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तेरी गल्ल्याँ  मैं चीजों को ही खुदा समझता रहा
'तेरी गल्ल्याँ' : मैं चीजों को ही खुदा समझता रहा

नाटक एकदम समाज के उस वर्ग को अभियुक्त बना देता है जो अपने बच्चों पर धन दौलत उपहारों को लुटाकर अपनी जिम्मेदारियों की इतिश्री समझ लेता है.

शमशाद इलाही शम्स
2018-08-20 22:07:47
नायपॉल नहीं रहे विद्वेषी चुप हो गया
नायपॉल नहीं रहे, विद्वेषी चुप हो गया

नायपॉल का कहना था, आप अपनी आत्म-जीवनी में झूठ बोल सकते हैं, लेकिन उपन्यास में नहीं। वहां झूठ की जगह नहीं होती। वह लेखक को पूरी तरह से खोल देता है।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-08-14 08:51:48
विश्वनाथ तिवारी  सत्ता की पीड़ा बनाम लेखक का सुख
विश्वनाथ तिवारी : सत्ता की पीड़ा बनाम लेखक का सुख

तिवारीजी का लेखकीय आचरण लेखकों की हत्या के प्रसंग में शून्य है। सवाल यह है विश्वनाथ तिवारी नामक लेखक इस विरोध में सबसे पहले शामिल क्यों नहीं हुआ ॽ

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2018-08-09 19:54:23
सेवासदन में भारतीय विवाह संस्था का क्रिटिक -  गरिमा श्रीवास्तव
सेवासदन में भारतीय विवाह संस्था का क्रिटिक -  गरिमा श्रीवास्तव

सेवासदन में भारतीय विवाह संस्था का क्रिटिक -  गरिमा श्रीवास्तव

हस्तक्षेप डेस्क
2018-08-01 12:41:51
गुरु पूर्णिमा  गुरुवर नामवर सिंह और ‘आलोचना का कब्रिस्तान’
गुरु पूर्णिमा : गुरुवर नामवर सिंह और ‘आलोचना का कब्रिस्तान’

डा. रामविलास शर्मा तो बहुत पहले ही द्वंद्वात्मक विचार की राह को छोड़ अतीत की आधिभौतिक साधना की ओर रुख कर चुके थे, नामवर जी ने अभिनंदन-मंचों की शो...

अरुण माहेश्वरी
2018-07-27 12:31:56
प्रेमचंद किसान को सुखी देखना स्त्री की मुक्ति और दलितों के लिए सामाजिक न्याय चाहते थे
प्रेमचंद किसान को सुखी देखना, स्त्री की मुक्ति और दलितों के लिए सामाजिक न्याय चाहते थे

युवा लेखक अपनी हताशा को भी देख रहे हैं और अंधेरे समय को भी। उन्हें पता है, क्रांति यकायक नहीं आयेगी। जहां आज के साहित्य में प्रयोग की निजता पर...

अतिथि लेखक
2018-07-25 18:55:57
चालीस साला औरतें  इस तरह ढह जाता है एक देश
चालीस साला औरतें : इस तरह ढह जाता है एक देश

कविताओं ने हमेशा ही फासीवाद के खिलाफ लड़ाई की है । कविताओं ने हमेशा ही समाज को सही राह दिखाने का काम किया गया है और हमेशा ही फासिज्म के विरुद्ध हथ...

अतिथि लेखक
2018-07-25 12:49:19
राजनीति ने जिस प्रकार से धर्म को इस्तेमाल किया है उससे साम्प्रदायिकता बढ़ी
राजनीति ने जिस प्रकार से धर्म को इस्तेमाल किया है उससे साम्प्रदायिकता बढ़ी

शिक्षा और जागरूकता के प्रति देश के नेताओं को जो चिन्ता होनी चाहिये थी वो रही नहीं। क्योंकि उन्हें धर्मांधता को फैलाना ही हितकर लगा।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-07-19 09:24:41
इप्टा  एक जनपक्षीय सांस्कृतिक आंदोलन के 75 साल होमी जहांगीर भाभा ने किया था नामकरण
इप्टा : एक जनपक्षीय सांस्कृतिक आंदोलन के 75 साल, होमी जहांगीर भाभा ने किया था नामकरण

भारतीय जन नाट्य संघ अपने संघर्षशील कलात्मक सफर के 75 वर्ष पूरे कर चुका है

शम्सुल इस्लाम
2018-06-18 18:11:26
लेखक-कवि की माली हालत हमेशा ही बहुत खराब रही पर प्रकाशक मालामाल होते रहे
लेखक-कवि की माली हालत हमेशा ही बहुत खराब रही, पर प्रकाशक मालामाल होते रहे

अंग्रेजी में लिखने वाला मालामाल है जबकि अंग्रेजी पाठक कितने हैं पता लगाना चाहिए। अंग्रेजी का बाज़ार इतना मुनाफ़े वाला कैसे है? अंग्रेजी में दो कौ...

