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मोदी की चिंता — अभी सिर्फ गुजरात चाहिए संसद जाए भाड़ में
मोदी की चिंता — अभी सिर्फ गुजरात चाहिए, संसद जाए भाड़ में !

मोदी-शाह के बारे में आम लोगों में एक अजीब सी दहशत भरी अवधारणा है कि जैसे ये आज के कलयुग के साक्षात रावण की सेना हैं, जो कुछ भी कर गुजरने की क्षमत...

अरुण माहेश्वरी
2017-11-22 23:29:06
हास्य और गुस्से का साथ कितना संभव
हास्य और गुस्से का साथ कितना संभव?

सीधे सोशल मीडिया पर कार्टून पोस्ट करना एक नया चलन है. यहां अच्छी-बुरी प्रतिक्रियाएं तुरंत आती हैं. कोई रोकटोक नहीं है. प्रिंट के मुकाबले सोशल मीड...

इकाॅनोमिक ऐंड पाॅलिटिकल वीकली
2017-11-22 23:23:56
सब कुछ निजी हैं तो धर्म और धर्मस्थल क्यों सार्वजनिक हैं वहां राष्ट्र और राजनीति की भूमिका क्यों होनी चाहिए
सब कुछ निजी हैं तो धर्म और धर्मस्थल क्यों सार्वजनिक हैं? वहां राष्ट्र और राजनीति की भूमिका क्यों होनी चाहिए?

भूमंडलीकरण के दौर में भी इस महादेश के नागरिक उसी दंगाई मानसिकता के शिकंजे में हैं, जिससे उन्हें रिहा करने की कोई सूरत नहीं बची। तभी से विस्थापन क...

पलाश विश्वास
2017-11-22 14:03:44
मोदी ऐसा एशिया और विश्व बनाना चाहते हैं जैसा डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं भारतीयों की भावनायें इससे भी आहत होती हैं मोदीजी
पद्मावती कंट्रोवर्सरी का अर्थशास्त्र मोदीराज में उभरे बेहिसाब मुस्लिम विद्वेष को ध्यान में रखकर विकसित किया गया
पद्मावती कंट्रोवर्सरी का अर्थशास्त्र, मोदीराज में उभरे बेहिसाब मुस्लिम विद्वेष को ध्यान में रखकर विकसित किया गया

पुतले फूंकने से बॉक्स ऑफिस पर गर्मी आती है, इसका हिसाब लगाकर ही इस गुजराती नंदन ने कंट्रोवर्सरी के जरिये दौलत कमाने की और बड़ी परिकल्पना अपनी नयी ...

अतिथि लेखक
2017-11-21 22:25:44
अयोध्या विवाद  खामख्वाह क्यों टहल रहे हैं श्री श्री रवि शंकर
अयोध्या विवाद : खामख्वाह क्यों टहल रहे हैं श्री श्री रवि शंकर

दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और गांधीवादी समाजवाद जैसे राजनीतिक शब्दों को अपनी बुनियादी सोच का आधार बनाने की कोशिश की।

शेष नारायण सिंह
2017-11-21 16:32:07
और भी गम हैं अयोध्या में श्री श्री जी
और भी गम हैं अयोध्या में श्री श्री जी!

अयोध्या की गलियों के बारे में कहा जाता है कि वे दुनिया की सबसे सुन्दर पर सबसे गन्दी गलियां हैं। इस नगरी के सुन्दरीकरण व पर्यटन के अन्तरराष्ट्रीय ...

कृष्ण प्रताप सिंह
2017-11-21 16:02:02
खोज रहा हूं खोया हुआ गांव मैदान पहाड़ अपना खेत। अपनी माटी।
खोज रहा हूं खोया हुआ गांव, मैदान, पहाड़, अपना खेत। अपनी माटी।

सारे चेहरे कारपोरेट हैं।गांव,देहात,खेत खलिहान,पेड़ पहाड़ सबकुछ इस वक्त कारपोरेट।भाषा भी कारपोरेट।बोलियां भी कारपोरेट। सिर्फ बची है पहचान।धर...

पलाश विश्वास
2017-11-21 14:05:23
गुजरात चुनाव के मौके पर बंदरों की सभा में नेताजी का भाषण
गुजरात चुनाव के मौके पर ...बंदरों की सभा में नेताजी का भाषण

बंदरों की सभा में नेताजी का भाषण चालू था-मैं आपकी आवाज को राष्ट्र की आवाज बनाऊंगा। बाग-बगीचे उजाड़ने को कानूनी जामा पहनाऊंगा। आप हमारे हनुमान हैं।...

