शब्द > कविता
मैं "राजधर्म" में नहीं-नहीं मैं "लोकधर्म" में जिंदा हूँ - अटल बिहारी वाजपेयी ने मृत्यु-उपरांत लिखी कविता
तुम मनाओ 15अगस्त मैं अफ़सोस मनाऊँगी  इस देश में पैदा होने का अफ़सोस
तुम मनाओ 15अगस्त..../ मैं अफ़सोस मनाऊँगी..../  इस देश में पैदा होने का अफ़सोस.....

हाँ हमने मान लिया.... हम रिश्ते नहीं..महज़..जिस्म हैं... जिस्म.... बग़ैर फ़र्क़ कि उम्र क्या है... 5..7..12...14...सब चलती हैं......,

अतिथि लेखक
2018-08-14 21:48:46
संवेदनाओं का कब्रिस्तान बन गई है हमारी बुतपरस्त-मुर्दा परस्त अंतरात्मा
संवेदनाओं का कब्रिस्तान बन गई है हमारी बुतपरस्त-मुर्दा परस्त अंतरात्मा

सम्मानित नरभक्षी पशुओं को जो जंगल में नहीं शहर के संभ्रांत बस्तियों में रहते हैं

ईश मिश्र
2018-08-06 09:51:51
मन की व्यथा कहने पर कुचलने वाले लोग
मन की व्यथा कहने पर, कुचलने वाले लोग

स्वर्णिम युग के सपने में, सोते हुए ये लोग, स्वयं के पैर पर खुशी से कुल्हाड़ी मारते लोग।

अतिथि लेखक
2018-08-05 17:41:48
चालीस साला औरतें  इस तरह ढह जाता है एक देश
चालीस साला औरतें : इस तरह ढह जाता है एक देश

कविताओं ने हमेशा ही फासीवाद के खिलाफ लड़ाई की है । कविताओं ने हमेशा ही समाज को सही राह दिखाने का काम किया गया है और हमेशा ही फासिज्म के विरुद्ध हथ...

अतिथि लेखक
2018-07-25 12:49:19
मॉब लिंचिंग  शहर का कानून अँधा है खुल कर शिकार करें
मॉब लिंचिंग : शहर का कानून अँधा है खुल कर शिकार करें

रेल में,जेल में करें कट्टे लाठी से करें पीट पीट कर करें जैसा जी चाहे करें शहर का कानून अँधा है खुल कर शिकार करें

जसबीर चावला
2018-07-24 10:02:02
हैं  साहेब बड़े अज़ीज़ सारे ही महफ़िलों में पर सबके सामने झूठ  बोलना आसाँ नहीं होगा 
हैं  ''साहेब'' बड़े अज़ीज़ सारे ही महफ़िलों में/ पर सबके सामने झूठ  बोलना आसाँ नहीं होगा 

जो चुनरी थी अब तक, चिंगारी बन चुकी है यहाँ  बच्चियों पे अब और ज़ुल्म ढाना आसाँ नहीं होगा 

अतिथि लेखक
2018-07-23 22:31:50
यूँ तो मुझे 
खुद छूना था उसे 
छू भी लेती 
पर क्या करूँ
कैसे बेख़ौफ़ शनि मंगल के उतारों को पचा गया वो भूख का शिकार बच्चा मेरे टोटके भी खा गया
कैसे बेख़ौफ़ ..शनि मंगल के उतारों को पचा गया/ वो भूख का शिकार बच्चा ..मेरे टोटके भी खा गया...

कैसे बेख़ौफ़ ..शनि मंगल के उतारों को पचा गया/ वो भूख का शिकार बच्चा ..मेरे टोटके भी खा गया...

