बड़ा जटिल गणित है भारत-पकिस्तान, जिन्ना-गांधी और विभाजन का, इसे महज लफ्फाजी, उपद्रव, गली गलौज से नहीं समझा जा सकता

अय्यूब कैम्प लगातार यही प्रचार करता रहा कि फातिमा जिन्ना पाकिस्तान में भारत की एजेंट हैं। भारत के पास इस बात के प्रमाण रहे कि अलग पाकिस्तान की जिद के लिए जिन्ना को तैयार करने वाली फातिमा थीं...

पंकज चतुर्वेदी

फातिमा जिन्ना, मुहम्मद अली जिन्ना की केवल बहन नहीं थीं, उनकी राजनीतिक दिशा बदलने का बड़ा कारण थीं। फातिमा ने कोलकता से डेंटल डॉक्टर का कोर्स किया। जब जिन्ना की पत्नी रत्ती बाई का देहांत हो गया तो फातिमा ने ही उन्हें संभाला। कहा जाता है कि एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षधर जिन्ना को एक तंगदिल मुस्लिम राज्य के लिए कटिबद्ध बनाने वाली फातिमा जिन्ना ही थीं। जिन्ना की मौत तक वे ही उनके राजनीतिक पैंतरों को तय करती थीं। मुहम्मद अली जिन्ना सात भाई बहन थे, जिनमें वे सबसे बड़े थे, जबकि फातिमा सबसे छोटे से दूसरे नम्बर थीं।

मादरे मिल्लत के नाम से उन्हें सारे मुल्क में इज्जत बख्शी जाती थी। जिन्ना की मौत के बाद उनका पाकिस्तान के पहले प्रधान मंत्री लियाकत अली खान के साथ टकराव शुरू हो गया। सन 1964-65 में वह संयुक्त विपक्ष की तरफ से पाकिस्तान की पहली और आखिरी महिला राष्ट्रपति की उम्मीदवार बनीं। फातिमा को खान अब्दुल गफार खान के खुदाई खिदमतगार, पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीबुर्रहमान और वेल खान का समर्थन हांसिल था। उस समय यह प्रचार किया गया कि फातिमा को भारत का सपोर्ट है क्योंकि सीमांत गाँधी और बंग बंधू को भारत का करीबी कहा जाता था।

यह भी जान लें कि विभाजन के बाद फातिमा जिन्ना लम्बे समय तक भारत से गए मुसलमान यानि मुहाजिरों के पुनर्वास के काम में लगी रहीं और यह भी कहा गया कि इस कारण उनका भारत से लगाव भी हो गया था और वे मन ही मन विभाजन को गलत मानती थीं।

उस चुनाव में गुजरावालां में अय्यूब खान ने एक कुतिया को सड़क पर घुमाया जिसके गले में लालटेन लटकी थी। सनद रहे लालटेन फातिमा जिन्ना का चुनाव चिन्ह था। अय्यूब खान ने चुनाव में जम कर धांधली की और मादरे मिल्लत के नाम से इज्जत बख्शी जाने वाली फातिमा काफिर फातिमा जिन्ना चुनाव हार गयीं।

सन 65 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में धूल चटाई और प्रेसिडेंट अयूब खान से जुल्फिकार अली भुट्टो अलग हो गए। तभी 30 जुलाई 1967 को फातिमा की मौत हो गयी। उसके बाद पाकिस्तान में बहुत हिंसा हुयी। कहा गया कि अय्यूब खान ने उनकी हत्या करवाई। अय्यूब कैम्प लगातार यही प्रचार करता रहा कि फातिमा जिन्ना पाकिस्तान में भारत की एजेंट हैं। भारत के पास इस बात के प्रमाण रहे कि अलग पाकिस्तान की जिद के लिए जिन्ना को तैयार करने वाली फातिमा थीं।

पाकिस्तान में आज फातिमा के नाम पर मेडिकल कालेज, इस्लामाबाद में एक पार्क आदि हैं।

बड़ा जटिल गणित है भारत- पकिस्तान- जिन्ना- गांधी- विभाजन की- इसे महज लफ्फाजी, उपद्रव, गली गलौज से नहीं समझा जा सकता-- हाँ मूढ़ मगज के लिए अफवाह, कूढ़ मगज और बदतमीजी भी इसे समझ-बूझ नहीं सकते

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार हैं।)

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