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आलेख रूपी मोतियों से सजी पुस्तक ‘दो टूक’
आलेख रूपी मोतियों से सजी पुस्तक ‘दो टूक’

पर्यावरणीय समस्या को लेकर इस पुस्तक के पहले ही निबंध ‘विकराल होती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या’ में न केवल इस गंभीर समस्या पर प्रकाश डाला गया है

एजेंसी
2018-06-15 23:19:16
सम्पूर्ण राष्ट्र की गंवई राजनीति में फैली अराजकता का एक नग्न दस्तावेज़ है मदारीपुर जंक्शन
सम्पूर्ण राष्ट्र की गंवई राजनीति में फैली अराजकता का एक नग्न दस्तावेज़ है 'मदारीपुर जंक्शन'

मदारीपुर-जंक्शन नामक एक गाँव है जिसमें एक ओर यदि मदारीमिज़ाज चरित्रों का बोलबाला है तो दूसरी ओर यह समस्त विद्रूपताओं का सम्मिलन-स्थल भी है।

अतिथि लेखक
2018-05-28 20:35:32
विश्व को चौंकाने वाली गोलियों के पीछे  रूस का इंक़लाब और भारत का आज़ादी का संघर्ष
विश्व को चौंकाने वाली गोलियों के पीछे : रूस का इंक़लाब और भारत का आज़ादी का संघर्ष

विश्व को चौंकाने वाली गोलियों के पीछे : रूस का इंक़लाब और भारत का आज़ादी का संघर्ष

हस्तक्षेप डेस्क
2018-05-09 10:53:32
दामोदर खड़से के उपन्‍यास ‘खिड़कियाँ’ का लोकार्पण
दामोदर खड़से के उपन्‍यास ‘खिड़कियाँ’ का लोकार्पण

हिंदी विश्‍वविद्यालय में आवासीय लेखक रहे हिंदी एवं मराठी के सुप्रसिद्ध लेखक डॉ. दामोदर खड़से के उपन्‍यास ‘खिड़कियाँ’ का लोकार्पण प्रधानमंत्री कार...

हस्तक्षेप डेस्क
2018-05-08 16:08:43
तुमने विषपान किया है  कविता मेरा आत्म-संवाद है
तुमने विषपान किया है : कविता मेरा आत्म-संवाद है

कवि के सामने हर क्षण अकेले होते जा रहे व्यक्ति को भयमुक्त और अँधेरे से दूर करने की चिंता है तो चुनौती भी, लेकिन राह के रूप में उसके पास कोई प्यार...

अतिथि लेखक
2018-04-28 22:14:44
महिषासुर से संबंधित मिथक व परंपराओं पर शोधग्रंथ
महिषासुर से संबंधित मिथक व परंपराओं पर शोधग्रंथ

मिथकों को गैर ऐतिहासिक कहकर कर टाल देने की परम्परा अब लद चुकी है। दलित-बहुजन समाज इतिहास में अपनी उपस्थिति के प्रति पहले की तुलना मे अब काफी सजग ...

अतिथि लेखक
2018-04-25 12:51:58
सुभाष चन्द्र कुशवाहा की पुस्तक ‘अवध का किसान विद्रोह’ यानी गांधीवाद की एक और शव परीक्षा
सुभाष चन्द्र कुशवाहा की पुस्तक ‘अवध का किसान विद्रोह’ यानी गांधीवाद की एक और शव परीक्षा !

गाँधी तो महात्मा बन गए लेकिन जिन लोगों ने ज़मींदारों के सामंतवादी और जातिवादी  शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की उनके इतिहास को शोध और शब्दों की बा...

Vidya Bhushan Rawat
2018-03-26 12:04:47
जिनकी सामाजिक न्याय और बदलाव में गहन निष्ठा है के लिए एक जरूरी पुस्तक
जिनकी सामाजिक न्याय और बदलाव में गहन निष्ठा है, के लिए एक जरूरी पुस्तक

सवित्रीबाई फुले रचना समग्र की संपादक रजनी तिलक हैं. अनुवादक शेखर पवार हैं. किताब की कीमत 160 रुपए है. प्रकाशक है, मार्जिनलाइज्ड पब्लिकेशंस.

Vidya Bhushan Rawat
2018-03-12 11:31:04
‘यह मुखबिरो का लहू नही है’  आजादी की लड़ाई में मुसलमानों का शानदार इतिहास रहा है
‘यह मुखबिरो का लहू नही है’ : आजादी की लड़ाई में मुसलमानों का शानदार इतिहास रहा है

जंगे आजादी में मुसलमानो की कुर्बानियों का सिलसिला 1912 से प्रारम्भ हो जाता है। देवबन्द के उलेमा देश को आजाद कराने के लिये भारी संख्या मे उलेमा अफ...

हस्तक्षेप डेस्क
2018-02-26 22:52:33
वह औरत नहीं महानद थी  गहन जीवन राग की कविताएं
वह औरत नहीं महानद थी : गहन जीवन राग की कविताएं

संग्रह की कविताओं में आज के जीवन, समाज और राजनीति का जटिल, बहुस्तरीय यथार्थ सामने आया है

अतिथि लेखक
2018-02-06 23:20:26