अतिथि लेखक
2018-06-04 11:05:35
अफसर साहित्यकार  साहित्य में करप्शन का गोमुख
अफसर साहित्यकार : साहित्य में करप्शन का गोमुख

अशोक बाजपेयी को अफसर साहित्यकार परंपरा को स्थापित करने का श्रेय जाता है.... साहित्य-नागरिक की प्रतिवादी भूमिका आदि को विकृत करने में अफसर साहित्...

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2018-05-25 23:34:09
अच्छे दिन  जिस फैज़ को भारत का एजेंट होने के आरोप में जेल हुई हमने उसकी बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया
अच्छे दिन : जिस फैज़ को भारत का एजेंट होने के आरोप में जेल हुई, हमने उसकी बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया

सारी दुनिया जब मदर्स डे मनाया रही थी तब हमने अपनी एक बेटी को बेइज्जत कर के बाहर कर दिया और अपनी पीठ ठोंक रहे हैं कि 72 साल की यह 'लड़की' हमारी दुश...

चंचल
2018-05-14 14:24:36
युद्ध की विभीषिका है "अंधा युग"
युद्ध की विभीषिका है "अंधा युग"

आज युद्ध आमने-सामने तीर तलवार से नहीं हो रहे हैं। आज इंसान खुद अपने आपको जला रहा हैं ईर्ष्या और जलन की आग में,

अतिथि लेखक
2018-05-14 12:33:08
नामवर सिंह हिंदी के नेल्सन मंडेला हैं जानिए कैसे
नामवर सिंह हिंदी के नेल्सन मंडेला हैं, जानिए कैसे

मार्क्सवाद मुक्ति का विज्ञान है और इसका बुनियादी लक्ष्य है 'वर्चस्व' और 'शोषण' के सभी रूपों का खात्मा करना।

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2018-05-07 17:59:36
नागरनामा पर बिपिन तिवारी का दिलचस्प आलेख
नागरनामा पर बिपिन तिवारी का दिलचस्प आलेख

बिपिन तिवारी जोशीले जवान लेखकों से दूर अध्ययन के आधार पर जो मूल्य पेश कर रहे हैं वह सराहने योग्य भी है और सीखने योग्य भी.

अतिथि लेखक
2018-04-14 23:21:15
जो नाटक नहीं लिख सकता वह कवि नहीं है - राजेश जोशी
जो नाटक नहीं लिख सकता वह कवि नहीं है - राजेश जोशी

कोई कविता चमत्कार से नहीं बनती। वह तभी सफल हो सकती है जब उसका सामान्यीकरण हो।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-04-04 13:53:42
कवि केदारनाथ सिंह  विजातीय द्रव्यों से लड़ती हुई कविता हर्फ-हर्फ जहरीले विकारों का कीमियागार
कवि केदारनाथ सिंह : विजातीय द्रव्यों से लड़ती हुई कविता, हर्फ-हर्फ, जहरीले विकारों का कीमियागार

कविता की अमूर्त कला की कारीगरी में फकीरी रूमानी जिन्दादिली का कारीगर होने का जो साहस और पीड़ा है वही केदार के भीतर ‘प्रकृति को शक्ति के साथ’  लाकर...

अतिथि लेखक
2018-03-21 19:04:12
साहित्य में स्वतंत्रता के मुजाहिदीन  आज का समय और साहित्य
साहित्य में स्वतंत्रता के मुजाहिदीन : आज का समय और साहित्य

साहित्य जिंदा रहता है प्रतिवाद में, विद्रोह में, वर्जना-रहित प्रेम में, मनुष्य की अबाध स्वतंत्रता में। साहित्यकार की स्वतंत्रता पर किसी भी किस्म ...

अरुण माहेश्वरी
2018-03-19 00:03:37