रिया की मीडिया लिंचिंग पर महिला संगठन ने आपत्ति जताई, कहा भाजपा सरकार का गुलाम हो गया है मीडिया

रिया की मीडिया लिंचिंग पर महिला संगठन ने आपत्ति जताई, कहा भाजपा सरकार का गुलाम हो गया है मीडिया

Women’s organization objected to Riya’s media lynching, said media has become a slave of BJP government

लखनऊ 7 सितंबर 2020. अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) -ALL INDIA PROGRESSIVE WOMEN’S ASSOCIATION (AIPWA) ने मीडियाकर्मियों द्वारा दिवंगत फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की महिला मित्र रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) के साथ मीडियाकर्मियों द्वारा की गई धक्का मुक्की की भर्त्सना करते हुए मांग की है कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

इस संबंध में ऐपवा द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति का मूल पाठ निम्नवत् है –

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से हर संवेदनशील व्यक्ति मर्माहत है और सुशांत व उसके परिवार को न्याय मिले यह हर बिहारवासी चाहेगा, देश के आम प्रगतिशील लोग चाहेंगे. लेकिन सुशांत सिंह की मृत्यु के लिए रिया चक्रवर्ती दोषी है या नहीं यह अदालत को तय करने दिया जाए.

इस दौर में बेकारी, गरीबी, आर्थिक तंगी से तबाह पूरे के पूरे परिवारों की सामूहिक आत्महत्या पर चुप रहने वाली मीडिया, सुशांत की हत्या को लेकर जिस तरह अतिसक्रिय है और जिस तरीके से रिया की छवि पेश कर रही है वह शर्मनाक और आपराधिक कृत्य है.

कल जिस तरीके से रिया के साथ मीडियाकर्मियों ने धक्का मुक्की की, उसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए कम है. ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए.

ऐपवा की ओर से मीडिया से भी हम अपील करना चाहते हैं कि कानून व्यवस्था को अपना काम करने दें. हम समाज के आमलोगों से भी अपील करना चाहते हैं कि मीडिया के कुछ लोग जो आज सरकार के चारण बने हुए हैं उनकी मंशा को समझें. देश में बढ़ रही बेरोजगारी, आर्थिक तंगहाली, बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार के प्रवासी मजदूरों,किसानों की बदहाली, बिहार में अपराधियों का बढ़ता मनोबल, महिलाओं पर बलात्कार, अत्याचार आदि मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है.

हमें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि कल ही बिहार भाजपा के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ने सुशांत सिंह मामले को बिहार विधानसभा चुनाव का मुद्दा बनाने की बात की है.

हमें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि जो ताकतें पद्मावत फिल्म के समय सुशांत सिंह के दुश्मन बनी हुई थीं वह आज सुशांत की हितैषी नहीं हो सकतीं, बल्कि वह इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगी हैं.

किसी महिला को अगर वह दोषी है तब भी अपनी बात कहने का मौका दिया जाना चाहिए और जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए.

हम अदालत, राष्ट्रीय महिला आयोग, और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी से भी अपील करते हैं कि मीडिया जिस तरह महिला विरोधी भाषा और सोच के साथ रिया के बारे में प्रसारण कर रही है उसे सख्ती से रोका जाए.

सुशांत जिस प्रगतिशील विचार का होनहार नौजवान था शायद उसे भी यह पसंद नहीं होता कि बिना दोष सिद्ध हुए किसी महिला को सार्वजनिक रूप से इस तरह जलील किया जाए. इसलिए हम सुशांत के प्रति सम्मान रखने वाले हर व्यक्ति से अपील करते हैं कि वे मीडिया के इस रवैये के प्रति अपनी असहमति जताएं.

मीना तिवारी

राष्ट्रीय महासचिव, ऐपवा

रति राव

राष्ट्रीय अध्यक्ष,ऐपवा

कविता कृष्णन

सचिव, ऐपवा

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