निडरता, स्ट्रेटेजी और संघर्ष का त्रिकोण क्या यूपी में कांग्रेस को खड़ा कर पायेगा ?

Ajay Kumar Lallu with Priyanka Gandhi

लखनऊ से रीना मिश्रा

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Congress General Secretary Priyanka Gandhi) ने जिस ‘धरना कुमार’ पर दावं लगाया था वो जेल में हैं। कुशीनगर के तमकुहीराज से विधायक और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू (Congress state president Ajay Kumar Lallu) को उनके क्षेत्र के लोग इसी नाम से जानते हैं। अजय लल्लू फिलहाल जेल में होने के कारण चर्चा में हैं, और उनके बहाने ही पूरी उत्तर प्रदेश कांग्रेस भी चर्चा में है कि क्या जिस अश्वमेध के घोड़े पर प्रियंका ने दाव लगाया है वो यूपी में इस बूढ़ी पार्टी में जान डाल सकता है ?

ये सवाल दो वजहों से इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि यूपी कांग्रेस कथित बड़े नेताओं की गुटबाज़ी का शिकार रही है, जिसके चलते पार्टी अतीत में निरंतर कमज़ोर होती गयी। दूसरे, प्रियंका के बाद नेहरू-गांधी परिवार के पास कोई ऐसा चेहरा भी नहीं है जिसमें कांग्रेस अपना भविष्य देख सके, इसलिए उनकी पसंद के प्रदेश अध्यक्ष की सफलता और विफ़लता दरअसल प्रियंका की ख़ुद की सफलता और विफलता मानी जायेगी।

प्रियंका कांग्रेस को कितना बदल पायी हैं | How much Priyanka has changed for Congress

अगर हम अजय कुमार लल्लू के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन को देखें तो अब तक तीन ऐसे कार्यक्रम रहे हैं जिसमें कांग्रेस लल्लू के नेतृत्व में बेहतर करती दिखी है। पहला 14 दिसंबर को दिल्ली में हुई भारत बचाव रैली, जिसमें यूपी कांग्रेस ने लंबे समय बाद ठीक-ठाक संख्या में लोगों को अपनी रैली में ले जाने में सफलता पाई। रैली के संयोजन से जुड़े एक नेता बताते हैं कि उन्हें 30 हज़ार लोगों का टारगेट दिया गया था लेकिन यूपी से 42 से 44 हज़ार लोग गए थे और उसमें भी पूर्वी उत्तर प्रदेश से ज़्यादा लोग थे जहां कांग्रेस हाशिये पर रही है। वो बताते हैं कि ख़ुद प्रियंका ने अपने पिछले दौरे में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में इसके लिए लल्लू की तारीफ़ की थी।

वहीं दूसरा सफल अभियान किसान मांग पत्र भरवाने का था जो हालांकि कोरोना के कारण बीच में ही रुक गया। इस अभियान के तहत 20 लाख किसानों से सीधे संपर्क कर कांग्रेसियों ने फॉर्म भरवाया। इस अभियान के दौरान क़रीब 30 ज़िलों में ख़ुद प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू खेतों में ज़मीन पर बैठकर मांग पत्र भरवाते हुए तस्वीरों में देखे गए थे। इससे पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के किसी अध्यक्ष को खेतों की मेढ़ पर बैठते शायद की किसी ने देखा हो।

लल्लू के साथ चलने वाले टोनी कुशवाहा बताते हैं कि रोज़ सुबह 5 बजे निकलकर रात 1 बजे हम लोग वापस लौटते थे। यूपी कांग्रेस की कार्यशैली को नज़दीक से देखने वालों के लिए यह एक आश्चर्यजनक बात है। क्योंकि इससे पूर्व कांग्रेस की कार्यशैली शिथिलता की पहचान रखती रही है। इस अभियान का ही दबाव था कि अखिलेश यादव को भी सपा नेताओं को किसानों के बीच जाने का निर्देश देना पड़ा था।

