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world copd day in Hindi

वर्ल्ड सीओपीडी डे : वायु प्रदूषण से हो सकता है सीओपीडी

इनहेलर के प्रयोग से नहीं पड़ती आदत : डॉ अर्जुन खन्ना

वर्ल्ड सीओपीडी डे कब मनाया जाता है? | When is World COPD Day celebrated?

हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को वर्ल्ड सीओपीडी डे (world copd day in Hindi) मनाया जाता है किंतु इस वर्ष यह बहुत ही अलग है क्योंकि इसे डिजिटली मनाने पर ही ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ श्वास रोग एवं क्रिटिकल रोग विशेषज्ञ (Senior Respiratory & Critical Disease Specialist) डॉ के के पांडे, अर्जुन खन्ना और डॉक्टर अंकित सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष दिल्ली एनसीआर में पॉल्यूशन (Pollution in Delhi NCR) बहुत ही ज्यादा बढ़ा हुआ है और खतरनाक लेवल को पार कर चुका है, ऐसे में वर्ल्ड सीओपीडी मनाने के लिए मरीजों के लिए कार्यक्रम करने के अनुरोध आ रहे हैं लेकिन उन्होंने कहा सीओपीडी के मरीजों को एक साथ इकट्ठा करना है इस समय टाइम बम के समान है और इसे हेतु कोई भी कार्यक्रम फिजिकल रूप में करना उचित नहीं है।

Get out of the house wearing N95 mask

ऐसे में डॉ के के पांडे ने सीओपीडी के मरीजों से जागरूक रहने के लिए अनुरोध किया और कहा कि N95 मास्क पहन कर के ही घर से बाहर निकलें और अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें, जरूरत होने पर चिकित्सक की सलाह तुरंत लें।

डॉक्टर अर्जुन खन्ना ने कहा कि विगत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष पलमोनरी ओपीडी (Pulmonary OPD) में 30% मरीज बढ़े हैं और जो मरीज ठीक है उन्हें समस्या बढ़ गई है और उन्हें नेबुलाइजेशन से लेकर के अस्पताल में भर्ती तक की आवश्यकता पड़ रही है।

विश्व सीओपीडी दिवस पर संदेश (Message on World COPD Day)

डॉ अर्जुन खन्ना ने इस वर्ष सीओपीडी डे पर एक बहुत महत्वपूर्ण मैसेज दिया कि सीओपीडी के मरीजों को इन्हेलर लेने से इसलिए नहीं डरना चाहिए किस की आदत पड़ जाएगी।

सीओपीडी के लिए इनहेलर (inhaler for COPD)

उन्होंने कहा यह एक बहुत बड़ी सामाजिक भ्रांति है जिसमें मुख्यतः बच्चे अविवाहित महिलाएं और हाई प्रोफाइल के लोग इस भ्रांति में उलझ जाते हैं और ऐसे में इनहेलर का प्रयोग नहीं करते और उन्हें फेफड़ों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और रिकवरी होने में भी देर लगती है।

उन्होंने बताया कि इनहेलर सीधे फेफड़ों में जाते हैं और यह अधिक प्रभावकारी होते हैं, साथ ही में गोलियों के होने वाले दुष्प्रभाव से भी बचाते हैं।

प्रदूषण एवं सीओपीडी बीमारी के दुष्प्रभावों से बचने हेतु डॉक्टर की सलाह | क्या होती है सीओपीडी | What is COPD

डॉ अंकित सिन्हा ने कहा कि 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में फेफड़ों की लगातार समस्या बने रहने पर उसे सीओपीडी कहा जाता है और उन्होंने बढ़ते हुए प्रदूषण एवं सीओपीडी बीमारी के दुष्प्रभावों से बचने हेतु चार चीजों पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपना खानपान ठीक रखना चाहिए और प्रतिदिन स्वास्थ संबंधी व्यायाम करना चाहिए तथा ठंड शुरू होने से पहले हर साल फ्लू की वैक्सीन या टीका लगवाना चाहिए एवं हर 5 साल में निमोनिया वैक्सीन या निमोनिया का टीका लगवाना चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि कोई भी दिक्कत होने से घर पर उसका इलाज या दवा लेने से बचना चाहिए और उचित समय पर फेफड़ा रोग विशेषज्ञ को चिकित्सकीय परामर्श हेतु संपर्क करना चाहिए।

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