सरकार का ध्यान गरीब भारतीयों की ओर क्यों नहीं जाता, जो अमर्त्य सेन, बनर्जी, राजन या राहुल गांधी का जाता है ?

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Why does the government not pay attention to poor Indians?

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2020. लॉकडाउन के दूसरे फेज (The second phase of lockdown) में हम पहुँच चुके हैं। अभी तक कोरोना की वैक्सीन (Corona vaccine) को लेकर कहीं से कोई सही खबर नहीं आ रही है और अभी यह नहीं पता कि इस महामारी का अंत कब होगा। लॉकडाउन के कारण जो दिक्कतें (Problems due to lockdown,) देश के सामने पेश आ रही हैं, उनसे पार पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। अलग-अलग विशेषज्ञ इस बारे में सुझाव भी दे रहे हैं, विपक्ष भी अपनी ओर से मोदी सरकार को लगातार सलाह दे रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कुछ समय पहले विपक्ष के नेताओं से चर्चा की थी, फिर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी विचार-विमर्श किया था।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चिट्ठी के जरिए अपनी राय से अवगत करा चुकी हैं। और आज पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लाइव वीडियो प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिये तीन बातों पर सरकार का ध्यान दिलाया है।

राहुल गांधी ने जिन बातों की तरफ ध्यान आकृष्ट किया है उनमें पहली बात ये है कि इस संक्रमण को रोकने के उपाय खोजे जाएँ। दूसरी बात-गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की जरूरत और तीसरी बात- प्रवासी मजदूरों के लिए राहत के कदम।

राहुल गाँधी के सुझावों में तीसरा और सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिंदु प्रवासी मजदूरों की बदहाली को लेकर है। उनका कहना है कि दुनिया में भारत के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है, जिसने इतने ज्यादा प्रवासी मजदूरों के बावजूद लॉकडाउन किया हो।

इसी के साथ राहुल गांधी ने खाद्य क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार से अपील की है।

उन्होंने कहा कि गोदाम भरे पड़े हैं लेकिन गरीबों के पास खाने को नहीं है। गरीबों तक अनाज दीजिए। जिनके पास राशनकार्ड नहीं हैं, उन्हें भी राशन दीजिए।

आज सबसे बड़ी बिडम्बना यही है कि हमारे देश में अनाज सड़ जाता है, लेकिन सही लोगों तक पहुँच नहीं पाता।

हमारे देश में खाद्य सुरक्षा अधिनियम (Food safety act) लागू है, फिर भी भुखमरी की नौबत?

उधर आज एक अंग्रेजी अखबार के ज़रिये नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन (Amartya Sen), अभिजीत बनर्जी (Abhijeet Banerjee) और उनके साथ भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने भी सरकार को इसी तरह के सुझाव दिए हैं औऱ खासकर दो बातों पर खास ध्यान देने को कहा है। पहला लॉकडाउन बढ़ने की इस स्थिति में सरकार गरीबों तक अधिक से अधिक धनराशि पहुंचाए औऱ दूसरा गोदामों में जमा अनाज को सही हितग्राहियों तक पहुंचाए, केवल चुनिंदा लोगों तक नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचे जो मौजूदा हालात के कारण गरीबी रेखा के नीचे जाने के खतरे में पहुंच गए हैं।

विश्व के प्रतिष्ठित भारतीय मूल के इन तीनों अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आजीविका के छिन जाने और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा होने से बड़ी संख्या में लोगों के गरीब होने और भुखमरी की हालत में पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। जो लोग भूख से मर रहे हैं उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं रहता। इस वक्त उन लोगों को यह भरोसा दिलाना होगा कि समाज उनकी फिक्र करता है औऱ उनके हितों की रक्षा होगी।

इन तीनों अर्थशास्त्रियों का ये भी सुझाव (The suggestion of the three economists) है कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है सरकार उन्हें अभी अस्थाई राशन कार्ड जारी करे, ताकि कोई भी सब्सिडी वाले अनाज की सुविधा लेने से वंचित न रह जाए।

चाहे राहुल गाँधी हों या अमर्त्य सेन, अभिजीत बनर्जी या रघुराम राजन इन सबने भारत में बढ़ती गरीबी और भुखमरी की ओर सरकार को आगाह किया है। लेकिन सोशल मीडिया पर और हमारे पास जितने संदेश आ रहे हैं उनमें से अधिकतर अपनी गरीबी, भोजन की कमी और पैसे का अभाव बता रहे हैं हैं। यक्ष प्रश्न है कि सरकार का ध्यान इस ओर क्यों नहीं जाता?

इस कठिन समय में मोदी जी अगर इन सुझावों को अपनाते हैं तो उनके पास अपनी सरकार को लोककल्याण की कसौटी पर परखने औऱ लोगों के अपने ऊपर जतलाए गए भरोसे को सही साबित करने का सुनहरा मौका है। अब ये मोदी सरकार के ऊपर है कि वो इस मौके को कैसे भुनाती है या डूबती अर्थव्यवस्था के साथ खुद भी डूब जाती है।

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