वहीं तीसरे अभियान के बतौर कोरोना महामारी में लोगों की सेवा का था। इसके तहत प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर चल रही रसोई के दौरान अजय लल्लू की पूड़ी छानते तस्वीर भी काफ़ी वायरल हुई थी।

लल्लू के एक क़रीबी बताते हैं कि कोरोना के कारण हुए लॉक डाउन के तीसरे दिन ही प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह (Priyanka Gandhi’s personal secretary Sandeep Singh) ने एक वाट्सएप्प ग्रुप बनाया जिसका नाम ‘कांग्रेस फाइट्स कोरोना‘ था। इसमें सभी ज़िला और शहर अध्यक्षों के अलावा सभी अहम पदाधिकारी थे जिन्हें सीधे प्रियंका गांधी निर्देशित कर रही थीं। इस वाट्सएप्प ग्रुप के ज़रिए ही अजय लल्लू को यूपी और यूपी से बाहर रह रहे प्रवासियों को मदद पहुंचाने की ज़िम्मेदारी प्रियंका ने सौंपी थी, जिसके तहत क़रीब एक लाख लोगों तक मदद पहुंचाई गई।

बतौर विपक्ष अख़बारों में जगह बनाती कांग्रेस

इस अभियान की सफ़लता ने जहां लंबे समय बाद कांग्रेसियों को आम लोगों तक जाने को प्रेरित किया वहीं लल्लू के लिए भी अपने को प्रादेशिक स्तर पर पहचान बनाने में मदद की। वहीं प्रियंका गांधी द्वारा योगी सरकार को एक हज़ार बस चलाने के प्रस्ताव में भी जिसे योगी ने नकार दिया, लल्लू और प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह पर मुक़दमे ने उन्हें एक बार फिर मुख्य विपक्ष की भूमिका में चर्चा में ला दिया।

प्रियंका के निजी सचिव संदीप सिंह के क़रीबी माने जाने वाले अजय लल्लू के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हुआ, जिसके चलते वो श्रमिकों की आवाज़ उठाने वाली पहचान बना सके।

ग़ौरतलब है कि ख़ुद लल्लू भी विधायक बनने से पहले दिल्ली में मजदूरी कर चुके हैं।

इन तीनों अभियानों के दौरान अख़बारों के लोकल एडिशनों और ग्रामीण ख़बरों के पन्नों पर भी कांग्रेस दिखने लगी, जो लंबे समय बाद हुआ। वहीं प्रियंका और लल्लू की निरंतर सक्रियता के कारण अख़बारों में कांग्रेस मुख्य विपक्षी की भूमिका में भी दिखने लगी है। उसने कम से कम बसपा की जगह को मीडिया से ग़ायब कर दिया है और अखिलेश भी योगी पर हमले के समय उतने आत्म विश्वास से भरे नहीं दिखते जितने लल्लू। जबकि इससे पहले कांग्रेस सिर्फ़ 10 मॉल एवेन्यू तक कुछ बड़े नामों के कभी कभार होने वाली प्रेस कांफ्रेंसों तक ही मीडिया में दिखती थी।

इसकी एक बड़ी वजह यह भी बताई जाती है कि कांग्रेस के बड़े नाम दिल्ली की राजनीति में ही ज़्यादा दिलचस्पी लेते रहे हैं। सलमान ख़ुर्शीद, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद तभी प्रदेश कार्यालय पर दिखते थे जब राहुल या सोनिया आती थीं। वहीं प्रमोद तिवारी भी सिर्फ़ जयंती और पुण्यतिथि के अवसरों तक ही अपने को सीमित किये हुए थे। वैसे भी उनकी सक्रियता बढ़ती उम्र के कारण अपने विधानसभा तक ही सीमित रही है। ज़ाहिर है तब अख़बारों में कांग्रेस भी कम ही दिखती थी।

 

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें