वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे : कोविड-19 से प्रभावित लोगों के उपचार और प्रबंधन में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका अहम

World Physiotherapy Day

8 सितम्बर विश्व में वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे के रूप में जाना जाता है

8 September is known as World Physiotherapy Day in the world.

COVID -19 से प्रभावित लोगों के उपचार और प्रबंधन में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका अहम : डॉ पी एन अरोड़ा

 Role of physiotherapists in treatment and management of people affected by COVID-19: Dr. PN Arora

गाजियाबाद, 08 सितंबर 2020. यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाज़ियाबाद (Yashoda Super Specialty Hospital, Kaushambi, Ghaziabad) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पी एन अरोड़ा ने बताया कि इस वर्ष के विश्व फिजियोथेरेपी दिवस (World Physiotherapy Day 2020) का फोकस COVID -19 के बाद रिहैबिलिटेशन (Rehabilitation after COVID-19) और COVID -19 से प्रभावित लोगों के उपचार और प्रबंधन में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाज़ियाबाद के फिजियोथिरेपी विभाग के प्रमुख डॉ मुबारक बताते हैं कि COVID-19 से किसी व्यक्ति की रिकवरी में व्यायाम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिजियोथैरेपी यानी शरीर की मांसपेशियों, जोड़ों, हडि्डयों-नसों के दर्द या तकलीफ वाले हिस्से की वैज्ञानिक तरीके से आधुनिक मशीनों, एक्सरसाइज, मोबिलाइजेशन, टेपिंग, के माध्यम से मरीज को आराम पहुंचाना। ऐसे में COVID बीमारी से ग्रस्त मरीजों को फिजियोथेरेपिस्ट मार्गदर्शन कर सकते हैं कि व्यायाम से रिकवरी में मदद कैसे मिल सकती है।

हॉस्पिटल के ही वरिष्ठ फिजियोथिरेपिस्ट डॉ आशीष जैन बताते हैं कि फिजियोथेरेपी में विशेषज्ञ कई तरह के व्यायाम और नई तकनीक वाली मशीनों की मदद से इलाज करते हैं। आज की जीवनशैली में हम लंबे समय तक अपनी शारीरिक प्रणालियों का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और जब शरीर की सहनशीलता नहीं रहती है तो वह तरह-तरह की बीमारियों व दर्द की चपेट में आ जाता है। फिजियोथैरेपी को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाकर दवाइयों पर निर्भरता कम करके स्वस्थ रह सकते हैं।

साथ ही उन्होंने बताया कि जो लोग COVID-19 के गंभीर मामले हैं, उन्हें बीमारी के इलाज के प्रभावों से उबरने के लिए रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होगी और ऐसे में लोगों को फिजियोथेरेपिस्ट से सहायता प्राप्त कर COVID-19 के प्रभाव का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है और वे शारीरिक कार्य को बेहतर बनाने के लिए एक पारंपरिक हेल्थकेयर विधियों के समान प्रभावी हो सकता है।

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