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वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक 2021 : उभरती ऊर्जा अर्थव्यवस्था 2050 तक नेट ज़ीरो के लिए नाकाफ़ी

World Energy Outlook 2021 shows a new energy economy is emerging – but not yet quickly enough to reach net zero by 2050

With emissions, climate disasters and energy market volatility all rising, governments need to send an unmistakeable signal of clean energy ambition and action at COP26 to accelerate the transition

नई दिल्ली, 13 अक्तूबर 2021 : जिस रफ्तार से सौर और पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन आदि अन्य कम कार्बन प्रौद्योगिकियां फल-फूल रही हैं, उसके मद्देनज़र यह साफ़ है कि दुनिया में एक नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था उभर रही है। लेकिन यह उभरती अर्थव्यवस्था नेट ज़ीरो के लक्ष्य हासिल करने के लिए काफ़ी नहीं।

यह संकेत मिलता है COP26 से पहले, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा आज जारी वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक से, जो स्पष्ट करता है कि वैश्विक उत्सर्जन को नेट ज़ीरो की ओर बढ़ते हुए उसमें निरंतर गिरावट लाने के लिए मौजूदा गति अभी भी बहुत कम है।

फ़िलहाल जब नीति निर्माता जलवायु परिवर्तन और अस्थिर ऊर्जा बाजारों दोनों के प्रभावों से जूझ रहे हैं, विश्व ऊर्जा आउटलुक 2021 (WEO-2021) को ग्लासगो में COP26 जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के लिए एक पुस्तिका के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाने के लिए।

पहली बार, WEO में एक ऐसा परिदृश्य शामिल है जो केंद्रीय परिदृश्य के रूप में 2050 तक नेट ज़ीरो ऊर्जा प्रणाली का मार्ग (Net Zero Emissions by 2050 Scenario) दिखाता है। यह एक वास्तविकता दिखाता है जिसमें :

·         2030 तक, रिन्यूएबल ऊर्जा में वार्षिक निवेश जीवाश्म ईंधन उत्पादन में निवेश (investing in fossil fuel production) को पार कर जाएगा : एक ही वर्ष में रिन्यूएबल ऊर्जा से बिजली उत्पादन के लिए $1.3 ट्रिलियन के निवेश का अनुमान है

·         LNG (एलएनजी) में निवेश एक सुरक्षित विकल्प नहीं है: कुल फंसी हुई पूंजी का अनुमान 75 अरब USD (अमेरिकी डॉलर) है; जिसका मतलब है कि वर्तमान में निर्माणाधीन LNG परियोजनाओं से जुड़े अधिकांश निवेशक अपनी निवेशित पूंजी की वसूली नहीं कर पाएंगे;

·         विश्व की 90% से अधिक आबादी दैनिक आधार पर प्रदूषित हवा में सांस लेती है, जिसके कारण IEA (आईईए) का अनुमान है कि एक वर्ष में 5 मिलियन से अधिक प्रीमैचोर (समय से पहले) मौतें होती हैं। नेट ज़ीरो परिदृश्य के तहत, इस संख्या को गंभीर रूप से कम किया जा सकता है: 2020 की तुलना में, 2030 तक प्रति वर्ष घरेलू वायु प्रदूषण से 1.9 मिलियन कम प्रीमैचोर मौतें होती हैं, जिसमें 95% से अधिक की कमी उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में होती है।

इस वर्ष का WEO एक एनर्जी प्राइस संकटकाल के बीच में आता है, जिसके कारणों को IEA द्वारा हाल ही में प्रकाशित एक ब्लॉग में स्पष्ट रूप से समझाया गया है।

IEA के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल (Fatih Birol, the IEA Executive Director) कहते हैं कि, “वैश्विक प्राकृतिक गैस की कीमतों में हालिया वृद्धि कई कारकों का परिणाम है, और क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन (स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण) को ज़िम्मेदार ठहराना गलत और भ्रामक है।”

वह आगे यह भी समझाते हैं कि,

“यह वृद्धि यूरोप में गैस, कोयले और कार्बन की कीमतों में महोर्मि से प्रेरित है।” और “अच्छी तरह से प्रबंधित स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण उन मुद्दों का समाधान है जो हम आज गैस और बिजली बाजारों में देख रहे हैं – उनका कारण नहीं।”

हाल के हफ्तों में गैस, कोयले और बिजली की कीमतें दशकों में अपने सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ये वृद्धि कारकों के संयोजन के कारण हुई है, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के द्वार पर ज़िम्मेदारी डालना ग़लत और भ्रामक है।

एंबर के ग्लोबल प्रोग्राम लीड डेव जोन्स ने कहा,

“IEA के वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक से पता चलता है कि 2030 के 1.5C के महत्वाकांक्षा के अंतर को पाटने के लिए बिजली क्षेत्र डीकार्बोनाइज़ेशन (electric field decarbonization) सबसे बड़ा एकल लीवर है। इस दशक में पवन और सौर परिनियोजन को देशों द्वारा पहले से घोषित किए गए से दुगुने होने की आवश्यकता है। इससे कोयले का उत्पादन इतना कम हो जाएगा कि 1.5 डिग्री (लक्ष्य) पहुंच के भीतर रह सके। 2030 के लिए आने वाली प्रतिबद्धताओं द्वारा COP26 परिभाषित होगा, इसलिए यह तथ्य कि वो बिजली क्षेत्र है जहां सबसे बड़ा अंतर है, का मतलब है कि 2030 के लिए COP प्रतिबद्धताओं को स्वच्छ बिजली विषय को संबोधित करने की आवश्यकता है। ”

