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मैथिलीशरण के काव्‍य में स्‍वतंत्रता की चेतना – प्रो गिरीश्‍वर मिश्र
मैथिलीशरण के काव्‍य में स्‍वतंत्रता की चेतना – प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र

मैथिलीशरण गुप्‍त ने देश की स्‍वतंत्रता के लिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए कविता के माध्‍यम से बड़ा योगदान दिया। उनकी कविताओं ने स्‍वतंत्रता की ...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-08-06 19:55:25
सबसे बड़ा सच  मीडिया तो झूठन है दिलों और दिमाग को बिगाड़ने में साहित्य और कला माध्यम निर्णायक वहां भी संघ परिवार का वर्चस्व
सबसे बड़ा सच : मीडिया तो झूठन है, दिलों और दिमाग को बिगाड़ने में साहित्य और कला माध्यम निर्णायक, वहां भी संघ परिवार का वर्चस्व

अभी तो ताराशंकर और बंकिम की चर्चा की है, आगे मौका पड़ा तो बाकी महामहिमों के सच की चीरफाड़ और उससे कहीं ज्यादा समकालीनों के मौकापरस्त सुविधावादी स...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-07-21 00:46:59
एक बोचड़ की दूकान में काम करने वाला “छोकरा” जिसने इलाचन्द जोशी और सुमित्रानन्दन पन्त को टक्कर दी
एक बोचड़ की दूकान में काम करने वाला “छोकरा” जिसने इलाचन्द जोशी और सुमित्रानन्दन पन्त को टक्कर दी

शैलेश मटियानी और उनके कृतित्व को समझने के लिए हमारे हिसाब से हिंदी और भारतीय साहित्य के हर पाठक को ताराचंद्र त्रिपाठी का यह आलेख अवश्य पढ़ना चाहिए।

पलाश विश्वास
2017-07-14 12:57:21
कविताओं में लोक की गाथा - जनपद झूठ नहीं बोलता
कविताओं में लोक की गाथा - जनपद झूठ नहीं बोलता

जहां आदिवासी है, वहां शोषण जरूर होगा। वहां वे कॉरपोरेट भी होंगे जो संसाधनों के दोहन के लिए तत्पर होंगे

अतिथि लेखक
2017-07-13 10:19:03
तद्भव का नया अंक  इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया
तद्भव का नया अंक : इतिहास के त्रिभागी काल विभाजन पर हरबंस मुखिया

आने वाली पीढ़ी हमारे वर्तमान युग को मध्ययुग कहे या न कहे, कोई मायने नहीं रखता। लेकिन यह तय है कि हम अपने वर्तमान को जिस रूप में देखते है, आगत पीढ़ि...

अतिथि लेखक
2017-07-02 00:26:10
मुनि जिनविजय यूरोपीय समझ के समानांतर भारतीय ज्ञान और परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठित करते हैं
मुनि जिनविजय यूरोपीय समझ के समानांतर भारतीय ज्ञान और परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठित करते हैं

हिंदी का आधुनिक साहित्य परम्परा से नहीं जुड़ता। हमारी स्मृति और संस्कार में हमारा जातीय साहित्य नहीं है।

हस्तक्षेप डेस्क
2017-06-18 23:32:41
किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दिखता नहीं
किसानों के पक्ष का कोई समकालीन भारतीय साहित्य दिखता नहीं

सिर्फ महाजन, सूदखोर और दूसरे सामाजिक तत्व ही नहीं, भारतीय बैंकिग प्रणाली भी इस महाजनी सभ्यता के नये अवतार हैं।

पलाश विश्वास
2017-06-13 14:59:05
कालजयी रचना  विभाजन की त्रासदी का सच है ‘तमस’
कालजयी रचना : विभाजन की त्रासदी का सच है ‘तमस’

इस उपन्यास में आजादी के ठीक पहले साम्प्रदायिकता के चरम उभार और दंगों का ऐसा चित्रण किया गया है कि वह पाठकों की आत्मा को झकझोर डालता है।

अतिथि लेखक
2017-06-07 15:23:59
नक्सलबाड़ी और हिंदी साहित्य
नक्सलबाड़ी और हिंदी साहित्य

नक्सलबाड़ी से उठी ज्वाला की लपटें जैसे-जैसे फैलती गई, अन्य भाषाओं के साहित्य में भी उसकी आहटें सुनाई देने लगी और हिंदी साहित्य इससे अछूता कैसे रह...

अतिथि लेखक
2017-05-09 17:08:11
दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी की परम्परा को बुन्देली में आगे बढाया महेश कटारे ‘सुगम’ ने
दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी की परम्परा को बुन्देली में आगे बढाया महेश कटारे ‘सुगम’ ने

महेश कटारे सुगम की पहचान इससे ही है कि उन्होंने इस दौर की सबसे लोकप्रिय विधा गज़ल के माध्यम से टकसाली बुन्देली में ऐसी रचनाएं दी हैं जो अपने समय क...

वीरेन्द्र जैन
2017-04-23 23:03:19
सीखें जानें जुड़ें जोड़ें और निडरता से खड़े हों लेखक - विनीत तिवारी
सीखें, जानें, जुड़ें, जोड़ें और निडरता से खड़े हों लेखक - विनीत तिवारी

यात्रा का उद्देश्य लेखकों की शहादत के प्रति अपना सम्मान प्रकट करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर करना एवं शहीद लेखकों...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-03-15 22:53:20
समझ और सरोकार कविता का हासिल
समझ और सरोकार कविता का हासिल

एक कवि के लिए यह आवश्यक है कि वह वैज्ञानिक चेतना से पूरी तरह लैस हो। क्योंकि अगर कवि अपने आसपास की घटनाओं को वैज्ञानिकता की कसौटी पर नहीं कसता, उ...

हस्तक्षेप डेस्क
2017-03-02 17:34:52
चर्चा में ‘समाज का आज’
चर्चा में ‘समाज का आज’

इन लेखों में कोई भी पीड़ा सघन रूप से अभिव्यक्त नहीं हो पाई है, उसकी सूचना मात्र है. फिर भी, किताब की पठनीयता की उन्होंने उन्मुक्त सराहना की.

हस्तक्षेप डेस्क
2017-02-19 22:53:51