डोनबास में हार के बाद क्या अमेरिकी कहानी ज़िंदा रहेगी ?

डोनबास में हार के बाद क्या अमेरिकी कहानी ज़िंदा रहेगी ?

Will the American story survive after the defeat in the Donbass?

नई दिल्ली (एम. के. भद्रकुमार) 27 अप्रैल 2022. ब्रिटिश कूटनीति (British diplomacy) के बारे में एक असाधारण बात यह है कि यह लगातार वक्र से आगे रहने के तरीकों की तलाश करती है और पूरे अटलांटिक और संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने ग्राहकों को अतिरिक्त लाभ प्रदान करती है। यह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस (British Prime Minister Boris Johnson’s press conference in New Delhi on Friday) में यूक्रेन संघर्ष पर उनकी टिप्पणी को अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाती है।

जॉनसन ने मैथ्यू अर्नोल्ड की कविता डोवर बीच की “उदासी, लंबी, पीछे हटने वाली दहाड़” पर विचारोत्तेजक पंक्तियों की तरफ ध्यान आकर्षित किया तब, जब विश्वास घट रहा था। वे पिछले दिन व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की टिप्पणी के फोकस के बिलकुल विपरीत थे, जहां उन्होंने निम्न शपथ ली थी, कि

  • “पुतिन को उसके क्रूर और खूनी युद्ध के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा”;
  • “डोनबास क्षेत्र में – यानि पूर्व में यूक्रेन की लड़ने की क्षमता को ओर अधिक बढ़ाया जाएगा”;
  • “यूक्रेन में रूस की आक्रामकता को पछाड़ने के लिए, पुतिन की बर्बरता का सामना किया जाएगा”;
  • “पुतिन को एक अचूक संदेश भेजना: कि वे पूरे यूक्रेन पर हावी होने और कब्जा करने में कभी सफल नहीं होंगे। वे ऐसा नहीं कर पाएंगे – और ऐसा नहीं होगा”;
  • “पुतिन पर दबाव बढ़ाने के लिए रूस को विश्व मंच पर अलग-थलग किया जाएगा”;
  • “रूस को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली के उन लाभों से वंचित किया जाएगा जिनका फायदा रूस ने अतीत में उठाया था”; और,
  • “यूक्रेन के बहादुर और गौरवान्वित लोगों के साथ हमेशा खड़े होंगे।”

बाइडेन अपने एक ही भाषण में इस सारी कटुतापूर्ण बयानबाजी को समेटने में कामयाब रहे! वास्तव में, उन्होंने इस आशावाद को भी समाप्त कर दिया कि “अभी तक इसका कोई सबूत नहीं है कि मारियुपोल पूरी तरह से रूस के सामने गिर गया है”।

लेकिन जॉनसन, इसके विपरीत, ब्रिटिश सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्वानुमान के साथ गए कि रूस यूक्रेन में जीत हासिल कर सकता है। बिना किसी मौखिक कलाबाजी के, वह सीधे मुद्दे पर आते हैं और कहते हैं कि :

“मुझे लगता है कि दुखद बात यह है कि (रूसी जीत) एक यथार्थवादी संभावना है। हाँ बिलकुल ऐसा है। पुतिन के पास एक विशाल सेना है, उनके सामने बहुत ही कठिन राजनीतिक स्थिति है … अब उनके पास एकमात्र विकल्प है कि वे अपने भयावह, कुचलने वाले दृष्टिकोण का इस्तेमाल करते हुए कोशिश जारी रखें, यानि तोपखाने के नेतृत्व में, वे यूक्रेनियन को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। वे अब मारियुपोल में एक लैंड ब्रिज हासिल करने के बहुत करीब है। मुझे डर है कि हालात काफी अप्रत्याशित हैं। हमें बस इसके बारे में यथार्थवादी होना होगा।”