रिपोर्ट स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में काम करने की तात्कालिकता को स्पष्ट करती है : “2030 महत्वाकांक्षा अंतर को पाटने के लिए बिजली क्षेत्र डीकार्बोनाइज़ेशन सबसे बड़ा एकल लीवर है”।

IEA का नंबर एक समाधान बिजली को साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर धक्का देना है, इस दशक में पहले से घोषित नीतियों के सापेक्ष दोगुनी सौर और पवन ऊर्जा की आवश्यकता (need for wind power) है। इस पवन और सौर ऊर्जा से कोयला उत्पादन कम होगा। IEA से पता चलता है कि मीथेन में कमी के साथ, कोयले को सौर और पवन से बदलना इस दशक में उपलब्ध सबसे बड़ी शून्य-लागत उत्सर्जन में गिरावट है।

पिछले साल कोविड -19 संकट के शुरुआती महीनों में वैश्विक ऊर्जा खपत (global energy consumption) में ऐतिहासिक गिरावट ने कई ईंधन की कीमतों को दशकों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया। लेकिन तब से, उन्होंने ज़ोरदार वापसी की है। प्राकृतिक गैस की कीमतों (natural gas prices) में सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई है, यूरोपीय और एशियाई बेंचमार्क क़ीमतों ने पिछले हफ्ते एक सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़ दिया – एक साल पहले के अपने स्तर से लगभग दस गुना।

US में प्राकृतिक गैस की कीमतें अक्टूबर 2020 से तीन गुना से अधिक हो गई हैं और 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

पांच गुना बढ़ गईं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कीमतें

अंतर्राष्ट्रीय कोयले की कीमतें एक साल पहले के अपने स्तर से लगभग पांच गुना हुई हैं, और चीन और भारत में, जो दुनिया के दो सबसे बड़े कोयला उपभोक्ता हैं, कोयला बिजली संयंत्रों के पास सर्दियों के मौसम से पहले बहुत कम स्टॉक है।

बिजली पैदा करने के लिए प्राकृतिक गैस के बजाय कोयले का उपयोग क्यों बढ़ रहा है? Why is there increasing use of coal instead of natural gas to generate electricity?

प्राकृतिक गैस की कीमतों में मज़बूत वृद्धि (Strong rise in natural gas prices) ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप और एशिया सहित प्रमुख बाजारों में बिजली पैदा करने के लिए प्राकृतिक गैस के बजाय कोयले के उपयोग पर पर्याप्त स्विचिंग को प्रेरित किया है। कोयले का बढ़ा हुआ उपयोग विश्व स्तर पर बिजली पीढ़ी से CO2 उत्सर्जन को बढ़ा रहा है।

ऑयल चेंज इंटरनेशनल की अनुसंधान सह-निदेशक केली ट्राउट ने कहा कि :

“हमने देखा है कि कुछ सरकारें और जीवाश्म ईंधन कंपनियां IEA  के 1.5°C परिदृश्य को ‘अवास्तविक’ के रूप में ख़ारिज कर देती हैं, लेकिन यह सोचने से बड़ा कोई भ्रम नहीं है कि हम अधिक से अधिक जीवाश्म ईंधन निकालकर जलवायु संकट को हल कर सकते हैं। जिन सरकारों ने अपने ऊर्जा निवेश को ठीक साबित करने के लिए अतीत में WEO का सहारा लिया है, अब IEA के मार्गदर्शन की अनदेखी करने में उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है, जब यह अंततः पेरिस में उनकी सहमती वाली 1.5 °C सीमा के अनुरूप है।

“विज्ञान की परवाह करने में सरकारें किस तरफ़ हैं इसका एक संकेत यह होगा कि तेल और गैस लाइसेंसिंग को समाप्त करने के लिए COP26 में बियॉन्ड ऑयल एंड गैस एलायंस को लॉन्च करने में डेनमार्क और कोस्टा रिका के साथ कौन शामिल होगा। हम इस पर भी नज़र रख रहें हैं कि जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्त को समाप्त करने और रिन्यूएबल ऊर्जा समाधानों में धन को स्थानांतरित करने के लिए संयुक्त रूप से प्रतिबद्ध होने में यूके और यूरोपीय निवेश बैंक के साथ कौन शामिल होता है।

“यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि IEA  के विश्लेषण में नए तेल और गैस क्षेत्रों के हित में कोई तर्गसंगतता नहीं पाई गई है, बावजूद इसके के इसमें कुछ जोखिम भरे मॉडलिंग विकल्प हैं जो प्रदूषण की मुलतवी करते हैं। पिछले महीने, 150 से अधिक नागरिक समाज समूहों ने IEA से अपने 1.5°C परिदृश्य में कार्बन कैप्चर और भंडारण, जीवाश्म गैस और बायोफ्यूल (जैवईंधन) पर अधिक निर्भरता को कम करने का अनुरोध किया, और हम स्वच्छ और न्यायपूर्ण ऊर्जा समाधानों को प्राथमिकता देने के लिए IEA पर ज़ोर डालना जारी रखेंगे।”

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