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हमारे लेखक/ स्तंभकार

  • अमलेन्दु उपाध्याय

    अमलेन्दु उपाध्याय, लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं। वे hastakshep.com के संस्थापक/ संपादक हैं।

  • अरुण माहेश्वरी

    अरुण माहेश्वरी, प्रसिद्ध वामपंथी चिंतक हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

  • डॉ. प्रेम सिंह

    डॉ. प्रेम सिंह, Dr. Prem Singh Dept. of Hindi University of Delhi Delhi – 110007 (INDIA) Former Fellow Indian Institute of Advanced Study, Shimla India Former Visiting Professor Center of Oriental Studies Vilnius University Lithuania Former Visiting Professor Center of Eastern Languages and Cultures Dept. of Indology Sofia University Sofia Bulgaria

  • जगदीश्वर चतुर्वेदी

    जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

  • Kavita Arora

    डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

     
  • ललित सुरजन

    ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं. वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं. ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सद्भाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है. यह आलेख देशबन्धु से साभार लिया गया है।

  • L S Hardenia

    एल.एस. हरदेनिया, (लेखक वरिष्ठ पत्रकार व धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हैं)

  • प्रो. शम्सुल इस्लाम दिल्ली विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राद्यापक हैं। निशांत नाट्य मंच से जुड़े हैं।
  • Palash Biswas

    पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के लोकप्रिय ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए “जनसत्ता” कोलकाता से अवकाशप्राप्त। पलाश जी हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

  • राजेंद्र शर्मा

    राजेंद्र शर्मा, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं। वह लोकलहर के संपादक हैं।

  • रणधीर सिंह सुमन

    रणधीर सिंह सुमन, लेखक जाने-माने मानवाधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता हैं। वह हस्तक्षेप.कॉम के एसोसिएट एडिटर हैं।

  • राम पुनियानी

    Ram Puniyani was a professor in biomedical engineering at the Indian Institute of Technology Bombay, and took voluntary retirement in December 2004 to work full time for communal harmony in India. He is involved with human rights activities from last two decades.He is associated with various secular and democratic initiatives like All India Secular Forum, Center for Study of Society and Secularism and ANHAD. He is Our esteemed columnist

  • शेष नारायण सिंह

    शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह हस्तक्षेप के संरक्षक हैं। वह इतिहास के वैज्ञानिक विश्लेषण के एक्सपर्ट हैं। नये पत्रकार उन्हें पढ़ते हुये बहुत कुछ सीख सकते हैं।

  • Subhash Gatade

    Subhash Gatade ( born 1957) is a left activist, writer and translator. He has done M Tech ( Mech Engg 1981) from BHU-IT, Varanasi. He has authored few books including Modinama : On Caste, Cows and the Manusmriti ( Leftword, in press), Charvak ke Vaaris ( Authors Pride, Hindi, 2018), Ambedkar ani Rashtriya Swayamsevak Sangh ( Sugava, Marathi, 2016), Beesavi Sadi Mein Ambedkar ka Sawal ( Dakhal, Hindi, 2014), Godse ki Aulad ( Pharos, Urdu, 2013) , Godse’s Children – Hindutva Terror in India (Pharos, 2011), The Saffron Condition ( Three Essays, 2011) He also occasionally writes for children. Pahad Se Uncha Aadmi ( NCERT, Hindi, 2010)

  • राजीव रंजन श्रीवास्तव

    राजीव रंजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं। वह “देशबन्धु” समाचार पत्र के समूह संपादक हैं।

 

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    एडवरटोरियल/ अतिथि पोस्ट. इस कैटेगरी में गेस्ट पोस्ट्स, एडवरटोरियल, प्रायोजित लेख (sponsored articles) हैं, जो आपके काम के हो सकते हैं, लेकिन “हस्तक्षेप” इस कैटेगरी के लेखों में दी गई सूचना की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है, अपने विवेक का इस्तेमाल करें।
  • देशबन्धु

    Deshbandhu is a newspaper with a 60 years standing, but it is much more than that. We take pride in defining Deshbandhu as ‘Patr Nahin Mitr’ meaning ‘Not only a journal but a friend too’. Deshbandhu was launched in April 1959 from Raipur, now capital of Chhattisgarh, by veteran journalist the late Mayaram Surjan. It has traversed a long journey since then. In its golden jubilee year in 2008, Deshbandhu started its National Edition from New Delhi, thus, becoming the first newspaper in central India to achieve this feet. Today Deshbandhu is published from 8 Centres namely Raipur, Bilaspur, Bhopal, Jabalpur, Sagar, Satna and New Delhi.
  • राजेंद्र शर्मा

    राजेंद्र शर्मा, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं। वह लोकलहर के संपादक हैं।