इनके चलते तुम जो लिखते हो लोगों को पसंद आता है (और भी बहुत तारीफें हुई हैं, उसे यहां नहीं दे रहा हूँ) लेकिन प्यारे ! यह निर्गुण है, इसे सगुण करो। तुमसे इस लिए खुल कर बोल रही हूं कि तुम’कांग्रेसी’ नहीं हो, तुम निखालिस ’कांग्रेस’ हो।

Advertisment

आजादी के पहले कांग्रेस थी, जो आजादी के बाद कांग्रेसी हो गईं।

Advertisment

इंसानी सभ्यता में एक शब्द है ख्वाहिश। ख्वाहिश हीन या उससे विरक्त होना, कर्म करते रहना कांग्रेस की पहचान थी, कालांतर जब सत्ता हाथ लगी तो ख्वाहिश ने अपना रंग बदला और कांग्रेस काँग्रेसी हो गया। पंडित नेहरू ने ठीक समय पर कांग्रेस के इस परिवर्तन को पकड़ लिया।

Advertisment

एक निश्चित समय यानी जंगे आजादी के समय यह काँग्रेस पंडित नेहरू के विचारों की वाहक थी, वही आजादी मिलते ही फिसलने लगी चुनांचे नेहरू ने सत्ता तंत्र को अपने विचारों का वाहक बनाना शुरू किया जिस पर पंडित नेहरू के निहायत अजीज 'राममनोहर’( डॉ राममनोहर लोहिया ) ने खुले आम नेहरू पर आरोप लगाया कि नेहरू कार्यकर्ताओं की अवहेलना कर रहे हैं। जवाब में पंडित नेहरू ने इस बात का खंडन नहीं किया बल्कि कारण और तर्क दिए कि किस तरह ये कार्य कर्ता भ्रष्ट हो रहे हैं। जिनमें चापलूसी, लालच और कई तरह के व्यसन उनमे आ चुके हैं।

Advertisment

मैं इसलिए ये सब तुम्हें लिख रही हूं कि स्थिति समझ लो। आज कांग्रेस सिकुड़ कर दो या ज्यादा से ज्यादा चार ’नामों’ तक जाकर रुक गयी है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सलमान खुर्शीद और चौथा ? बाकी कहाँ हैं ? कोई राशिफल बता रहा है कोई हाई ब्रीड के बीज की खूबी लिख रहा है। राजनीति पर आते समय राहुल या प्रियंका की आरती उतारेगा और गणेसी परिक्रमा पूरी कर चाटुकारिता पर जाकर जोर की सांस लेगा। इसे न कांग्रेस की जानकारी है, न रवायत की पहचान। गलती इसकी नहीं है गलती है कांग्रेस की। उसने आजादी के बाद 'कांग्रेस’ का साँचा तोड़ कर उसे 'कांग्रेसी’ खांचे में ढालने लगी, नतीजा रहा पंडित महावीर त्यागी, पंडित कमलापति त्रिपाठी की जगह आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद और राजीव शुक्ला पैदा होने लगे।

चलो इस सवाल को छोड़ो, यह सत्ता का स्थायी भाव होता है। नए सिरे से कांग्रेस पैदा करो। मदरसा खोलो। उसे इतिहास, समाज, अर्थ, तंत्र सलीका बताओ। नई पौध तैयार करो। उसे बताओ कि सरकार और संगठन दो अलहदा ढांचा होता है। इस फर्क को समझाओ।

शुरू करो गांधी से।

प्रश्नावली तैयार करो, उसका जवाब मांगो। शिविर लगाओ। तुम जवाब मत देना।

एक सवाल के साथ खत बन्द कर रही हूं। बस। उम्हारी, तुम्हारी नहीं लिख रही हूं, तुमसे बड़ी हूं। एक सवाल नीचे है

गांधी ने कांग्रेस कब छोड़ा था ? '

चंचल

(वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार और गांधीवादी चिंतक चंचल जी की फेसबुक टिप्पणी साभार)

Advertisment
सदस्यता लें