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स्तनपान शिशु के लिए अमृत के समान होता है, यह शिशु का मौलिक अधिकार भी है

 Breastfeeding is like Amrit for the baby, it is also a fundamental right of the baby.

नवजात शिशु स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया

Yashoda Super Specialty Hospital celebrates World Breastfeeding Week to promote Newborn Breastfeeding

विश्व स्तनपान सप्ताह 2021 की थीम-‘स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारी’ | The theme of World Breastfeeding Week 2021 is “Protect Breastfeeding: A Shared Responsibility”

गाजियाबाद, 07 अगस्त 2021. स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया गया इस साल इस सप्ताह की थीम-‘स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारी’ तय की गयी है ।

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अस्पताल के हेड मार्केटिंग एंड कॉरपोरेट रिलेशंस गौरव पांडे ने जानकारी देते दुए बताया कि 1 अगस्त से प्रारम्भ हुए विश्व स्तनपान सप्ताह को 7  अगस्त तक मनाया जायेगा। इस दौरान हॉस्पिटल में विभ्भिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। प्रसवोपरांत कम से कम 6  महीने के लिए माताओं को स्तनपान के लिए प्रेरित एवं जागरूक किया जा रहा है। नवजात स्वास्थ्य में स्तनपान की भूमिका (Role of Breastfeeding in Neonatal Health) पर एक कार्यशाला का भी आयोजन फेसबुक लाइव के माध्यम से 6  अगस्त को दोपहर 2 बजे किया गया, जिसमें यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत कुमार एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दीपिका रस्तोगी ने भाग लिया।

दूसरी तरफ गर्भाधारण की हुई महिलाओं में भी प्रसव से पूर्व ही स्तनपान के महत्व की जागरूकता की गयी। हॉस्पिटल के नर्सिंग विभाग द्वारा लेफ्ट कर्नल (रिo) श्रीमती राधा राणा के नेतृत्व में एक चित्र प्रदर्शनी एवं पोस्टर कम्पटीशन का भी आयोजन किया गया। स्लोगन के माध्यम से भी स्तनपान के महत्व की जागरूकता की गयी।        

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10 Important Facts on Breastfeedingकामकाजी महिलाओं को कृत्रिम आहार एवं बोतल से दूध पिलाने के खतरे के बारे में अवगत कराते हुए डॉक्टरों ने बताया कि कृत्रिम आहार एवं बोतल के दूध में पोषक तत्वों का अभाव होता है और यह सुपाच्य नहीं होता। इससे कुपोषण एवं संक्रमण के खतरे, दस्त, सांस के और अन्य संक्रमण के खतरे, बौद्धिक विकास में कमी की सम्भावना और बचपन में मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है, अतः इसे जितना हो सके प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। 

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डॉ दीपिका ने बताया कि कामकाजी महिलाएं ब्रेस्ट पंप का प्रयोग कर अपना दूध निकल कर बच्चे को पिलाने के लिए घर में रख सकती हैं जो कही ज्यादा कारगर और उपयोगी है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी के वरिष्ठ नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत कुमार का कहना है कि शिशु के लिए स्तनपान अमृत के समान होता है। यह शिशु का मौलिक अधिकार भी हैमाँ का दूध शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बहुत ही जरूरी है। यह शिशु को निमोनिया, डायरिया और कुपोषण के जोखिम से भी बचाता है। इसलिए बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाना चाहिए। यह दूध बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है, इसीलिए इसे बच्चे का पहला टीका भी कहा जाता है। स्तनपान करने वाले शिशु को ऊपर से कोई भी पेय पदार्थ या आहार नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी की ही नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ दीपिका रस्तोगी (Neonatologist Dr Deepika Rastogi) ने इस अवसर पर बताया कि मां के दूध में शिशु के लिए पौष्टिक तत्वों के साथ पर्याप्त पानी भी होता है। इसलिए छह माह तक शिशु को माँ के दूध के अलावा कुछ भी न दें। यहाँ तक कि गर्मियों में पानी भी न पिलायें । ध्यान रहे कि रात में माँ का दूध अधिक बनता है, इसलिए मां रात में अधिक से अधिक स्तनपान कराये।

