गाजियाबाद में पत्रकार जोशी व लखनऊ में आत्मदाह करने वाली महिला की मौत के लिए योगी सरकार जिम्मेदार : माले

CPI ML

योगी सरकार ने सत्ता में रहने का हक खो दिया है, सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी भी इसका गवाह

Yogi government responsible for journalist Joshi in Ghaziabad and death of self-immolating woman in Lucknow: Male

लखनऊ, 22 जुलाई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) की राज्य इकाई ने गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी व लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने वाली दो महिलाओं (मां-बेटी) में से एक (मां) की बुधवार को मौत हो जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने इन दोनों मौतों के लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आज जारी बयान में कहा कि ये मौतें मुख्यमंत्री योगी की शासन-व्यवस्था की घोर विफलता व प्रदेश में जंगल राज का प्रमाण हैं। सुप्रीम कोर्ट की विकास दुबे मामले में योगी सरकार में ‘सिस्टम फेल्योर’ (व्यवस्था की विफलता) की ताजा टिप्पणी भी इसका एक अन्य प्रमाण है। ऐसे में इस सरकार ने सत्ता में बने रहने का अधिकार ही खो दिया है।

माले नेता ने कहा कि गाजियाबाद में पत्रकार जोशी ने भतीजी से छेड़छाड़ करने वाले गुंडों के खिलाफ थाने में तहरीर दी थी। इस पर पुलिस ने न तो कार्रवाई की, न ही कोई गिरफ्तारी की। नतीजतन गुंडों का हौसला बढ़ा और उन्होंने शिकायतकर्ता जोशी को बीच सड़क पर गोली मार दी। दो दिन बाद बुधवार को उनकी मौत हो गई। योगी की पुलिस यदि जोशी की शिकायत पर कुंडली मार के न बैठी होती और उनकी भतीजी का यौन उत्पीड़न करने वाले बदमाशों को छुट्टा न छोड़ती, तो पत्रकार की जान बच जाती।

राज्य सचिव ने कहा कि लखनऊ में आत्मदाह से पहले अमेठी की पीड़ित महिलाओं ने भूमि विवाद में स्थानीय पुलिस में शिकायत की थी। पुलिस इस शिकायत पर बैठी रही। उधर इससे बौखलाए दबंगों ने न सिर्फ घर में घुसकर महिलाओं की पिटाई की, बल्कि छेड़छाड़ भी की। इस पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। महिलाएं फरियाद लेकर प्रशासन के अधिकारियों के पास गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अन्ततः उन्हें मुख्यमंत्री की डेहरी पर आकर आत्मदाह करने जैसा कदम उठाना पड़ा।

माले नेता ने कहा कि पूरे प्रदेश में महिलाओं पर हिंसा और हमले की घटनाएं बड़े पैमाने पर हो रही हैं, लेकिन पुलिस या तो रिपोर्ट नहीं दर्ज करती, या रिपोर्ट दर्ज करने के बाद कार्रवाई नहीं करती, जिससे अपराधियों की हौसला अफजाई होती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह मिर्जापुर में दलित सामाजिक पृष्ठभूमि की महिला नेता जीरा भारती पर जानलेवा यौन हमला करने वाले अपराधी एफआईआर दर्ज होने के तीन हफ्तों बाद भी गिरफ्तार नहीं किये गए हैं। इन तीन हफ्तों में पुलिस ने लिखापढ़ी के नाम पर सिर्फ लीपापोती की, पीड़िता को न्याय दिलाना तो दूर की बात है। ये दबंग हमलावर किसी और बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं।

माले राज्य सचिव ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुधारने का वादा कर ही योगीजी सत्ता में आये थे। लेकिन प्रदेश के हालात दिखाते हैं कि यहां कानून का राज पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अपराधी, दबंग व माफिया ताकतें सत्ता का संरक्षण पाकर और बेखौफ होकर महिलाओं, दलितों व कमजोर वर्गों पर अत्याचार कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को कानपुर के विकास दुबे मामले में योगी सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रासुका समेत 65-65 मुकदमों के आरोपी का जेल की सलाखों के पीछे होने के बजाय बाहर होना ‘सिस्टम फेल्योर’ का परिणाम है और इसमें शासन-व्यवस्था की मिलीभगत का संदेह है, जिसकी जांच होनी चाहिए। माले नेता ने कहा ऐसे में इस सरकार ने सत्ता में रहने का औचित्य खो दिया है।

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