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जानिए मानव कोशिका में कितने गुणसूत्र होते हैं?

Know how many chromosomes are there in a human cell?

यह प्रश्न थोड़ा बासी लग सकता है कि मानव कोशिका में कितने गुणसूत्र होते हैं। बच्चा-बच्चा जानता है कि इंसान की सामान्य कोशिका के केंद्रक में 23 जोड़ी यानी 46 गुणसूत्र पाए जाते हैं। और तो और, जीव विज्ञान की पाठ्य पुस्तकें यह भी साफ-साफ बताती हैं कि विभिन्न गुणसूत्रों का साइज़ वगैरह क्या हैं। ऐसे में मुझे यह पढ़कर बहुत आश्चर्य हुआ था कि 1956 तक हम मानते थे कि इंसानी द्विगुणित कोशिका में 24 जोड़ी अर्थात 48 गुणसूत्र होते हैं। मैं जानने को उत्सुक हुआ कि आखिर गिनती में यह गलती कैसे हुई होगी।

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दरअसल मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या का पता सबसे पहले 1923 में चला था। उन्नीसवीं सदी में यह स्पष्ट हो गया था कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक गुणों के पहुंचने का सम्बंध गुणसूत्रों से है। लिहाज़ा गुणसूत्रों और वंशानुगति के बीच सम्बंध (Relationship between chromosomes and inheritance) स्थापित होने के बाद गुणसूत्रों में काफी रुचि पैदा हो गई थी और कई कोशिका वैज्ञानिक कोशिका के केंद्रकों में पाए जाने वाले गुणसूत्रों का अध्ययन करने में जुटे थे। इनमें से एक प्रमुख कोशिका वैज्ञानिक थियोफिलस पेंटर (Theophilus Shickel Painter (August 22, 1889 – October 5, 1969) थे। उनकी वंशानुगति में गहरी रुचि थी और इसके चलते मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या पता लगाना उन्हें महत्त्वपूर्ण लगता था।

To see chromosomes, you need dividing cells.

सूक्ष्मदर्शी से देखने पर सामान्य अवस्था में कोशिकाओं का केंद्रक तो नज़र आ जाता है मगर गुणसूत्र नज़र नहीं आते क्योंकि वे एक लच्छे के रूप में मौजूद होते हैं। जब कोशिका का विभाजन होता है तब अलग-अलग गुणसूत्र सघन होकर एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप में नज़र आने लगते हैं। यही वह समय होता है जब इनकी गिनती की जा सकती है।

दूसरे शब्दों में गुणसूत्रों को देखने के लिए आपको विभाजित होती हुई कोशिकाएँ चाहिए। बीसवीं सदी की शुरुआत में गुणसूत्र सम्बंधी अध्ययन मुख्यत: अकशेरुकी जंतुओं पर (Chromosome studies on invertebrates) किए गए थे। आम तौर पर इनमें गुणसूत्रों की संख्या कम होती है।

पेंटर इंसानों में गुणसूत्रों का अध्ययन (Chromosome study in humans) करने को उत्सुक थे। इसके लिए उन्होंने मनुष्यों के वृषण की कोशिकाओं का अध्ययन किया। वे वृषण के ऊतक का नमूना लेकर उसे पिघले मोम में डाल देते थे और फिर मोम को ठोस हो जाने देते थे। अब इस ठोस मोम के पिंड की पतली-पतली स्लाइस काटी जाती थीं और उन्हें उसी मोम में कांच की स्लाइड पर रख दिया जाता था।

The Chemistry of Dyes and Staining

गुणसूत्रों को स्पष्ट देखने के लिए कुछ रंजकों का उपयोग किया जाता था और आज भी किया जाता है। रंजक यानी कुछ रंगीन पदार्थ होते हैं जो कोशिका के किसी खास उपांग से चिपककर उसे देखना आसान बना देते हैं। इस तकनीक को अभिरंजन कहते हैं। इसके बाद सूक्ष्मदर्शी की सहायता से कोशिकाओं को देखकर उनमें गुणसूत्रों की गिनती (Chromosome count) कर ली जाती थी। है ना सरल? तो ऐसे प्रयोगों के माध्यम से कई अवलोकन करके पेंटर इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि द्विगुणित मानव कोशिका में 24 जोड़ी यानी 48 गुणसूत्र होते हैं। यह निष्कर्ष उन्होंने जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल जूलॉजी (Journal of Experimental Zoology) में 1923 में प्रकाशित किया था।

The normal cell of a human has 46 chromosomes.