उन्होंने बताया कि दूध का बहाव अधिक रखने के लिए जरूरी है कि माँ चिंता और तनाव से मुक्त रहे। कामकाजी महिलाएं अपने स्तन से दूध निकालकर रखें। यह सामान्य तापमान पर आठ घंटे तक पीने योग्य रहता है। इसे शिशु को कटोरी या कप से पिलायें। स्तनपान शिशु को बीमारियों से बचाता है, इसीलिए यदि मां या शिशु बीमार हों तब भी स्तनपान कराएँ।

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डॉ दीपिका का कहना है कि कोविड उपचाराधीन और संभावित माँ को भी सारे प्रोटोकाल का पालन करते हुए स्तनपान कराना जरूरी है। वह स्तनपान से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ़ कर लें और नाक व मुंह को मास्क से अच्छी तरह से ढककर ही दूध पिलायें। बच्चे को ऐसे में स्तनपान से वंचित करने से उसका पूरा जीवन चक्र प्रभावित हो सकता है।

कोरोना काल में और कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर में माताओं का स्वयं एवं शिशु को कोरोना से बचाने विषय पर भी चर्चा हुई

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डॉ अजीत कुमार ने बताया कि कोरोना का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ने की चर्चा के बीच यह भी जानना जरूरी है कि जो माताएं बच्चे को सही समय पर और सही तरीके से भरपूर स्तनपान कराती हैं, उन्हें बच्चे को लेकर बहुत चिंता करने की जरूरत नहीं होती है। मां के दूध की अहमियत सर्वविदित है, यह बच्चे को रोगों से लड़ने की ताकत प्रदान करने के साथ ही उसे आयुष्मान भी बनाता है। कोरोना ही नहीं बल्कि कई अन्य संक्रामक बीमारियों से मां का दूध बच्चे को पूरी तरह से महफूज बनाता है। इसलिए स्तनपान के फायदे को जानना हर महिला के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके प्रति जागरूकता के लिए ही हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए ही इस साल इस सप्ताह की थीम- ‘स्तनपान सुरक्षा की जिम्मेदारी, साझा जिम्मेदारी’ तय की गयी है।

डॉ दीपिका ने कहा कि यदि केवल स्तनपान कर रहा शिशु 24 घंटे में छह से आठ बार पेशाब करता है, स्तनपान के बाद कम से कम दो घंटे की नींद ले रहा है और उसका वजन हर माह करीब 500 ग्राम बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि शिशु को मां का पूरा दूध मिल रहा है।

स्तनपान के फायदे बताते हुए डॉक्टरों ने बताया कि स्तनपान शिशु के लिए सर्वोत्तम पोषक तत्व पूर्ण आहार होता है और ये सर्वोच्च मानसिक विकास में सहायक होता है, साथ ही यह संक्रमण से सुरक्षा (दस्त-निमोनिया), दमा एवं एलर्जी से सुरक्षा, शिशु के ठंडा होने से बचाव, प्रौढ़ एवं वृद्ध होने पर उम्र के साथ होने वाली बीमारियों से सुरक्षा भी प्रदान करता है।

क्या कहते हैं आंकड़े

जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान कराने से नवजात मृत्यु दर में 33 फीसद तक कमी लायी जा सकती है (PLOS One Journal की Breastfeeding Metanalysis Report-2017) ।

इसके अलावा छ्ह माह तक शिशु को स्तनपान कराने से दस्त रोग और निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है (Lancet Study-Maternal And Child Nutrition Series 2008 के अनुसार) ।

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-16) के अनुसार प्रदेश में एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर 25.2 फीसद और छह माह तक केवल स्तनपान की दर 41.6 फीसद है।

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