यूक्रेन की अपनी हाल की यात्रा के दौरान, जॉनसन ने कथित तौर पर राष्ट्रपति व्लादिमीर ज़ेलेंस्की को सलाह दी थी कि वे पीछे हटें और एक नई रक्षा लाइन बनाएं, लेकिन ज़ेलेंस्की के सामने अमेरिकी सलाह को मानने के अलावा कोई चारा नहीं था।

राष्ट्रपति बाइडेन के सामने, निश्चित रूप से, पर्याप्त कारण है कि वे युद्ध को हमेशा के लिए युद्ध के रूप में ही जारी रखें। क्योंकि इस युद्ध ने यूरोप को अमेरिका के कमजोर ट्रान्साटलांटिक नेतृत्व के पीछे खड़ा कर दिया है। इसके अलावा, बाइडेन के पास अब एक बहाना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उच्च मुद्रास्फीति क्यों है। वह चुनावी साल में सैन्य-औद्योगिक गठजोड़ को शांत कर रहे हैं। बाइडेन ने गुरुवार को भारी तोपखाने, गोला-बारूद और ड्रोन के 1,44,000 राउंड के लिए सैन्य सहायता में 800 मिलियन डॉलर के एक नए पैकेज की घोषणा की है, जिसे डोनबास में “सीधे स्वतंत्रता के लिए लड़ रही अग्रिम पंक्तियों को” भेजा जाएगा।

हालाँकि, बड़ा सवाल यह है कि अगर बाइडेन रूस के साथ लंबे समय तक संघर्ष चाहते हैं तो अमेरिकी नेतृत्व के पीछे पश्चिमी एकता कब तक कायम रहेगी?

मारियुपोल और डोनबास में लगातार पराजय न केवल यूक्रेनी सेना की कमर तोड़ देगी बल्कि अमेरिका की विश्वसनीयता को भी गंभीर रूप से चोट पहुंचाएगी, साथ ही यह पूरे पश्चिमी विजयी कथा को बदनाम कर देगी।

हालांकि, पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूसी अर्थव्यवस्था को नुकसान (damage to the Russian economy) पहुंचाया है, लेकिन वर्तमान में मिल रहे संकेतों के अनुसार, मास्को एक “नई सामान्य” स्थिति में लौट रहा है। पश्चिमी अपेक्षाओं के विपरीत, प्रतिबंध सरकार के खिलाफ रूसी जनमत को खड़ा करने में विफल हो गए हैं। रूस ने नेक्स्ट जनरेशन की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल सरमत का पिछले बुधवार को सफल परीक्षण किया – जिसका “दुनिया में कोई एनालॉग नहीं है और आने वाले लंबे समय तक  (पुतिन के शब्दों में) इसका कोई जवाब नहीं होगा – इसमें कोई संदेह नहीं है।

इस बीच, रूस को “अलग-थलग” करने के पश्चिमी प्रयासों के बारे में कोई सफलता की कहानी नहीं है।

वाशिंगटन में जी20 के वित्तमंत्रियों की बैठक में, “रूस बहिष्कार” के मुद्दे पर पश्चिमी गुट के अलावा कोई और नहीं था। अमेरिका, सऊदी अरब को रूस के उनके ओपेक+कार्टेल से अलग होने के लिए मनाने में विफल रहा है। इन सबसे ऊपर, तेल और गैस के मामले में जो प्रमुख क्षेत्र है और जो सबसे अधिक मायने रखता है वह यूरोप है जो प्रतिबंध के लिए सहमत नहीं है। कई यूरोपीयन यूनियन के देशों ने आयोग द्वारा इस तरह के किसी भी कदम पर वीटो करने की धमकी दी है।

यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं (Europe’s economies) मंदी के अलग-अलग चरणों में हैं, क्योंकि प्रतिबंधों से झटका उन पर भी पड़ने लगा है। जर्मनी के केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को चेतावनी दी है कि रूसी ऊर्जा खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध से 180 बिलियन यूरो की लागत बढ़ सकती है, जो इस साल जर्मनी की अपेक्षित जीडीपी से 5 प्रतिशत को कम कर सकता है, और अर्थव्यवस्था को एक गंभीर मंदी में धकेल सकता है।

बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा के नए स्रोतों को खोजने की जरूरत भी मुद्रास्फीति को बढ़ा देगी, जो इस वर्ष के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 1.5 प्रतिशत प्रतिशत अंक और अगले वर्ष के लिए 2 प्रतिशत से अधिक अंक जोड़ देगी।

जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ ने शुक्रवार को स्पीगल को बताया कि गैस प्रतिबंध का न होना अंततः “एक नाटकीय आर्थिक संकट से बचने, लाखों नौकरियों और कारखानों को नुकसान से बचाने के बारे में है जो फिर कभी नहीं खुलेंगे।” उन्होंने कहा कि इस तरह गैस प्रतिबंध “हमारे देश के लिए, पूरे यूरोप के लिए गंभीर परिणाम पैदा करेंगे॰.. इसलिए यह कहना मेरी ज़िम्मेदारी है: ‘हम इसकी (प्रतिबंध) अनुमति नहीं दे सकते हैं।”

यूरोपीय लोग जल्द ही महसूस करने लगे कि वे इस खेल में हार जाएंगे।

औद्योगिक उत्पादन में बाधा पड़ने से आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के अलावा, अब तक आए 5 मिलियन शरणार्थियों के बोझ को झेलना और “यूरोप के ब्रेड बास्केट” में युद्ध के कारण खाद्य सुरक्षा पर बड़ा विपरीत  प्रभाव पड़ा है क्योंकि उर्वरकों की कम आपूर्ति हो रही है फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए उर्वरकों को खरीदने के लिए यूरोप को कीमतों में बढ़ोतरी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

यूरोपीयन यूनियन के नागरिकों की इस समय सबसे बड़ी चिंता क्या है?

गैलप इंटरनेशनल पोल ने दर्शाया है कि इस समय यूरोपीयन यूनियन के नागरिकों की सबसे बड़ी चिंता बढ़ती कीमतें, यूक्रेन में व्यापक युद्ध का डर और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित कमी है। यूरोपीयन यूनियन के आधे से अधिक नागरिकों का मानना है कि यूरोप पहले ही यूक्रेन को पर्याप्त सहायता प्रदान कर चुका है।

यह वह जगह है जहां डोनबास में हार एक बड़ी घटना में बदल जाती है, जो यूक्रेन पर अमेरिकी विचार पर सवाल उठाती है – नाटो विस्तार, यूरोपीय सुरक्षा और रूस के साथ बातचीत – और निश्चित रूप से, व्लादिमीर पुतिन के रूस के नेतृत्व के बारे में उनके विचार पर भी सवाल उठाती है।

एसोसिएटेड प्रेस-एनओआरसी सेंटर फॉर पब्लिक अफेयर्स रिसर्च द्वारा गुरुवार को प्रकाशित एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि अमेरिकियों की इस सब से जुडने की इच्छा कुछ हद तक कम हो गई है। केवल 32 प्रतिशत का कहना है कि संघर्ष में अमेरिका की प्रमुख भूमिका होनी चाहिए, जो पिछले महीने के 40 प्रतिशत के मुक़ाबले काफी कम है। अतिरिक्त 49 प्रतिशत का कहना है कि अमेरिका की छोटी भूमिका होनी चाहिए।

बाइडेन के बयान को खारिज कर दिया जॉनसन ने

दिल्ली में बोलते हुए जॉनसन ने बाइडेन के बयान को खारिज कर दिया। इसके बजाय, उन्होंने “यूरोप की सुरक्षा वास्तुकला में यूक्रेन के भविष्य पर एक दृष्टि बनाने” का आह्वान किया। यूक्रेन अब इसमें कहाँ फिट बैठता है?”

न्यूजक्लिक में प्रकाशित महेश कुमार द्वारा अनूदित खबर किंचित् संपादन के साथ साभार

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