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व्यावहारिक निर्देशिका पटकथा लेखन  एक जरूरी किताब
व्यावहारिक निर्देशिका पटकथा लेखन : एक जरूरी किताब

'जिसने लाहौर नहीं वेख्या वो जनम्या ही नहीं' जैसे विख्यात नाटक के रचनाकार असग़र वजाहत की 'व्यवहारिक निर्देशिका पटकथा लेखन' नये और उभरते हुए पटकथा ...

अतिथि लेखक
2017-09-20 22:50:14
समाज का प्रकृति एजेण्डा जगाती एक पुस्तक
हरियाणा के जन्म की कहानी आला हाकिम की ज़ुबानी
हरियाणा के जन्म की कहानी, आला हाकिम की ज़ुबानी

हरियाणा के विकास में तीन लालों का बहुत अहम योगदान है। देवी लाल, बंसी लाल और भजन लाल ने हरियाण को जो स्वरूप दिया, उसी से हरियाणा की पहचान बनी है।

शेष नारायण सिंह
2017-09-03 21:39:26
स्त्री-संघर्ष का नया सौन्दर्यशास्त्र रचती कविताएँ
स्त्री-संघर्ष का नया सौन्दर्यशास्त्र रचती कविताएँ

सरला जी की कविताओं में कुंठित और निराश औरतें नहीं हैं, ये एक खास बात है। संघर्षशीलता कुंठा को खत्म करती है।

अतिथि लेखक
2017-08-22 16:56:29
समकालीन यथार्थ का मंज़र उपस्थित करती ग़ज़लें                                                                                     
समकालीन यथार्थ का मंज़र उपस्थित करती ग़ज़लें                                                                                     

कौन कहता है कि वो फंदा लगा करके मरा इस व्यवस्था को वो आईना दिखा करके मरा सुना है आद़मी की बादलों पर भी हुक़ूमत है मग़र गर्मी में गोरैया कहीं पा...

अतिथि लेखक
2017-07-17 12:41:59
कविताओं में लोक की गाथा - जनपद झूठ नहीं बोलता
कविताओं में लोक की गाथा - जनपद झूठ नहीं बोलता

जहां आदिवासी है, वहां शोषण जरूर होगा। वहां वे कॉरपोरेट भी होंगे जो संसाधनों के दोहन के लिए तत्पर होंगे

अतिथि लेखक
2017-07-13 10:19:03
तद्भव का नया अंक  इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया
तद्भव का नया अंक : इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया

आने वाली पीढ़ी हमारे वर्तमान युग को मध्ययुग कहे या न कहे, कोई मायने नहीं रखता। लेकिन यह तय है कि हम अपने वर्तमान को जिस रूप में देखते है, आगत पीढ़ि...

अतिथि लेखक
2017-07-02 00:26:10
नए दौर के आंदोलनों में मार्क्‍सवाद के अवशेषों की तलाश
नए दौर के आंदोलनों में मार्क्‍सवाद के अवशेषों की तलाश

एक मार्क्‍सवादी का काम उदारवाद से हासिल उपलब्धियों का इस्‍तेमाल करते हुए सैद्धांतिकी को व्‍यवहार में उतारना है, नकि दुश्‍मन का दुश्‍मन दोस्‍त वाल...

अभिषेक श्रीवास्तव
2017-06-30 14:53:05
ब्राह्मणवाद की वजह से हिंदू संस्‍कृति राष्‍ट्रविरोधी है हिंदू राष्‍ट्रवाद या हिंदुत्‍व का हिंदू धर्म से कोई लेना-देना नहीं- स्‍वामी धर्म तीर्थ
ब्राह्मणवाद की वजह से हिंदू संस्‍कृति राष्‍ट्रविरोधी है, हिंदू राष्‍ट्रवाद या हिंदुत्‍व का हिंदू धर्म से कोई लेना-देना नहीं- स्‍वामी धर्म तीर्थ

ब्राह्मणवाद हिंदुओं के पतन का जिम्‍मेदार है। हिंदू राष्‍ट्रवाद या हिंदुत्‍व का हिंदू धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। आरएसएस असल में हिंदू विरोधी ...

अभिषेक श्रीवास्तव
2017-06-22 18:22:24
कालजयी रचना  विभाजन की त्रासदी का सच है ‘तमस’
कालजयी रचना : विभाजन की त्रासदी का सच है ‘तमस’

इस उपन्यास में आजादी के ठीक पहले साम्प्रदायिकता के चरम उभार और दंगों का ऐसा चित्रण किया गया है कि वह पाठकों की आत्मा को झकझोर डालता है।

अतिथि लेखक
2017-06-07 15:23:59
औरतखोर  आनंद कुरेशी का स्वाभिमान राजहंस की तरह गर्दन उठाए रहता है
'औरतखोर' : आनंद कुरेशी का स्वाभिमान राजहंस की तरह गर्दन उठाए रहता है

ऐसी दोस्तियाँ और साहित्यिक अड्डेबाजी बची रहनी चाहिए ताकि आनंद कुरेशी जैसे कई लेखक इस शहर को पहचान दिलाएं.

हस्तक्षेप डेस्क
2017-06-04 20:25:39
वहाँ पानी नहीं है  दर्द को जुबान देती कविताएँ
वहाँ पानी नहीं है : दर्द को जुबान देती कविताएँ

दिविक रमेश कविताओं में जिस तरह शब्दों को बरतते हैं, उससे एक सांगीतिक रचना भी होती है।

हस्तक्षेप डेस्क
2017-05-26 16:09:07
वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती है
वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती है

हमारी दुनिया में इतने रंग और जटिलताएं हैं कि उन्हें समेटना हो तो कविता करने से सरल कोई तरीका नहीं हो सकता...जो समय की जटिलता को समेटती है वो कवित...

अतिथि लेखक
2017-05-12 18:24:23
दंगे होते नहीं करवाये जाते हैं  कंधमाल का सच और न्याय प्रक्रिया की हताशा
दंगे होते नहीं करवाये जाते हैं : कंधमाल का सच और न्याय प्रक्रिया की हताशा

न्याय प्रक्रिया गरीब के साथ में दिखाई नहीं देती और अदालतों में वकीलों के चक्कर काटना उनके लिए उत्पीड़न की एक नयी श्रंखला है, जिससे बच पाना बहुत म...

Vidya Bhushan Rawat
2017-03-31 13:14:42
ब्राह्मणवाद के विरुद्ध एक सांस्कृतिक विद्रोह- दुर्गा-महिषासुर के मिथक का एक पुनर्पाठ
ब्राह्मणवाद के विरुद्ध एक सांस्कृतिक विद्रोह- दुर्गा-महिषासुर के मिथक का एक पुनर्पाठ

एक मशहूर अफ्रीकन कहावत है, “जब तक शेरों के अपने इतिहासकार नहीं होंगे, इतिहास शिकारी का ही महिमामंडन करता रहेगा.”

अतिथि लेखक
2017-06-18 19:06:44
वेश्या एविलन रो का उपाख्यान  ब्रेख़्त की कविताएँ
वेश्या एविलन रो का उपाख्यान : ब्रेख़्त की कविताएँ

ब्रेख़्त की कविताओं में ‘लोरियाँ’ हैं, ‘क्रान्ति के अनजान सिपाही की समाधि का पत्थर’ है तो ‘देशवासियों’ से ‘जनता की रोटी’ का सवाल भी है।

अतिथि लेखक
2017-06-12 23:04:53