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क्यों जरूरी है वन संरक्षण

Why forest protection is important | वन संरक्षण क्यों जरूरी है?

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कई वन आधारित उद्योग (Forest based industry) खड़े हुए। ये उद्योग मांग पूर्ति के लिये सीधे वनों से जुड़ गये। औद्योगिक लकड़ी पर यह मार सीधी पड़ी।

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ साइंस (Indian Institute of Science) के एक प्रमुख वनस्पति विशेषज्ञ माधव गाडगिल का कहना था कि

”हमारे देश की आर्थिक स्थिति कुछ ऐसी है कि इसमें समाज के किसी भी हिस्से- आम लोगों, सरकारों और उद्योगों- का वन संरक्षण से कोई वास्ता नहीं रह गया है।”

दक्षिण भारत की कागज की मिलों द्वारा बांस वनों का उजड़ना एक ऐसा ही उदाहरण है। वहां कागज उद्योगों के कारण स्थानीय बंसोड़ों का जीवन मुश्किल में पड़ गया था। लिहाजा रोजमर्रा की जरूरत के लिए बांस की चोरी भी होने लगी। इसके अलावा सबसे ज्यादा वर्षा वाला चेरापुंजी क्षेत्र वनविहीन होने लगा।

Millions of hectares of forests are sacrificed every year in the name of development schemes.

लाखों हेक्टेयर वन हर वर्ष विकास योजनाओं के नाम पर बलि चढ़ जाते हैं। हिमाचल में भी सेव के बक्से बनाने में ही बड़ी मात्रा में लकड़ियां खप जाती हैं।

जातीय वृक्षारोपण से नष्ट हो रहे हैं प्राकृतिक वन | Natural forests are being destroyed by ethnic plantations

एक जातीय वृक्षारोपण भी नई समस्याएं खड़ी कर रहा है। प्राकृतिक वन इससे नष्ट हो रहे हैं। प्रचुर मात्रा में मिलने वाले प्राकृतिक और पर्यावरण मित्र माने जाने वाले वनोत्पादों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ा है।

एक वन विशेषज्ञ के मुताबिक-

”वास्तव में वन-नीति का संबंध पेड़ों से उतना नहीं है जितना लोगों से है। पेड़ों का संबंध वहीं तक है जहां तक वे लोगों की जरूरतों को पूरा करते हैं।”

भारत में वन कभी भी लोगों के लिये आरक्षित नहीं रहे। अधिक से अधिक राजस्व प्राप्ति की व्यावसायिक सोच ही वन-संरक्षण की राह में एक बड़ी बाधा है।

वन्य प्राणियों का अस्तित्व भी संकटग्रस्त हो चला है। उनको बचाने के लिये अभयारण्य की व्यवस्था की योजनाएं बनने लगीं। परंतु अब भी वन संरक्षण की समस्या जटिल साबित हो रही है क्योंकि अभयारण्य को विकसित करने की पहल ने आदिवासियों के प्राकृतिक जीवनशैली को संकट में डाल रखा है।

वनों का बचाना मानव सहित समस्त प्राणियों के लिये अत्यावश्यक है।

देशबन्धु

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