अमरीका के सामने नतमस्तक 56 इंच का सीना, 70 साल में पहली बार भारत की इतनी फजीहत

भारत को ईरान में निवेश के लिए अमेरिका की इजाजत की जरूरत है ? यह भारत की विदेश नीति की बड़ी विफलता है। ...

अमरीका के सामने नतमस्तक 56 इंच का सीना, 70 साल में पहली बार भारत की इतनी फजीहत

भारत ईरान से नहीं खरीदेगा तेल

सत्येंद्र पीएस

भारत की नवरत्न कंपनी ओएनजीसी की विदेश इकाई OVL की ईरान के फरजाद बी में निवेश करने की योजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई।

Ovl ने अन्वेषण कर पाया था कि फरजाद बी ब्लॉक में भारी मात्रा में गैस भंडार है और वहां निवेश पर भारत को फायदा हो सकता है। लेकिन इस बीच अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिया।

अमेरिका ने सभी देशों से कहा कि कोई ईरान से तेल न खरीदे। रूस, चीन, जापान ने इस प्रतिबंध को अमेरिका का निजी मामला बताते हुए उसे मानने से इनकार कर दिया, वही भारत ने अपनी कम्पनियो को निर्देश दिया कि अन्य स्रोतों से वो तेल खरीदने का इंतजाम करें। उसने अमेरिका का प्रतिबन्ध सर झुकाकर स्वीकार कर लिया।

भारत को ईरान में निवेश के लिए अमेरिका की इजाजत की जरूरत है ?

Ovl का इरान में निवेश सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण और अमेरिका के विदेश व रक्षा मंत्री के बीच वार्ता पर निर्भर था। यह कथित वार्ता नरेंद्र मोदी के अमेरिका यात्रा में डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के दौरान तय हुई थी।

उसके बाद से यह वार्ता दूसरी बार टल गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री उत्तर कोरिया चले गए।

अमेरिका ने बताया भी नहीं कि पूर्व निर्धारित वार्ता टालने की क्या मजबूरी है। इधर भारत को ईरान में निवेश के लिए अमेरिका की इजाजत की जरूरत है।

यह भारत की विदेश नीति की बड़ी विफलता है।

भारत की इतनी फजीहत शायद पहली बार हो रही है कि अमेरिका का हर आदेश मानने के बावजूद वह भारत से बात करने तक को तैयार नहीं है।

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