शब्द > कविता
दो फुटपाथिया आँखें
दो ...फुटपाथिया आँखें....

मगर वो कुछ नहीं कहती ..... यह भी नहीं .. कि इक झूठी सी उम्मीद ही पकड़ा दे .. बस फिरा कर हाथ उलझे-उलझे चीकट से बालों में... थमा देती ह...

अतिथि लेखक
2018-12-19 00:06:03
एय मेरी तुलू ए नूर  तू बढ़ और छा जा अबद की काली रवायतों पर
एय मेरी तुलू ए नूर .. तू बढ़ और छा जा अबद की काली रवायतों पर ..

एय मेरी तुलू ए नूर .. तू बढ़ और छा जा अबद की काली रवायतों पर .. कर शुरूआत नयी .. लिक्ख उजाले  अपनी लकीरों में .. तू ख़ुशियों का अर्क पी ..

अतिथि लेखक
2018-09-24 20:25:36
मैं भी नक्सल तू भी नक्सल
मैं भी नक्सल तू भी नक्सल

दवा मंगाओ तो भी नक्सल लिंचिंग का विरोध भी नक्सल बच्चों की ऑक्सीजन नक्सल माँऔं की चीज़ें भी नक्सल ख्वाबों की लाश भी नक्सल

अतिथि लेखक
2018-09-01 19:06:02
यह खुद बेहद डरे हुए हैं इस नंगी औरत से
यह खुद बेहद डरे हुए हैं ....इस नंगी औरत से ....

कौन है ..? किसकी क्या लगती है ? कुछ भी तो नहीं पता ...बद़जात का ... एैसी वैसी ही है  ...यह औरत ... शायद औरत भी नहीं है ... यह तो महज़...

अतिथि लेखक
2018-08-25 18:40:02