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जानिए जस्टिस काटजू ब्राह्मण होकर भी मांसाहारी भोजन क्यों करते हैं?

जानिए जस्टिस काटजू ब्राह्मण होकर भी मांसाहारी भोजन क्यों करते हैं?

नई दिल्ली, 05 जनवरी 2023. सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Retired Supreme Court Judge Justice Markandey Katju) सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और मजे-मजे में कुछ पंगे भी लेते रहते हैं। अब ऐसा ही कुछ पंगा उन्होंने फेसबुक पर खुद के मांसाहारी भोजन करने के कुछ चित्र पोस्ट करके ले लिया, जिस पर फेसबुकियों ने उनकी क्लास ले ली। लिहाजा जस्टिस काटजू ने बाद में अलग से एक अन्य फेसबुक पोस्ट लिखकर बताया कि वह ब्राह्मण होकर भी मांसाहारी भोजन क्यों करते हैं?

अपनी अंग्रेजी में लिखी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि

कुछ लोगों ने मुझसे पूछा कि जब मैं ब्राह्मण हूं तो मांसाहारी भोजन क्यों करता हूं।

यह सच है कि भारत में अधिकांश ब्राह्मण सख्त शाकाहारी हैं। लेकिन मैं एक कश्मीरी ब्राह्मण हूं, और कश्मीरी ब्राह्मण मांसाहारी हैं (हमारे मुख्य व्यंजन मटन व्यंजन हैं जैसे रोगजोश, याकनी, कबरगा, रिश्ता, आदि)।

इसके अलावा, एक समय में सभी ब्राह्मण मांसाहारी थे, जो इस तथ्य से सिद्ध होता है कि कई वैदिक यज्ञों (ब्राह्मण नामक पुस्तकों में उल्लेखित) में, जैसे कि अग्निसोमिया यज्ञ, एक बकरे की बलि दी जाती है और खाया जाता है। इन यज्ञों में यह भी विस्तार से बताया गया है कि जानवर का कौन सा अंग किस पुजारी, होता, अध्वर्यु और उद्गाता को दिया जाएगा। (विकीपीडिया)

पशु प्रोटीन में शरीर के लिए आवश्यक सभी 24 अमीनो एसिड होते हैं, जबकि किसी भी सब्जी में सभी 24 नहीं होते हैं, और इसलिए शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई सब्जियां खानी पड़ती हैं।“

इससे पहले एक पोस्ट में जस्टिस काटजू ने लिखा था-

“कर्नाटक के भटकल में 2 जनवरी को रात के खाने में श्री मोहम्मद तनवीर के घर पर परोसे गए ये भटकली व्यंजन थे जिनका मैंने आनंद लिया:

शेनुआ नवार्यो (चावल और नारियल के गोले के साथ मसल्स स्टीम्ड सी शेल्स स्टफ्ड इनसाइड)

खोटे (चावल के आटे को केले के पत्तों में लपेटकर उबाले हुए)

हलदी पाना नवार्यो (चावल के आटे में नारियल की स्टफिंग को हल्दी के पत्तों पर फैलाकर स्टीम किया हुआ)

मुत्तकाले (झींगा करी में पकाए गए चावल और नारियल के गोले)

शोपापना पोली (अंडे और नारियल के दूध में मिश्रित सोआ के पत्तों से बना हलवा)

मूगा गोदान (नारियल के दूध और गुड़ में मिश्रित मूंग की खीर)

शैय्या बिरयानी (मटन या चिकन या और बहुत सारे विकल्प के साथ नूडल्स की बिरयानी)।“

जस्टिस काटजू की इस पोस्ट पर ही एक सज्जन Atul M ने लिखा – “सर आप ब्राह्मण है प्लीज नॉन वेज मत खाओ लोग क्या कहेंगे1”

जस्टिस काटजू ने उत्तर में लिखा-“ वे मूर्ख हैं। सभी ब्राह्मण एक समय में मांस खाते थे। इसका प्रमाण यह है कि ऐसे कई मांसाहारी यज्ञ हुए हैं, जिनमें बकरा मारा जाता था और बाद में खाया जाता था”

उन्होंने एक चित्र पोस्ट करते हुए लिखा

2 जनवरी को भटकल में तनवीर साहब के घर डिनर में शैय्या बिरयानी परोसी गई, जो मुझे बहुत अच्छी लगी

Why does Justice Katju eat non-vegetarian food despite being a Brahmin?

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