83 वर्ष के इतिहासकार ने क्यों कहा कि यह देश एक दो पीढ़ी की बर्बादी देखेगा !

83 वर्ष के इतिहासकार ने क्यों कहा कि यह देश एक दो पीढ़ी की बर्बादी देखेगा !

एक बातचीत मेरे पहले इतिहास शिक्षक के साथ।

A conversation with my first history teacher.

इतिहास में मेरे पहले शिक्षक डॉ माणिकलाल गुप्त जी हैं। अक्टूबर 1989 में पहली बार इनसे मिला था। इन्होंने ही मुझे इतिहास की किताबें, तमाम इतिहासकारों के नाम और काम, भारतीय इतिहास कांग्रेस, विश्व इतिहास, एशिया का इतिहास, औपनिवेशिक राज्य, इतिहास दर्शन और न जाने कितनी चीजों से रूबरू कराया। हर समय पढ़ने लिखने वाले और इतिहास को ही जीने वाले। अब बहुत वृद्ध हैं और नजर की दिक्कत है। लेकिन अभी भी याददाश्त दुरुस्त है।

कुछ साल पहले इन्होंने अपनी किताबें आदि सब मुझे दे दिया था। करीब 83 साल के हैं।

तो आज उनसे देश के हालात पर बातचीत हुई। उसका सारांश दे रहा। आगे जो लिखा है वह उन्हीं ने कहा।

यह देश एक दो पीढ़ी की बर्बादी देखेगा। नौजवानों के मन में इतना भीतर तक साम्प्रदायिक जहर घोल दिया गया है तो इसका परिणाम बहुत बुरा ही होगा। देश के राजनीतिक हालात ऐसे हैं कि आरएसएस भाजपा से मुकाबला लायक प्रगतिशील वर्ग नहीं बचा है। कांग्रेस अपनी छाया मात्र बची है। कुछ क्षेत्रीय राज्य जैसे बंगाल, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा आदि अभी अपनी जनता को इस जहर से बचाये हुए हैं लेकिन ये भी कितने दिन मुकाबला कर पाएंगे।

वामपंथियों ने एक जमाने में लिबरल बुद्धिजीवियों को किनारे लगा दिया और आज खुद किनारे लगा दिए गए हैं।

आज की राजनीति पूरी तरह पटरी से हटी हुई है। गरीबी, बेरोजगारी, अन्याय, उत्पीड़न के कारण आम जनता कभी खुद से सर उठा के खड़ी हो जायेगी, सोचना नासमझी है।

महात्मा गांधी ने देश में बड़ी मेहनत से एक प्रगतिशील तबका पैदा किया था, जो भारतीयता के अनुरूप था। अब आज का बुद्धिजीवी बस पेशेवर है जिसके भीतर गहरे मानवीय मूल्य नहीं हैं और वह बस अपनी दुकान चलाना चाहता है।

जनता को भिखारी बना दिया है। देश आर्थिक रूप से खोखला हो चुका है। ऐसे में विदेशी ताकतें देश को अपने मुट्ठी में कर लेंगी।

दक्षिण के समृद्ध राज्य कुछ समय बाद अपनी स्वाधीनता घोषित कर देंगे। हिंदी पट्टी का कूड़ा बाकी देश कब तक उठाएगा? देश टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि कुछ भी सोचो लिखो पर इतिहास के विद्यार्थी होने के नाते जो क्रियाशील ऐतिहासिक शक्तियां हैं उन्हें नजरंदाज मत करो। भावुकता से बच कर सोचो लिखो। बिना दिमाग में एक ठहराव लाये ये संभव नहीं है।

आलोक वाजपेयी

लेखक इतिहासकार हैं। उनकी एफबी टिप्पणी किंचित् संपादन के साथ जनहित में साभार

Web title : Why did the historian of 83 years say that this country will see the ruin of a couple of generations!

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