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नागरनामा पर बिपिन तिवारी का दिलचस्प आलेख
नागरनामा पर बिपिन तिवारी का दिलचस्प आलेख

बिपिन तिवारी जोशीले जवान लेखकों से दूर अध्ययन के आधार पर जो मूल्य पेश कर रहे हैं वह सराहने योग्य भी है और सीखने योग्य भी.

अतिथि लेखक
2018-04-14 23:21:15
जो नाटक नहीं लिख सकता वह कवि नहीं है - राजेश जोशी
जो नाटक नहीं लिख सकता वह कवि नहीं है - राजेश जोशी

कोई कविता चमत्कार से नहीं बनती। वह तभी सफल हो सकती है जब उसका सामान्यीकरण हो।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-04-04 13:53:42
कवि केदारनाथ सिंह  विजातीय द्रव्यों से लड़ती हुई कविता हर्फ-हर्फ जहरीले विकारों का कीमियागार
कवि केदारनाथ सिंह : विजातीय द्रव्यों से लड़ती हुई कविता, हर्फ-हर्फ, जहरीले विकारों का कीमियागार

कविता की अमूर्त कला की कारीगरी में फकीरी रूमानी जिन्दादिली का कारीगर होने का जो साहस और पीड़ा है वही केदार के भीतर ‘प्रकृति को शक्ति के साथ’  लाकर...

अतिथि लेखक
2018-03-21 19:04:12
साहित्य में स्वतंत्रता के मुजाहिदीन  आज का समय और साहित्य
साहित्य में स्वतंत्रता के मुजाहिदीन : आज का समय और साहित्य

साहित्य जिंदा रहता है प्रतिवाद में, विद्रोह में, वर्जना-रहित प्रेम में, मनुष्य की अबाध स्वतंत्रता में। साहित्यकार की स्वतंत्रता पर किसी भी किस्म ...

अरुण माहेश्वरी
2018-03-19 00:03:37
‘मैला आंचल’ के महान कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु की पत्नी ने क्यों कहा था “चाहूँगी कि मेरे घर में और कभी कोई लेखक पैदा न हो”
‘मैला आंचल’ के महान कथा शिल्पी फणीश्वर नाथ रेणु की पत्नी ने क्यों कहा था “चाहूँगी कि मेरे घर में और कभी कोई लेखक पैदा न हो”

ग्रेबियल मारक्वेज ने अपनी पुस्तक ‘हन्ड्रेड इयर्स ऑफ सालिच्यूड’ जिसकी प्रतियों की बिक्री ने रिकार्ड तोड़ दिया, कहा था कि यह पुस्तक बहुत अच्छी हुई ह...

अतिथि लेखक
2018-03-04 12:15:41
‘मैं उर्वशी को शोषित नारी के रूप में देखता हूं’ - दूघनाथ सिंह
‘मैं उर्वशी को शोषित नारी के रूप में देखता हूं’ - दूघनाथ सिंह

कवि-कथाकार दूघनाथ सिंह से 27 साल पहले शम्सुल इस्लाम की बातचीत

शम्सुल इस्लाम
2018-01-16 21:40:18
नामदेव ढसाल  महाराष्ट्र सहित देश की राजनीति को बदल कर रख देने वाला एक कवि
नामदेव ढसाल : महाराष्ट्र सहित देश की राजनीति को बदल कर रख देने वाला एक कवि

खुद ढसाल ने लिखा है कि अगर कविता मुझे नहीं खींचती तो मैं टॉप लेवल का गैंगस्टर या स्मगलर होता या फिर किसी चकला घर का मालिक. किन्तु उनके अन्दर का क...

अतिथि लेखक
2018-01-15 23:26:16
लफ्ज़ों की दरगाह में  सुरजीत पातर
लफ्ज़ों की दरगाह में : सुरजीत पातर

सुरजीत पातर की कविता में व्यथा तो है, पर उससे उबरने की ताकत भी वहां मिलती है। पातर की कविताओं, गीतों और ग़ज़लों में ज़िन्दगी का बहुत ही करीब से स...

