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Ajit Yadav, अजीत सिंह यादव

यूपी के 16 लाख शिक्षकों कर्मचारियों के डीए रोकने के योगी सरकार के फैसले का 1 जुलाई को होगा राज्यव्यापी विरोध

मंहगाई भत्ता रोक कर नहीं, पूंजीघरानों पर टैक्स लगाकर संसाधन जुटाए सरकार –अजीत यादव

बदायूँ, 30 जून, कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों के महंगाई भत्ते व मंहगाई राहत को फ्रीज करने के योगी सरकार के शासनादेश का 1 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में विरोध होगा। योगी सरकार से 24 अप्रैल के कर्मचारी शिक्षक विरोधी शासनादेश को वापस लेने की मांग की जाएगी। लोक मोर्चा की अपील पर विभिन्न जनपदों से शिक्षक, कर्मचारी और पेंशनर प्रधानमंत्री व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ई मेल के माध्यम से ज्ञापन भेजेंगें।

आज जारी बयान में उक्त जानकारी देते हुए लोक मोर्चा के संयोजक अजीत सिंह यादव ने कहा कि कोरोना संकट से उत्पन्न आर्थिक हालात का मुकाबला करने को सरकार कर्मचारियों के महंगाई भत्ता को रोक कर नहीं बल्कि पूँजीघरानों पर टैक्स लगाकर संसाधन जुटाए। उन्होंने योगी सरकार के मंहगाई भत्ता और राहत को रोकने के फैसले को शिक्षकों कर्मचारियों और पेंशनरों पर बहुत बड़ा हमला बताया।

उन्होंने बताया कि लोक मोर्चा के प्रवक्ता व शिक्षक कर्मचारी नेता अनिल कुमार ने महंगाई भत्ता व राहत को फ्रीज करने के योगी सरकार के शासनादेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसको लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है,अगली सुनवाई 16 जुलाई को है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महंगाई भत्ता और महंगाई राहत को फ्रीज करने का शासनादेश असंवैधानिक और गैर कानूनी है और पूरी उम्मीद है कि सरकार का यह शासनादेश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किया जाएगा। बेहतर होगा कि उच्च न्यायालय इसको रद्द करे उससे पहले ही प्रदेश सरकार इस कर्मचारी विरोधी शासनादेश को रद्द कर दे।

1 जुलाई को लोक मोर्चा ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों से अनुरोध किया है कि वो महंगाई भत्ते के शासनादेश को रद्द करने को आवाज उठाएं और मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को ईमेल के माध्यम से ज्ञापन भेजें। इसके साथ ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से सभी कर्मचारी, शिक्षक व पेंशनर शासनादेश को वापस लेने की अपील करती पट्टिकाओं के साथ अपना फोटो अपलोड करें। यह अभियान कल पूरे दिन चलेगा।

उन्होंने सभी कर्मचारी शिक्षक संगठनों, ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संघों, महासंघों से अपील की है कि वे कोरोना काल में सरकार द्वारा कर्मचारियों शिक्षकों और पेंशनरों पर किये गए इस हमले का विरोध करें और 1 जुलाई को विरोध में अपनी स्वतंत्र सांगठनिक पहचान के साथ शामिल हों।इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से भी अनुरोध किया है कि वे शिक्षकों कर्मचारियों के पक्ष में खड़े हों।

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