महामारी को अवसर और उत्सव बनाने वालों से आपको कौन बचाएगा?

महामारी को अवसर और उत्सव बनाने वालों से आपको कौन बचाएगा?

Who will protect you from making the epidemic an occasion and celebration?

मशहूर साहित्यकार मित्र रूप सिंह चंदेल

ने लिखा है-

जिला प्रशासन ने कल मेरी सोसायटी (विपुल गार्डेन, धारूहेड़ा) को कंटेनमेंट ज़ोन घोषित किया। 70 से अधिक मरीज। यह सब था पर लोग मस्त थे। अब चारों ओर सन्नाटा है।

चंदेल जी के लिखे से फिर साफ हो गया कि सरकार और बाजार के भरोसे अब भी लोग सामूहिक आत्महत्या करने पर तुले हैं।

कोरोना से चारों तरफ हाहाकार मचा है

फि रभी इतनी लापरवाही।

जबकि इलाज़ का कोई इंतजाम है ही नहीं। संक्रमण से बचना ही ज़िन्दगी है।

मुंबई के नाला सुपारा से हमारे सामाजिक आंदोलनों के सह योद्धा कर्नल सिद्धार्थ बर्वे का कुछ देर पहले फोन आया था। वे भारत पेट्रोलियम के मुख्य प्रबंधक पद से हाल में रिटायर हुए हैं। 2003 से 2016 तक हम देश भर में तमाम सरकारी कम्पनियों, विभागों और हर सेक्टर में विनिवेश और निजीकरण के खिलाफ मुहिम चलाते रहे हैं।

कर्नल बर्वे फिर सामाजिक आंदोलन तेज करने की बात कर रहे हैं। हम सहमत हैं। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

विश्व व्यवस्था ने हमारे खिलाफ जैविकी युद्ध ही नहीं छेड़ा है बल्कि इस युद्ध में हमें हमारे ही खिलाफ मोर्चाबन्द भी कर दिया है।

मुंबई और महाराष्ट्र के हालात आप जानते हैं।

उत्तराखण्ड में 3 मई तक कर्फ्यू लगा है। बाजार और परिवहन बन्द है। पुलिस सड़कों पर घूम रही है, लेकिन जनता को कोई परवाह नहीं है।

पूरे परिवार के साथ निजी वाहनों में पिकनिक पर निकल रहे हैं लोग और भारी पैमाने पर संक्रमण फैला रहे हैं।

मृत्यु को उत्सव मानने वालों को कौन बचाएगा?

पलाश विश्वास

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग
पलाश विश्वास
जन्म 18 मई 1958
एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय
दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक।
उपन्यास अमेरिका से सावधान
कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती।
सम्पादन- अनसुनी आवाज – मास्टर प्रताप सिंह
चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं-
फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन
मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी
हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन
अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित।
2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

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