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dr. bhimrao ambedkar

भक्ति आन्दोलन से दलितों का उद्धार क्यों नहीं हुआ?

भक्ति आन्दोलन से दलितों का उद्धार क्यों नहीं हुआ?

“संतों के संघर्ष का समाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. उन्होंने कुछ धूल तो उड़ाई परन्तु वे लोगों के  स्तर को ऊँचा नहीं उठा सके.  उन्होंने  ईश्वर के सम्मुख समानता की लडाई तो  लड़ी परन्तु समाज में समानता की नहीं.

“मनुष्य की गरिमा स्वत सिद्ध एवं स्व प्रमाणित है और वह उस पर भक्ति का मुलम्मा चढ़ाने से नहीं आती है. संतों ने इस तथ्य को स्थापित करने का संघर्ष नहीं किया. इस के विपरीत उन के संघर्ष का दलितों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा. इस से ब्राह्मणों को उन्हें चुप कराने  का यह बहाना मिल गया कि आप का भी सम्मान होगा जब आप चोखामेला का दर्जा प्राप्त कर लेंगे.”- डॉ आंबेडकर

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Dr B.R. Ambedkar
Dr B.R. Ambedkar

Why Bhakti Movement failed to uplift the Untouchables?

The struggle of the saints did not have any effect on society. They raised some  dust but not the level of the people. They fought for  equality before God but not in society.

The value of man is axiomatic, self-evident; it does not come to him as the result of the gilding of Bhakti. The saints did not struggle to establish this point. On the contrary, their struggle had a very unhealthy effect on the depressed classes. It provided the Brahmins with an excuse to silence them by telling that they would be  respected if they also attained the status of Chokhamela.”

– Dr. B.R. Ambedkar

(S.R. Darapuri की एफबी टाइमलाइन से साभार )

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