Home » समाचार » देश » Corona virus In India » यूपी पंचायत चुनाव के दौरान 1600 शिक्षकों की मौत को योगी सरकार ने नकारा, मानी सिर्फ 3 मौत, प्रियंका ने कोसा
Yogi Adityanath Priyanka Gandhi

यूपी पंचायत चुनाव के दौरान 1600 शिक्षकों की मौत को योगी सरकार ने नकारा, मानी सिर्फ 3 मौत, प्रियंका ने कोसा

राज्य में पंचायत चुनाव के दौरान सिर्फ 3 सरकारी शिक्षकों की मौत : यूपी सरकार

Yogi govt says only 3 teachers died on poll duty

लखनऊ, 19 मई 2021.  उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि राज्य में हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के दौरान केवल तीन सरकारी शिक्षकों ने कोविड-19 के कारण दम तोड़ा। यह विभिन्न प्रमुख शिक्षक निकायों द्वारा किए गए दावों के विपरीत है कि ड्यूटी के दौरान संक्रमण के कारण कम से कम 1,600 कर्मचारियों की मौत हो गई।

बेसिक शिक्षा विभाग ने कहा कि इसकी संख्या राज्य भर के जिलाधिकारियों द्वारा अब तक प्रस्तुत की गई रिपोर्ट्स पर आधारित है।

सरकार की अमानवीयता पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है –

“पंचायत चुनाव में ड्यूटी करते हुए मारे गए 1621 शिक्षकों की उप्र शिक्षक संघ द्वारा जारी लिस्ट को संवेदनहीन यूपी सरकार झूठ कहकर मृत शिक्षकों की संख्या मात्र 3 बता रही है।

शिक्षकों को जीते जी उचित सुरक्षा उपकरण और इलाज नहीं मिला और अब मृत्यु के बाद सरकार उनका सम्मान भी छीन रही है।”

उधर मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अवर सचिव सत्य प्रकाश ने कहा, कि विभाग ने तीन शिक्षकों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उनके परिजनों को अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रमुख दिनेश चंद्र शर्मा ने सरकार के दावे का खंडन करते हुए कहा,

”सरकारी स्कूल के कर्मचारियों के प्रति बुनियादी शिक्षा विभाग का ऐसा उदासीन रवैया देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

विभाग ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, एक सरकारी अधिकारी को उस समय से चुनाव ड्यूटी पर माना जाता है, जब कर्मचारी चुनाव संबंधी प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए अपना आवास छोड़ता है, जिसमें मतदान और मतगणना का समय शामिल होता है। जब वह घर पहुंचता है तो ड्यूटी समाप्त होती है।

पंचायती राज के अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा

” भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, यदि 10 अप्रैल को मतदान होना है, तो शिक्षकों की ड्यूटी 9 अप्रैल से शुरु होकर 11 अप्रैल तक होती है।”

उन्होंने समझाया

”यदि इन तीन दिनों के दौरान कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसे मतदान ड्यूटी पर मृत्यु माना जाएगा। लेकिन यदि शिक्षक ने 10 अप्रैल को चुनाव ड्यूटी की, 20 अप्रैल को सकारात्मक परीक्षण किया और 24 अप्रैल को मृत्यु हो गई, तो इसे ड्यूटी के दौरान मृत्यु नहीं माना जाएगा।”

चुनाव ड्यूटी पर सरकारी शिक्षकों की मौत के मामले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 12 मई को उठाया था और न्यायाधीशों ने राज्य सरकार को सुझाव दिया था कि शिक्षकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।

हालांकि, बुनियादी शिक्षा विभाग ने कहा कि मुआवजे का भुगतान राज्य चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें

 

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

entertainment

कोरोना ने बड़े पर्दे को किया किक आउट, ओटीटी की बल्ले-बल्ले

Corona kicked out the big screen, OTT benefited सिनेमाघर बनाम ओटीटी प्लेटफॉर्म : क्या बड़े …

Leave a Reply