अतिथि लेखक
2018-01-14 20:14:44
गोपालदास नीरज – हिन्दी के लोकप्रिय गीतकवि
गोपालदास नीरज – हिन्दी के लोकप्रिय गीतकवि

उसकी हर बात पर हो जाती हैं पागल कलियां जाने क्या बात है नीरज के गुनगुनाने में

वीरेन्द्र जैन
2018-01-09 21:51:46
साहित्य पुरस्कारों का ऐलान नए कार्यक्रमों में गांवों में आयोजित होंगे ड्रामा-आलोक
साहित्य पुरस्कारों का ऐलान, नए कार्यक्रमों में गांवों में आयोजित होंगे ड्रामा-आलोक

अकादमी साल भर में 102 पुरस्कार देती है और अब नए अध्यक्ष का चयन भी शुरू हो चुका है।

देशबन्धु
2017-12-22 13:12:29
त्रिलोचन का मूल्यांकन अभी होना है अभी तो उन्हें ठीक से पढ़ा भी नहीं गया है
त्रिलोचन का मूल्यांकन अभी होना है, अभी तो उन्हें ठीक से पढ़ा भी नहीं गया है

त्रिलोचन का जन बावजूद प्रहारों के जीवन का हिमायती, रोजमर्रा की जिंदगी को जीता हुआ, जो नहीं है, उसके लिए तैयारी करता हुआ जनपदीय जन है, जबकि नागार्...

अतिथि लेखक
2017-12-09 21:33:30
जब कुंवरनारायण ने पूछा था उदय प्रकाश के साथ वही तो नहीं किया जा रहा है जो मोहन दास के साथ हुआ
जब कुंवरनारायण ने पूछा था उदय प्रकाश के साथ वही तो नहीं किया जा रहा है, जो मोहन दास के साथ हुआ

उनके विचार और चिंतन. कहीं कोई जड़ता और अतीतोन्मुख मतान्धता नहीं. आधुनिकता , तर्कशीलता और उदार प्रगतिकामी विचारों को वे निरंतर अपने समय-समय पर लिखे...

अतिथि लेखक
2017-11-16 10:11:55
मुक्तिबोध के बहाने नामवर सिंह पर बहस
मुक्तिबोध के बहाने नामवर सिंह पर बहस

अस्‍मि‍ता वि‍मर्श मूलत: पूंजीवादी वि‍मर्श है। क्‍या अस्‍मि‍ता वि‍मर्श अस्‍मि‍ता, जा‍ति, धर्म, भाषा, नस्‍ल, गोत्र, वर्ग आदि‍ के आधार पर तय होगा या...

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2017-11-15 22:21:17
मुक्तिबोध की यह स्पष्ट मान्यता है कि अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे उठाने ही होंगे
मुक्तिबोध की यह स्पष्ट मान्यता है कि अब अभिव्यक्ति के सारे खतरे उठाने ही होंगे

मुक्तिबोध लेखक के लिए जनतंत्र की तलाश करने वाले लेखक हैं। वे जानते हैं कि लेखक की स्वतंत्रता को खत्म करने से समाज की कितनी हानी होगी। असल में यह ...

अतिथि लेखक
2017-11-13 21:23:38
‘ये सफ़र था कि मुक़ाम था’ के बहाने राजेन्द्र यादव पर एक चर्चा
‘ये सफ़र था कि मुक़ाम था’ के बहाने राजेन्द्र यादव पर एक चर्चा

जनवाद के नाम पर गलत प्रवृत्तियों को आगे बढ़ाने वाले और सुविधाभोग व आडम्बर से भरा जीवन जीने वाले राजेन्द्र यादव को लोग साहित्य के अंडरवर्ल्ड का डॉ...

अतिथि लेखक
2017-11-07 10:16:29