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वो कौन सी किताबें जो जस्टिस काटजू को मुसीबत में डाल सकती हैं

वो कौन सी किताबें जो जस्टिस काटजू को मुसीबत में डाल सकती हैं

किताबें जो मुझे मुसीबत में डाल सकती हैं

कुछ समय पहले बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज ने कथित तौर पर भीमा कोरेगांव मामले में एक आरोपी वर्नोन गोंसाल्वेस से पूछा (जो इस घटना के 5 साल बाद भी भारत में चल रहा है) उनके घर में एक पुस्तक ‘वॉर एंड पीस इन जंगलमहल‘ (विश्वजीत रॉय द्वारा संपादित भारत में एक क्रांतिकारी संगठन पर निबंधों का संग्रह) व एक सीडी राज्य दमन द्रोही‘, जो राज्य दमन के खिलाफ एक फिल्म है, की एक प्रति क्यों थी।

यह तथ्य कि न्यायाधीश और पुलिसकर्मी हमारी पढ़ने की आदतों में इतनी अधिक गहरी रुचि ले रहे हैं, यह दर्शाता है कि जो लोग मेरी तरह किताबें पढ़ते हैं, उनको किसी एक दिन मुसीबत में पड़ने की संभावना है।

मैं समझता हूँ कि मैं इन किताबों की वजह से मुसीबत में पड़ सकता हूँ जो मेरे घर में हैं :

डिकेंस की टेल ऑफ टू सिटीस‘ (Tale of Two Cities) जो 1789 की फ्रांसीसी क्रांति की पृष्ठभूमि में सेट है, और हेमिंग्वे की फॉर हूम द बेल टोल्स ( Hemingway’s For Whom The Bell Tolls), स्पेनिश गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है (स्पष्टतः रिपब्लिकन के लिए सहानुभूति के साथ), इसलिए मुझ पर क्रांति और देशद्रोह का प्रचार करने का आरोप लगाया जा सकता है।

मिखाइल शोलोखोव की क्वाइट फ्लॉस द डॉन‘ (Quiet Flows the Don by Mikhail Sholokhov) मैक्सिम गोर्की की माँ (Maxim Gorky’s Mother), और जॉन रीड की दस दिन जब दुनिया हिल उठी‘ (John Reed’s Ten Days Which Shook the World) 1917 की रूसी क्रांति की पृष्ठभूमि पर आधारित हैं, इसलिए मुझ पर बोल्शेविज़्म और विद्रोह का आरोप लगाया जा सकता है।

विक्टर ह्यूगो की लेस मिजरेबल्स (Les Miserables by Victor Hugo) 1830 की फ्रांसीसी क्रांति के संदर्भ में है और 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के पक्ष में बोलती है (अध्याय ‘द कन्वेंशनिस्ट’ (‘The Conventionist’) या ‘द बिशप इन द प्रेजेंस ऑफ ए न्यू लाइट’ (‘The Bishop in the presence of a New Light‘)

फ्रेडरिक शिलर की द रॉबर्स (The Robbers by Friedrich Schiller) क्रांति का प्रचार करती प्रतीत होती है। इसी तरह रूसो ( Rousseau ) का सोशल कॉन्ट्रैक्ट ( The Social Contract ) और थॉमस पेन ( Thomas Paine ) का लेखन कॉमन सेंस ( Common Sense ) भी हैं।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की पाथेर देवी एक क्रांतिकारी संगठन को संदर्भित करती है, और इसे अंग्रेजों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था (एक समय में इसकी एक प्रति की कीमत को एक माउसर पिस्तौल की कीमत कहा जाता था)।

अधिकांश उर्दू शायरी क्रांतिकारी लगती है मसलन फैज की ‘हम देखेंगे’ और जोश की ‘क्या हिंद का ज़िंदां काँप रहा है’. इसलिए उर्दू के काव्य संग्रह खतरनाक हैं।

जॉन स्टीनबेक ( John Steinbeck ) की ‘ग्रेप्स ऑफ रैथ’ (Grapes of Wrath ) कृषि क्रांति का प्रचार करती प्रतीत होती है।