अतिथि लेखक
2018-07-10 23:13:36
यह आसिफा का बदला था  अब तुम लो मंदसौर का बदला औरतें चिथड़ रही हैं और दुनिया में फिर शर्म से तार-तार है तिरंगा
..यह आसिफा का बदला था ? अब तुम लो मंदसौर का बदला... औरतें चिथड़ रही हैं ..और दुनिया में फिर शर्म से तार-तार है तिरंगा

पूरा यक़ीन ..हर बार की तरह ...तुम ...फिर से दबा ही दोगे ..यह रेप वाली बात ...मुद्दा गरम होगा  ...किस धर्म के लड़कों ने ...इस रेप को दिया है अंजाम

अतिथि लेखक
2018-07-01 10:41:53
सब कुछ बिकता है धड़ल्ले सेमुफ़लिसों को मौत मोहलत नहीं देती
सब कुछ बिकता है धड़ल्ले से...मुफ़लिसों को ...मौत ....मोहलत नहीं देती

शोर तो यही है ...बग़ैर तेरी इजाज़त पत्ता नहीं हिलता ....तो क्या मैं ..समझूँ इन तमाशों में ...तू भी शरीक है ?

अतिथि लेखक
2018-06-29 15:52:14
उठेगें आवाज़ों के जनाज़े आवाज़ें फिर भी आयेंगी 
अब भीपूरी  तरह मरा नहीं वो तालाब
अब भी...पूरी  तरह मरा नहीं वो तालाब

कैसे बताऊँ...उन तालाबों को उनका यूँ ज़िंदा...चिन दिए जाना...ज़रूरी है.....शहर की तरक़्क़ी के लिए.....क्योंकि ..उन्हीं की क़ब्र की...मिट्टी पे ही ...

अतिथि लेखक
2018-06-03 12:50:23
आने वाले मौसम की बात  इस मौसम में ख़तरा है ख़तरा है डर है मृत्यु का
आने वाले मौसम की बात : इस मौसम में ख़तरा है/ ख़तरा है, डर है मृत्यु का

मनोज कुमार झा की दो कविताएँ

अतिथि लेखक
2018-05-23 18:24:09
मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में जिसे होना हो तो हो
मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में/ जिसे होना हो तो हो

मैं नहीं शामिल मुख्यधारा में जिसे होना हो तो हो क्या है तुम्हारी मुख्यधारा धार्मिक पाखण्ड पर्वत से निकली सांप्रदायिक अलगाव के गंदे ना...

जसबीर चावला
2018-05-13 13:59:33
तुम्हारी मौत सेबेहद ख़ुश हूँआसिफ़ाक्योंकि यहाँचंद मोमबत्तियों केपिघलने सेकुछ नहींपिघलने वाला
तुम्हारी मौत से....बेहद ख़ुश हूँ.....आसिफ़ा...क्योंकि यहाँ...चंद मोमबत्तियों के...पिघलने से...कुछ नहीं..पिघलने वाला

....मुझे यक़ीन है ..फिर से ...थमा दी जायेंगी ...लड़कियों को ...वही घिसी पिटी सी ..नसीहतें ....वही सलीक़े ..से रहने के ...मशवरे ... क़ुसूर तुम्हार...

अतिथि लेखक
2018-05-04 11:33:02
जब संघियों ने कहा - पृथ्वी माता की हत्या नहीं की जा सकती इसलिए हम उसकी हत्या करेंगे  जो पृथ्वी माता पर सवाल उठायेगा
जब संघियों ने कहा - पृथ्वी माता की हत्या नहीं की जा सकती/ इसलिए हम उसकी हत्या करेंगे / जो पृथ्वी माता पर सवाल उठायेगा

जब संघियों ने कहा - पृथ्वी माता की हत्या नहीं की जा सकती/ इसलिए हम उसकी हत्या करेंगे / जो पृथ्वी माता पर सवाल उठायेगा

अतिथि लेखक
2018-04-23 18:20:06
लड़कियों तुम मर ही जाओ पैदा होने से पहले ही  कोख में
लड़कियों तुम मर ही जाओ ...पैदा होने से पहले ही .. कोख में

No Need Of ...Justice .लड़कियों ....तुम मर ही जाओ ... पैदा होने से पहले .. कोख में ही ...या फिर ..पहले ..की तरह ..ही ..दे दिया जाये ..तुम्हारा .....

अतिथि लेखक
2018-04-14 14:02:48