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हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह ने अपने होने का हक़ अदा किया
हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह ने अपने होने का हक़ अदा किया

Namwar Singh has significant contribution in the field of shuklottar criticism. हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह ने अपने होने का हक़ अदा किया

डॉ. प्रेम सिंह
2019-02-20 22:53:10
साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन  बमबाजी में फँसा आदमी अपने असबाबों का प्रयोग कैसे करेगा इसे कोई पहले से तय नहीं कर सकता
साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन : बमबाजी में फँसा आदमी अपने असबाबों का प्रयोग कैसे करेगा, इसे कोई पहले से तय नहीं कर सकता

देखते-देखते कितना कुछ बदलता चला गया है। देखते-देखते हिन्दुत्ववादी सांप्रदायिक विचार मंच के केंद्र में आ गये हैं। लेकिन सवाल है कि हिंदी के प्रगति...

अरुण माहेश्वरी
2019-02-17 23:01:16
सुनो केवल नेहरू को कोसने से कोई महान नहीं बनता
सुनो केवल नेहरू को कोसने से कोई महान नहीं बनता

नेहरु का साहित्य के प्रति अनुराग ही था जो उन्होंने 1954 में साहित्य अकादमी और 1957 में नेशनल बुक ट्रस्ट जैसी संस्थाओं की स्थापना कर दी थी, केवल छ...

अतिथि लेखक
2019-02-10 21:13:20
एक आसन्न गिरफ़्तारी देश के ज़मीर पर शूल की तरह चुभती दिख रही है
एक आसन्न गिरफ़्तारी देश के ज़मीर पर शूल की तरह चुभती दिख रही है

देश के कई लेखक संगठन सुप्रसिद्ध अंबेडकरवादी दलित चिंतक व लेखक प्रोफेसर आनन्द तेलतुम्बड़े के समर्थन में आगे आए हैं और इन संगठनों ने केंद्र सरकार, म...

हस्तक्षेप डेस्क
2019-01-30 11:11:32
अलविदा भरत आचार्य
अलविदा भरत आचार्य!

भरत एक परम्परागत गुजराती बिज़नेस परिवार से आते थे, लेकिन एक ऐसा समाज जहाँ इंसान-इंसान का शोषण न करे, बनाने का जज़्बा उनमें किसी से कम नहीं था। उन्ह...

शम्सुल इस्लाम
2019-01-27 13:55:38
नेताओं की भाषा के गिरते स्तर पर चिंतित हुए गुलजार युवा पीढ़ी को बिगाड़ सकती है आज की राजनीतिक बातचीत
नेताओं की भाषा के गिरते स्तर पर चिंतित हुए गुलजार, युवा पीढ़ी को बिगाड़ सकती है आज की राजनीतिक बातचीत

गुलज़ार ने नेताओं से सोच-समझकर बोलने का आग्रह किया, क्योंकि उनके द्वारा कही गई बात देश भर की जनता और खासकर युवाओं तक पहुंचती है, जो आजकल राजनीति ...

एजेंसी
2019-01-25 22:29:46
कृष्णा सोबती — हिंदी की बातूनी दादी नहीं रहीं
कृष्णा सोबती — हिंदी की बातूनी दादी नहीं रहीं

कृष्णा सोबती की उपस्थिति ही हिंदी साहित्य को पोंगापंथ, हर प्रकार की जड़ता, पिछड़ेपन और सामाजिक भेद-भाव के खिलाफ मनुष्य के अबाध स्वातंत्र्य के क्ष...

अरुण माहेश्वरी
2019-01-25 16:39:52
साहित्यिक शो में होंगी जलवायु परिवर्तन पर बातें
साहित्यिक शो में होंगी जलवायु परिवर्तन पर बातें

'क्लाइमेट चेंज : ए कॉल टू एक्शन' नामक सत्र में ऑस्ट्रेलिया के विद्वान डेरिल जोन्स, नॉर्वे की लेखिका माजा लुंडे और मृदुला रमेश के साथ पर्यावरण के ...