राजीव मित्तल
2017-11-21 13:53:30
 गुजरात_विधानसभा_चुनाव  हार्दिक का साथ राहुल के साथ
# गुजरात_विधानसभा_चुनाव : हार्दिक का साथ राहुल के साथ

गुजरात_विधानसभा_चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर आ गया है..बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी हो गयी हैं..

राजीव रंजन श्रीवास्तव
2017-11-21 12:07:32
चिनफिंग इज चाइना  माओ के बाद चीन को एक बार फिर अपना चेयरमैन मिल चुका है
चिनफिंग इज चाइना : माओ के बाद चीन को एक बार फिर अपना चेयरमैन मिल चुका है

चीन अब अपनी महत्वाकांक्षाओं  को छुपाता नहीं है, उसने अपने मंसूबों को खोल दिया है। चैयरमैन चिनफिंग के नेतृत्व में चीन नये युग की तरफ कदम बढ़ा चुका है।  

जावेद अनीस
2017-11-20 22:12:47
मोदी का पतन सबको साफ दिखाई दे रहा कारण बाहरी नहीं उनका अंदरूनी
मोदी का पतन सबको साफ दिखाई दे रहा, कारण बाहरी नहीं उनका अंदरूनी

मोदी में इस नकारात्मकता अथवा मृत्युकांक्षा का तत्व है आरएसएस के उनके अपरिवर्तनीय, ग़ैर-द्वंद्वात्मक संस्कार। यही संस्कार जहाँ उन्हें जनता के विरु...

अरुण माहेश्वरी
2017-11-20 15:21:35
63 साल की उम्र में जाना भी कोई जाना है महाराज नारायण राव अमर रहें।
63 साल की उम्र में जाना भी कोई जाना है महाराज, नारायण राव अमर रहें।

मैं आज ही सोच रहा था कि अपने बीस साल पहले के दिन को याद करूंगा और कुछ लिखूंगा। मैंने बिलकुल नहीं सोचा था कि उस दिन को याद करते हुए मैं आज के वी ए...

शेष नारायण सिंह
2017-11-20 13:38:41
वाह रे संघ परिवार  1970 में जिस टीपू सुल्तान को देशभक्त बताया 2017 में वो बलात्कारी दुष्ट और कट्टरपंथी हो गया
वाह रे संघ परिवार ! 1970 में जिस टीपू सुल्तान को देशभक्त बताया 2017 में वो बलात्कारी, दुष्ट और कट्टरपंथी हो गया ?

सन 1970 के दशक में आरएसएस ने अपनी भारत-भारती श्रृंखला के तहत प्रकाशित एक पुस्तिका में टीपू की प्रशंसा करते हुए उन्हें देशभक्त बताया था।

राम पुनियानी
2017-11-20 12:54:32
का रे पगला न्यूटनवा भगवानौ से बड़ा है का
का रे पगला, न्यूटनवा भगवानौ से बड़ा है का?

वैसे भी लीक पर न चलना पागलपन ही माना जाता है बचपन की यादों के झरोखे से

ईश मिश्र
2017-11-19 20:08:17
जम्मू-कश्मीर सिर्फ वार्ताकार नियुक्त करने से क्या होगा
जम्मू-कश्मीर: सिर्फ वार्ताकार नियुक्त करने से क्या होगा?

कश्मीर के मामले में बातचीत की मामूली से मामूली पहल भी, मोदी सरकार तथा सत्ताधारी संघ-भाजपा को आसानी से हजम न होना एक ऐसी सचाई है, जो विशेष वार्ताक...

राजेंद्र शर्मा
2017-11-19 14:01:48
जौहर  कब और कैसे… जंगल यहां से शुरू होता है
जौहर : कब और कैसे…. जंगल यहां से शुरू होता है...

महमूद गजनवी के समय से गुजरात और राजस्थान में जौहर की परंपरा शुरू हुई...हालांकि इस्लाम के आने के पहले एक हज़ार साल में हिन्दू राजाओं के के बीच सेंक...

राजीव मित्तल
2017-11-19 13:48:40
यहां का मौजूदा राष्‍ट्रवाद ज़हरीला ही नहीं बेशर्म भी है जो पाकिस्‍तान ने नहीं किया वो भाजपा ने कर दिखाया
यहां का मौजूदा राष्‍ट्रवाद ज़हरीला ही नहीं, बेशर्म भी है... जो पाकिस्‍तान ने नहीं किया, वो भाजपा ने कर दिखाया

पंजाब नेशनल बैंक का नाम भी वंदे मातरम बैंक कर दीजिए। और बैकग्राउंड में जनता को पद्मावती के नाम पर लहकाए रहो, जिसका निर्देशक अमेज़न से 65 करोड़ की...

अभिषेक श्रीवास्तव
2017-11-19 11:26:02