धीरे-धीरे यह माना जाने लगा कि यही सही संख्या है और 1953 में कोशिका वैज्ञानिक लियो सैक्स ने कहा भी था कि अब यह एक स्थापित सत्य है। मगर पेंटर द्वारा अपनाई गई इस तकनीक में कई समस्याएं नज़र आती हैं। 1923 में शायद नज़र नहीं आती होंगी मगर आज ज़रूर नज़र आती हैं। पेंटर के अवलोकनों के बाद कोशिका के अवलोकन की तकनीकों में लगातार सुधार आता गया। इन तकनीकों का उपयोग करके 1956 में दो वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र में दावा किया कि मानव कोशिका में 24 जोड़ी (यानी 48) नहीं बल्कि 23 जोड़ी (यानी 46) गुणसूत्र होते हैं। ये दो वैज्ञानिक थे – हो हिन तिजो और अल्बर्ट लेवन। जल्दी ही तिजो और लेवन के निष्कर्ष की पुष्टि हो गई और आज हम मानते हैं कि इंसान की सामान्य कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं।

What was lacking in the technique of Theophilus Painter

कई वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की है कि पेंटर की तकनीक में क्या खामी थी कि उन्हें 48 गुणसूत्र दिखे थे जबकि बाद में यह आंकड़ा गलत पाया गया। इसे समझने के लिए थोड़ी चहलकदमी अवलोकन की तकनीकों और अवलोकनों की व्याख्या के क्षेत्र में करनी होगी। यहां एक बात जान लेना अच्छा होगा। वैज्ञानिकों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने प्रयोगों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेंगे। इसी के आधार पर किसी निष्कर्ष की जांच की जा सकती है। पेंटर ने अपने प्रयोगों का सुंदर विवरण दिया है। इस विवरण में सूक्ष्मदर्शी में देखे गए प्रतिबिंब के चित्र भी शामिल हैं। ये चित्र जिस तकनीक की मदद से बनाए गए थे, उसे कैमरा ल्यूसिडा कहते हैं।

जानिए क्या है कैमरा ल्यूसिडा | camera lucida photography in Hindi

कैमरा ल्यूसिडा एक व्यवस्था होती है जिसमें आप सूक्ष्मदर्शी में जिस चीज़ को देख रहे हैं उसका एक प्रतिबिंब पास रखे एक कागज़ पर भी बन जाता है। इसकी मदद से सूक्ष्मदर्शी-अवलोकनों के काफी सटीक चित्र बनाए जा सकते हैं। तो, यह देखते हैं कि पेंटर अपने अवलोकनों के लिए किस विधि से कोशिका को तैयार करते थे। जैसा कि पहले बताया गया था, वे मानव वृषण के ऊतक (Human testicular tissue) लेकर उन्हें मोम में जमाकर स्लाइस काटते थे और उन स्लाइस का अध्ययन सूक्ष्मदर्शी की मदद से करते थे। मसलन, फ्रैन्क रडल का मत है कि पेंटर की अभिरंजन तकनीक का परिणाम था कि वे गुणसूत्र मांक 1 को एक अलग गुणसूत्र के रूप में नहीं पहचान सके थे।

गुणसूत्र 1 काफी बड़ा गुणसूत्र है जिसके सेंट्रोमीयर में एक पदार्थ होता है जिसे हेटराोमेटिन कहते हैं। पेंटर अभिरंजन के लिए हिमेटोज़ायलीन नामक रंजक (Hematoxylin) का उपयोग करते थे। रडल के मुताबिक, हुआ यह कि गुणसूत्र मांक 1 दो अलग-अलग टुकड़ों के रूप में नज़र आया था। यानी जहां बाकी गुणसूत्रों में सेंट्रोमीयर नज़र आता है, उस जगह पर गुणसूत्र मांक 1 में खाली जगह दिख रही थी और इसकी वजह से पेंटर ने इन्हें दो स्वतंत्र गुणसूत्र मान लिया। वैसे पेंटर के अवलोकन में एक बात और भी देखी जा सकती है। वे ऊतक को मोम में जमाकर स्लाइस काटते थे। इस विधि में आप पक्का नहीं कह सकते कि किसी भी स्लाइस में एक ही कोशिका का पूरा केंद्रक आ गया है। आपको एक साथ कई परतें नज़र आएंगी। तब आपको कई अवलोकनों को मिला-जुलाकर केंद्रक में उपस्थित गुणसूत्रों के बारे में निष्कर्ष निकालना होगा।

कुछ वैज्ञानिकों ने पेंटर के निष्कर्ष में त्रुटि के एक और विचित्र रुाोत की ओर ध्यान दिलाया है। पेंटर ने अध्ययन के लिए वृषण के ऊतकों के जो नमूने प्राप्त किए थे, वे सारे के सारे एक ही व्यक्ति के थे। कुछ लोगों को लगता है कि यह नामुमकिन नहीं है कि उस व्यक्ति विशेष में गुणसूत्रों की संख्या 48 ही रही हो। बहरहाल, त्रुटि का रुाोत जो भी रहा हो, मगर 1956 तक हम यही मानते रहे कि मानव कोशिका में 48 गुणसूत्र होते हैं। तिजो-लेवन की तकनीक सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन की तकनीकों में निरंतर सुधार होते रहे हैं। तिजो और लेवन ने जिस विधि से कोशिकाओं के अवलोकन किए वह काफी उन्नत थी, हालांकि यह भी सही है कि उसके बाद भी हम काफी आगे बढ़े हैं।

