आधार से घटिया चीज़ मैंने कोई नहीं देखी

अगर परिवार के लोग आधार संख्या नहीं बता पाए और ग़लती से किसी ऐसे मृतक के बारे में ये बता दें कि उसके पास आधार नहीं था तो सरकार परिजनों को जेल भेज देगी? 25,000 रुपए का जुर्माना लगा देगी? ...

अतिथि लेखक

 

दिलीप खान

पहले मुझे ये सोचकर हंसी आई कि अब डेथ सर्टिफिकेट के लिए भी आधार चाहिए। मैंने ख़बर पढ़ते ही अपनी मौत मुल्तवी करने की सोची। फिर पढ़ा कि मरने वाले के पास अगर आधार नहीं है तो भी वो मर सकता है। उसके लिए विशेष छूट है। मैं निश्चिंत हुआ कि सरकार मरने पर पाबंदी नहीं लगा रही है।

आगे पढ़ा तो हंसी क्षोभ और ग़ुस्से में तब्दील हो गई। मृतक के परिजन अगर आधार के बारे में ग़लत सूचना देते हैं तो उन्हें साल भर की जेल या 25,000 रुपए का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

मेरे पिता की मौत साढ़े 12 साल पहले हुई थी। डेथ सर्टिफिकेट के लिए PMCH वालों ने मुझे हफ़्तों झुलाया था। आज एक काग़ज़, कल दूसरे काग़ज़ के बहाने बनाता रहा। वो आदमी खुलेआम रिश्वत मांग रहा था। एक दिन जैक्सन और मिंटो हॉस्टल के 12-15 दोस्तों के साथ दो रैपटा लगाया तो अगले दिन बनाकर दे दिया था।

अब आधार के बहाने ज़ुर्माने और सज़ा का प्रावधान कर ऐसे किरानियों को और शक्तिशाली बना दिया गया है।

सरकार ये क्यों ज़रूरी समझ रही है कि किसी के बारे में परिवार वालों को सब कुछ पता होगा ही? किसी के पास आधार है कि नहीं है इसका पता परिवार को क्यों होना चाहिए? किसी के पास आधार है तो उसका नंबर क्यों परिवार वालों के पास होना चाहिए?

ऐसे में अगर परिवार के लोग आधार संख्या नहीं बता पाए और ग़लती से किसी ऐसे मृतक के बारे में ये बता दें कि उसके पास आधार नहीं था तो सरकार परिजनों को जेल भेज देगी? 25,000 रुपए का जुर्माना लगा देगी? आधार से घटिया चीज़ मैंने कोई नहीं देखी।

दिलीप खान की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

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