एजेंसी
2019-01-24 00:04:23
इतिहासकार रामचंद्र गुहा की दो टूक - गांधी के बाद नेहरू पटेल ने मिलकर भारत का निर्माण किया
इतिहासकार रामचंद्र गुहा की दो टूक - गांधी के बाद नेहरू, पटेल ने मिलकर भारत का निर्माण किया

गांधी के निधन के बाद पटेल और नेहरू ने अपने मतभेदों को दरकिनार कर दिया और भारत को एकजुट बनाए रखा। उन्होंने आधुनिक भारत की बुनियाद रखी। पटेल के निध...

एजेंसी
2019-01-20 18:36:58
कैफी आज़मी ने हर स्तर पर अन्याय का विरोध किया  जावेद अख्तर
कहानी को अस्मिता की राजनीति से सबसे पहले मोहन राकेश ने जोड़ा
कहानी को अस्मिता की राजनीति से सबसे पहले मोहन राकेश ने जोड़ा

उनके विचारों में अनेक ऐसी बातें हैं जो हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं। कहानी को अस्मिता की राजनीति (politics of identity) से सबसे पहले मोहन राकेश ...

जगदीश्वर चतुर्वेदी
2019-01-07 12:25:23
पुस्तक व्यवसाय में कहाँ खड़े हैं  दलित  
पुस्तक व्यवसाय में कहाँ खड़े हैं : दलित ! 

दलित प्रकाशक विश्व पुस्तक मेले जैसे आयोजनों में अपनी पर्याप्त उपस्थिति तब तक दर्ज नहीं सकते,जब तक उनके लिए मुख्यधारा की पुस्तक सप्लाई के बंद दरवा...

अतिथि लेखक
2019-01-06 18:16:59
इतने बदनाम हुये हम तो इस जमाने में  तुमको लग जायेंगीं सदियां हमें भुलाने में
इतने बदनाम हुये हम तो इस जमाने में / तुमको लग जायेंगीं सदियां हमें भुलाने में

नीरज जी के जन्मदिन पर याद करते हुए किसी की आँख खुल गयी किसी को नींद आ गयी

वीरेन्द्र जैन
2019-01-03 23:01:07
उसे बीच सड़क मार डाला गया क्योंकि वह दबे-कुचले लोगों की आवाज बन गया था
उसे बीच सड़क मार डाला गया, क्योंकि वह दबे-कुचले लोगों की आवाज बन गया था

किसी भी दौर में सफदर हाशमी होना आसान नहीं है। सफदर के जनाजे में 15,000 से ज्यादा लोग जुटे थे

एजेंसी
2019-01-02 17:40:22
स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर  हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश
स्मृतिलोप से हट कर यथार्थ की ओर : हिंदी समाज में हीरा डोम की तलाश

वर्ष 2014 में हिन्दी की प्रथम दलित कविता कही जानेवालीे कविता ‘अछूत की शिकायत’ के सौ साल पूरे हुए। महावीर प्रसाद द्विवेदी द्वारा सम्पादित ‘सरस्वती...

सुभाष गाताडे
2019-01-01 18:18:37
राहुल जी के जीवन का अंतिम पड़ाव था मार्क्सवाद
राहुल जी के जीवन का अंतिम पड़ाव था मार्क्सवाद

कम्युनिस्ट होने के नाते राहुल सांस्कृत्यायन ने स्वतंत्रता आंदोलन में ४० के दशक में क्या भूमिका निभाई जो आज़ादी की लड़ाई का बहुत ही उथल पुथल वाला दौ...

अतिथि लेखक
2018-12-31 21:53:21
पंकज सिंह  विसंगतियों से भरा एक सार्थक जीवन
पंकज सिंह : विसंगतियों से भरा एक सार्थक जीवन

यह कविता नहीं है यह गोली दागने की समझ है जो तमाम कलम चलाने वालों को तमाम हल चलाने वालों से मिल रही है’

अतिथि लेखक
2018-12-24 19:24:20
सर्व भाषा ट्रस्ट के प्रथम वार्षिकोत्सव में सम्मानित हुए साहित्यकार
सर्व भाषा ट्रस्ट के प्रथम वार्षिकोत्सव में सम्मानित हुए साहित्यकार

विशिष्ट अतिथिगणों डॉ. वेदप्रकाश पाण्डेय, अशोक श्रीवास्तव, सुनील सिन्हा, राजेश भंडारी 'बाबु' आदि को 'गेस्ट ऑफ ऑनर' दिया गया।

हस्तक्षेप डेस्क
2018-12-22 22:49:14