पेंटर के समय से पहला अंतर तो यह आया था कि कोशिकाओं में खास तौर से केंद्रक व गुणसूत्र के अवलोकन हेतु मोम में जमाकर स्लाइस काटने की विधि की जगह पर एक नई विधि का उपयोग होने लगा है। इस नई विधि में ऊतक के एक हिस्से को लेकर अभिरंजन करने के बाद कांच की स्लाइड पर रखा जाता है और कवर स्लिप से ढंक दिया जाता है। अब कवर स्लिप के ऊपर से ठोंक-ठोंककर उसका कचूमर बना देते हैं। इस तरह से करने पर स्लाइड पर कोशिकाओं की एक परत फैल जाती है और उनका अवलोकन आसानी से किया जा सकता है। जैसा कि पहले कहा गया था, कोशिकाओं में गुणसूत्रों को देखने के लिए विभाजित होती कोशिका का अवलोकन करना होता है। विभाजन के दौरान कोशिकाएं कई अवस्थाओं में से गुज़रती हैं। इनमें से कुछ अवस्थाएं ऐसी होती है जब गुणसूत्र सबसे सघन रूप में पाए जाते हैं और उन्हें देखना आसान होता है। तिजो और लेवन को एक ऐसा पदार्थ कोल्चिसिन उपलब्ध था जो कोशिकाओं को उस अवस्था में थाम लेता है जब गुणसूत्र सर्वाधिक सघन स्थिति में होते हैं। कोल्चिसिन की एक दिक्कत यह है कि यह जंतु कोशिकाओं के लिए विषैला होता है मगर तिजो और लेवन ने देखा था कि प्रयोगशाला में संवर्धित कोशिकाओं के अवलोकन के लिए यह बढ़िया काम करता है। एक बात यह भी देखी गई कि यदि कोशिका को थोड़े कम सांद्रता (यानी कोशिका के अंदर के घोल की अपेक्षा कम सांद्रता) वाले घोल में रखा जाए और वहीं थाम दिया जाए तो गुणसूत्र काफी अलग-अलग हो जाते हैं और टूटते भी नहीं।

तो कोल्चिसिन की मदद से सही अवस्था में कोशिका को थामकर अभिरंजन करके तिजो और लेवन ने 1956 में 22 अलग-अलग ऊतक संवर्धनों में से 261 नमूनों का विश्लेषण किया और यह देखकर चकित रह गए उन सबमें (एक को छोड़कर) 48 नहीं बल्कि 46 गुणसूत्र हैं। लेकिन उन्होंने पेंटर को गलत ठहराकर नई संख्या को स्वीकार करने में जल्दबाज़ी नहीं की। वे जानते थे कि उन्होंने जिन कोशिकाओं का अध्ययन किया है वे संवर्धन से प्राप्त हुई हैं। वे यह भी जानते थे कि उनके निष्कर्ष की पुष्टि सीधे शरीर से प्राप्त ऊतकों के अवलोकन से होना ज़रूरी है। उन्हें ज्यादा इन्तज़ार नहीं करना पड़ा। एक साल के अंदर ही दो अन्य वैज्ञानिकों ने मानव वृषण कोशिकाओं में गुणसूत्रों का अध्ययन करके पुष्टि कर दी कि मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र ही होते हैं। तब से हम मानते आए हैं कि सामान्य मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं।

ऐसा तो नहीं कि फिर एक बार पाठ्य पुस्तकों में बदलाव करना पड़ेगा?

46 की संख्या बदलने की संभावना बहुत कम है क्योंकि इसकी पुष्टि कई अलग-अलग स्रोतों से और तकनीकों से हो चुकी है। जैसे गुणसूत्रों के अभिरंजन की एक तकनीक है बैंडिंग। इस तकनीक में जिन अभिरंजकों का उपयोग किया जाता है वे गुणसूत्रों पर हल्के और गहरे रंग के पट्टों का निर्माण करते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र पर पट्टों का पैटर्न अनूठा होता है। इसलिए यदि कोई गुणसूत्र टूट भी जाए, तो पट्टों के पैटर्न के आधार पर पहचाना जा सकता है कि कौन-से टुकड़े एक ही गुणसूत्र के हिस्से हैं।

So whether it can now be accepted as a fact that a human cell has 46 chromosomes

तो क्या हम कहें कि अब यह एक तथ्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है कि मानव कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं, उसी तरह जैसे 1953 में मशहूर कोशिका वैज्ञानिक लियो सैक्स ने 48 गुणसूत्रों के बारे में दावा किया था?

डॉ. सुशील जोशी

(देशबन्धु में अक्तूबर 2012 में प्रकाशित लेख का संपादित रूप साभार)

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