एडगर स्नो ( Edgar Snow ) की पुस्तकें रेड स्टार ओवर चाइना और रेड चाइना टुडे (Edgar Snow’s books Red Star Over China and Red China Today), 1949 की  चीनी साम्यवादी क्रांति के प्रति सहानुभूति रखती हैं।

डिकेंस ( Dickens ) के उपन्यास प्रचलित सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष को भड़का सकते हैं, जैसा कि अप्टन सिंक्लेयर ( Upton Sinclair ), पाब्लो नेरुदा ( Pablo Neruda ), शॉ ( Shaw ), प्रेमचंद, काजी नजरूल इस्लाम और सुब्रमण्यम भारती के लेखन करते हैं, जो सभी मेरी बुकशेल्फ़ में हैं।

डीएच लॉरेंस की लेडी चैटरलीज लवर (Lady Chatterley’s Lover by D.H. Lawrence), जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की मिसेज वारेन्स प्रोफेशन (Mrs Warren’s Profession by George Bernard Shaw), मौपसंत ( Maupassant ) और मंटो की लघुकथाएं, उमर खय्याम की रुबाइयां और ढेर सारी उर्दू कविताएं हिज लॉर्डशिप को अश्लील, कामुक, ( obscene ) या भद्दी लग सकती हैं, और इनकी गणना हानि पहुंचाने वाली पुस्तकों में की जा सकती है।

जॉर्ज ऑरवेल का 1984 (1984 by George Orwell) कानून द्वारा स्थापित सरकार का मजाक उड़ाते हुए दिखाई दे सकता है।

मैकियावेली का राजकुमार (The Prince by Machiavelli ) छल, कपट और अन्य कार्यों की सलाह देता प्रतीत हो सकता है जो राज्य के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

फ्योदोर दोस्तोवस्की का अपराध और सजा Crime and Punishment by Fyodor Dostoevsky, और एडगर एलन पो ( Edgar Alan Poe ), डैशियल हैमेट ( Dashiel Hammett ), आदि की कहानियां कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका के सामने एक गंभीर समस्या के बजाय अपराध को मनोरंजन के विषय के रूप में मानकर समाज में आपराधिक व्यवहार का प्रसार कर सकती हैं।

वाल्टेयर की कैंडाइड, जैडिग आदि (Candide, Zadig etc by Voltaire), और दोस्तोवस्की ( Dostoevsky ) की ब्रदर्स करमाज़ोव (Brothers Karamazov) ईशनिंदनीय ( blasphemous ) दिखाई दे सकती हैं।

टॉल्सटॉय की अन्ना कारेनिना (Anna Karenina by Tolstoy) और गुस्ताव फ्लेबर्ट की मैडम बोवेरी ( Madame Bovary by Gustave Flaubert) को आत्महत्या के लिए उकसाने के रूप में देखा जा सकता है, जो भारतीय दंड संहिता के तहत एक अपराध है।

ग्राहम ग्रीन द्वारा लिखित द क्वाऐट अमेरिकन (The Quiet American by Graham Greene) आतंकवाद ( terrorism ) को उकसाने वाला प्रतीत हो सकता है।

तमिल क्लासिक सिलप्पादिकारम (Tamil classic Silappadikaram) में आपत्तिजनक भड़काऊ सामग्री ( inflammatory ) होना कहा जा सकता है, क्योंकि यह मदुरै के पूरे शहर को जलाने वाली स्त्री कन्नगी ( Kannagi ) को संदर्भित करता है।

इसलिए पुलिस, न्यायपालिका और अन्य राज्य प्राधिकरणों के जीवन को आसान बनाने के लिए, मैं सिफारिश करता हूं कि इन सभी लेखन को भारत में तुरंत प्रतिबंधित कर दिया जाए।

जस्टिस मार्कंडेय काटजू

लेखक सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश हैं।

भारत क्या है ? जस्टिस काटजू का एक महत्वपूर्ण भाषण | hastakshep | हस्तक्षेप

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